तर्ज: लोक गीत
दोहा: गोपियाँ कृष्णा के प्रेम में हो गयी थी दीवानी,
श्याम को देखने नन्द भवन जावें हैं मस्तानी।
मु: समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2
हमारौ न केहनौ माने
समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी
अ १: दधि बेचन मथुरा को जाऊ
मार्ग में ही जाये ठाडो पाऊ
मि: ग्वालो संग मिलके रोज ही लूट माचवे
समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2
अ २: कछु खावे कछु ग्वालो को खिलावे
मटुकिया फोड़ रोज गिरावे
मि: कंस राजा से करू शिकायत
नाहक पकड़ो जावे
समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2
अ ३: घर घर जाके माखन खातों
छींको तोड़ के दही गिरातो
मि: पनघट पर पनिया को जाऊ
वहाँ भी खूब सतावे
समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2
अ ४: नन्दो बल्लो भजन बना रहे
माखन चोर की महिमा गाये रहे
मि: कंस का तेरो खसम लागे
वाकी तू क्यों धौस दिखावे
समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2