लेख

काल चक्र का संगम

नववर्ष की यात्रा

लेखक-पवन शुक्ला अधिवक्ता

​समय कोई ठहरी हुई वस्तु नहीं, बल्कि एक अविरल धारा है। जब हम ‘नववर्ष’ शब्द का उच्चारण करते हैं, तो यह केवल कैलेंडर के पन्ने पलटने का उत्सव नहीं होता, बल्कि यह काल चक्र के उस मिलन बिंदु (संगम) का प्रतीक है जहाँ अतीत का अनुभव, वर्तमान का उल्लास और भविष्य की आशाएं एक साथ आकर खड़ी हो जाती हैं।

​समय का पहिया और हमारी परंपराएं

​भारतीय दर्शन में काल को ‘चक्र’ माना गया है—एक ऐसा गोलाकार पथ जिसका न कोई आदि है न अंत। पश्चिम में समय को अक्सर एक सीधी रेखा माना जाता है, जहाँ बीता हुआ कल कभी लौटकर नहीं आता। परंतु, जब हम नववर्ष मनाते हैं, तो हम इन दोनों विचारधाराओं के संगम पर खड़े होते हैं।

​भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में नववर्ष केवल 1 जनवरी तक सीमित नहीं है। हमारे यहाँ चैत्र प्रतिपदा (गुड़ी पड़वा), बैसाखी, पोंगल और विशु के रूप में प्रकृति के साथ तालमेल बिठाते हुए नववर्ष मनाए जाते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि मानव सभ्यता ने हमेशा से समय को नए सिरे से परिभाषित करने और उत्सवों के माध्यम से ‘नई शुरुआत’ को महत्व दिया है।
​आधुनिकता और बदलता स्वरूप
​बदलते समय के साथ नववर्ष मनाने के तौर-तरीकों में भारी बदलाव आया है। आज का नववर्ष डिजिटल क्रांति और वैश्वीकरण के रंग में रंगा हुआ है।

​डिजिटल पदचिह्न

अब शुभकामनाओं का आदान-प्रदान हाथ से लिखे पत्रों से बढ़कर व्हाट्सएप संदेशों, इंस्टाग्राम रील्स और सोशल मीडिया पोस्ट तक सिमट गया है। इसपर विचार करना व्यक्ति की जिम्मेदारी है

​वैश्विक उत्सव

31 दिसंबर की रात अब केवल एक पश्चिमी त्योहार नहीं रह गया है, बल्कि यह एक वैश्विक संस्कृति बन चुका है। सिडनी के ओपेरा हाउस से लेकर न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर तक, आतिशबाजी का शोर एक ही स्वर में गूंजता है—”नई शुरुआत।”
​परंतु, इस चमक-धमक के बीच हमें यह सोचना होगा कि क्या हम वास्तव में समय के मूल्य को समझ पा रहे हैं?

​आत्म-चिंतन का क्षण क्या खोया, क्या पाया

​नववर्ष केवल पार्टी करने या शोर मचाने का नाम नहीं है। यह आत्म-साक्षात्कार का एक पवित्र क्षण है। जिस तरह एक व्यापारी वर्ष के अंत में अपने बही-खातों का मिलान करता है, उसी तरह प्रत्येक मनुष्य को अपने जीवन के ‘अनुभवों की डायरी’ को खोलकर देखना चाहिए।

​अतीत की सीख

पिछले वर्ष की गलतियां हमारी गुरु हैं। जो असफलताएं हमें मिलीं, वे काल चक्र के वे हिस्से थे जिन्होंने हमें धैर्य सिखाया।

​वर्तमान का आनंद

अक्सर हम भविष्य की चिंताओं में इतने खो जाते हैं कि 1 जनवरी की उस गुनगुनी धूप का आनंद लेना भूल जाते हैं, जो नए साल का पहला उपहार होती है।

​संकल्प की शक्ति

संकल्प लेना एक प्राचीन परंपरा है। हालांकि, बदलते दौर में यह एक ‘ट्रेंड’ बन गया है जो अक्सर हफ्ते भर में टूट जाता है। सच्चा संकल्प वह है जो हमें भीतर से अनुशासित करे।

​”समय न तो रुकता है, न ही थकता है। वह बस बदलता रहता है। समझदारी इस बदलाव के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने में है।”

​काल चक्र का आध्यात्मिक पक्ष
​प्राचीन ग्रंथों में कहा गया है कि काल ही सृजन करता है और काल ही संहार। नववर्ष का आगमन हमें याद दिलाता है कि हम इस विराट ब्रह्मांड के छोटे से हिस्से हैं। जब सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करता है या पृथ्वी सूर्य का एक चक्कर पूरा करती है, तो वह हमें संदेश देती है कि गति ही जीवन है।

​आज के भागदौड़ भरे जीवन में, जहाँ तनाव और प्रतिस्पर्धा ने सुख-चैन छीन लिया है,नववर्ष एक ‘रीसेट’ बटन की तरह कार्य करता है। यह हमें एक मानसिक राहत देता है कि “चलो, जो बुरा था वह बीत गया, अब कुछ नया शुरू करने का अवसर है।”

​समाज और नववर्ष की जिम्मेदारी
​एक सुंदर समाज के निर्माण में नववर्ष की भूमिका अहम है। बदलते समय में हमें केवल अपनी व्यक्तिगत प्रगति का ही संकल्प नहीं लेना चाहिए, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी को भी समझना चाहिए।

​प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता- क्या हम इस नए साल में कम प्लास्टिक इस्तेमाल करने का संकल्प ले सकते हैं?

​समानता का भाव-क्या हम अपने उत्सव में उन लोगों को शामिल कर सकते हैं जो हाशिए पर हैं?
​जब हम अपनी खुशियों को दूसरों के साथ बांटते हैं, तभी काल चक्र का यह संगम सार्थक होता है।

​काल चक्र निरंतर घूम रहा है। 2025 की स्मृतियां अब इतिहास का हिस्सा बन रही हैं और 2026 की संभावनाएं हमारे द्वार पर दस्तक दे रही हैं। नववर्ष का यह संगम हमें सिखाता है कि परिवर्तन ही शाश्वत सत्य है।

​बदलते नववर्ष के साथ हमें अपनी जड़ों (संस्कारों) को पकड़े रखते हुए आधुनिकता के पंख फैलाने चाहिए। यह केवल एक कैलेंडर का बदलाव नहीं, बल्कि हमारे विचारों, व्यवहार और दृष्टिकोण में बदलाव का उत्सव होना चाहिए। आइए, इस नववर्ष पर हम केवल कैलेंडर न बदलें, बल्कि खुद को थोड़ा और बेहतर बनाने का प्रयास करें।

​यह वर्ष आपके लिए केवल सफलता ही नहीं, बल्कि शांति और संतुष्टि का कालखंड भी सिद्ध हो।