कविता

भजन: श्री बांके बिहारी जी

तर्ज: कव्वाली पर्दा है पर्दा

मु: पर्दा क्यूँ पर्दा, हमसे क्यूँ पर्दा

पर्दा वाले को बेपर्दा न करदु

तो तो तो तेरा सेवक मैं न कहलाऊ

(प्रियतम प्यारे का मैं दर्शन न कर लू,

तो तो तो तेरा आशिक़ मैं न कहलाऊ )

अ १: मैं देखता हु जिधर, सब भक्त भी उधर देखे

तेरी मन मोहिनी सूरत की तरफ देखे

मेरे ख्वाबों के सावरिया, मैं हु तेरा ही बावरिया।

(तेरे प्यार मैं बावरिया )

मेरा रिश्ता (नाता) है जन्मों का, मैं आशिक़ दीवाना चरणों का,

तेरी सूरत ही देखूंगा, तेरे दर को न छोडूंगा।

मैं डरता न ज़माने से, लोगो की बातो और फ़साने से

अब मुझे अपना दीदार करदे, अपना दीदार करदे।

दास की लाज बचा दे,

तेरे को इन नैनो मैं बसा न लू तो, तो तो

सेवक मैं न कहलाऊ

पर्दा वाले को बेपर्दा न करदु

तो तो तो तेरा सेवक मैं न कहलाऊ