बच्चे सरकार चलायेंगे

बच्चे सरकार चलायेंगे

दिल्ली जाकर अब हम तो,

अपनी सरकार बनायेंगे|

भरत देश के बालक हैं हम,

भारत देश चलायेंगे|

 

जब अपनी सरकार बनेगी,

ऐसा अलख जगायेंगे|

भय और भूख‌ मिटेगी पल मॆं,

भ्रष्टाचार हटायेंगे|

 

अब आतंकी सीमाओं से,

भीतर न घुस पायेंगे|

यदि घुसे चोरी चोरी तो,

सारे मारे जायेंगे|

 

स्वच्छ प्रशासन देंगे सबको,

बिजली घर घर में होगी|

बिना कटोती मिलेगी सबको,

यह करके दिखलायेंगे|

 

त्राहि त्राहि भी अब पानी की,

किसी गांव में न होगी|

सारे शहर और कस्बों को,

हम पानी पिलवायेंगे|

 

रिश्वत ,घूस कमीशन लेता,

अगर कोई भी मिलता है|

बीच सड़क या चौराहे पर,

हम फाँसी लटकायेंगे|

 

डर के मारे भूत भागते,

ऐसा लिखा किताबों में|

यही व्यवस्था प्रजातंत्र में,

हम करके दिखलायेंगे|

 

तस्कर डाकू राजनीति में,

अब घुस भी न पायेंगे|

यदि आ गये चोरी से तो,

उनको मार भगायेंगे|

 

बच्चों के द्वारा बच्चों की,

और बच्चों की ही खातिर|

दिल्ली में लंबे अर्से तक,

हम सरकार चलायेंगे|

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव
लेखन विगत दो दशकों से अधिक समय से कहानी,कवितायें व्यंग्य ,लघु कथाएं लेख, बुंदेली लोकगीत,बुंदेली लघु कथाए,बुंदेली गज़लों का लेखन प्रकाशन लोकमत समाचार नागपुर में तीन वर्षों तक व्यंग्य स्तंभ तीर तुक्का, रंग बेरंग में प्रकाशन,दैनिक भास्कर ,नवभारत,अमृत संदेश, जबलपुर एक्सप्रेस,पंजाब केसरी,एवं देश के लगभग सभी हिंदी समाचार पत्रों में व्यंग्योँ का प्रकाशन, कविताएं बालगीतों क्षणिकांओं का भी प्रकाशन हुआ|पत्रिकाओं हम सब साथ साथ दिल्ली,शुभ तारिका अंबाला,न्यामती फरीदाबाद ,कादंबिनी दिल्ली बाईसा उज्जैन मसी कागद इत्यादि में कई रचनाएं प्रकाशित|

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