गजल

गोपियों की शिकायत

तर्ज: लोक गीत

दोहा: गोपियाँ कृष्णा के प्रेम में हो गयी थी दीवानी,

श्याम को देखने नन्द भवन जावें हैं मस्तानी।

मु: समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2

हमारौ न केहनौ माने

समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी

अ १: दधि बेचन मथुरा को जाऊ

मार्ग में ही जाये ठाडो पाऊ

मि: ग्वालो संग मिलके रोज ही लूट माचवे

समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2

अ २: कछु खावे कछु ग्वालो को खिलावे

मटुकिया फोड़ रोज गिरावे

मि: कंस राजा से करू शिकायत

नाहक पकड़ो जावे

समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2

अ ३: घर घर जाके माखन खातों

छींको तोड़ के दही गिरातो

मि: पनघट पर पनिया को जाऊ

वहाँ भी खूब सतावे

समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2

अ ४: नन्दो बल्लो भजन बना रहे

माखन चोर की महिमा गाये रहे

मि: कंस का तेरो खसम लागे

वाकी तू क्यों धौस दिखावे

समझाये दे अपने कान्हा को ओ जसोदा रानी -2