राजनीति

सरकार विरोध से देश विरोध तक पहुंच गयी कांग्रेस

राजेश कुमार पासी

कहा जाता है कि संकट के समय मन को शांत रखना चाहिए और संकट के गुजरने का इंतजार करना चाहिए। जल्दबाजी और घबराहट में गलत फैसले हो जाते हैं। कांग्रेस का संकटकाल चल रहा है। कांग्रेस को केंद्र की सत्ता से बाहर हुए 12 साल बीत चुके हैं और अभी न जाने कितने साल उसे और इंतजार करना होगा। कांग्रेस इतने समय तक कभी भी सत्ता से बाहर नहीं रही है, इसलिए उसे पता नहीं है कि विपक्ष में कैसे रहा जाता है। कांग्रेस मुख्य रूप से सत्ताधारी पार्टी रही है, विपक्ष की भूमिका में उसे दिक्कत हो रही है। वो सत्ता के इंतजार में अधीर होती जा रही है, क्योंकि उससे सत्ता आती दिखाई नहीं दे रही है।  इस इंतज़ार को खत्म करने के दो तरीके हैं, एक है कि चुपचाप अपने समय का इंतजार किया जाये और दूसरा है कि इसके लिए प्रयास किए जाएं। कांग्रेस दोनों ही काम नहीं कर पा रही है, वो सत्ता पाने की छटपटाहट में गलत रास्ते पर चल पड़ी है। कांग्रेस विपक्ष में है और विपक्ष का काम होता है कि वो सरकार की गलत नीतियों और फैसलों का विरोध करे।

देखा जाए तो लोकतांत्रिक व्यवस्था में ये विपक्ष का न  केवल अधिकार है, बल्कि उसका दायित्व भी है। विपक्ष का काम सरकार की गलतियों पर उसे रोकना और टोकना होता है, लेकिन कई बार विपक्ष सरकार का विरोध करना ही अपना काम समझ लेता है। आज कांग्रेस और विपक्ष के ज्यादातर नेता सरकार के हर फैसले और नीति का विरोध करते हैं, वो  सही है या गलत, इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। देखा जाए तो विपक्ष की ये रणनीति भी सही नहीं है क्योंकि सरकार का विरोध उसके फैसले और नीतियों के गुण-दोष के आधार पर होना चाहिए। पिछले कुछ समय से देखने में आ रहा है कि कांग्रेस मोदी सरकार के विरोध में देश विरोध की ओर बढ़ रही है। कांग्रेस के लिए सरकार और देश में अंतर करना मुश्किल हो रहा है। सरकार के अलावा कांग्रेस ने संवैधानिक संस्थाओं पर भी हमले शुरू कर दिए हैं जबकि इन संस्थाओं को उसने ही खड़ा किया है। संविधान की रक्षा का दावा करने वाली कांग्रेस संवैधानिक संस्थाओं के खिलाफ ऐसे बयान देती है, जैसे ये सरकार द्वारा नियंत्रित हों। कांग्रेस ये भूल गयी है कि सरकार आती-जाती रहती है,लेकिन देश और देश की व्यवस्था ऐसे ही रहती है। 

दिल्ली में एआई सम्मेलन चल रहा है और इसमें दुनिया के 100 से ज्यादा देश हिस्सा ले रहे हैं। 20 से ज्यादा देशों के राष्ट्राध्यक्ष इस कार्यक्रम के लिए आये हुए हैं और इसके अलावा दर्जनों विदेशी नेता भी शामिल हुए हैं।  बड़ी-बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों के 40 से ज्यादा सीईओ इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।  लगभग 3 लाख लोगों ने इस कार्यक्रम को देखने के लिए पंजीकरण करवाया है। पूरी दुनिया की नजर इस कार्यक्रम पर लगी हुई है। फ्रांस में आयोजित पिछले एआई सम्मेलन में सिर्फ 1500 लोगों ने हिस्सा लिया था, जबकि भारत के इस कार्यक्रम में 3 लाख लोग शामिल हो रहे हैं, इससे पूरी दुनिया हतप्रभ है कि भारत ने ये कैसे कर लिया । भारतीय युवाओं की प्रतिभा का लोहा दुनिया मान रही है । भारत के आर्थिक विकास में ये सम्मेलन बड़ी भूमिका निभाने जा रहा है। जो सम्मेलन पूरी दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बड़ा रहा था, कांग्रेस ने उस सम्मेलन को बदनाम करने का घिनौना काम किया है। इस सम्मेलन के आयोजन स्थल पर यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने अर्धनग्न होकर ऐसी फूहड़ता का प्रदर्शन किया है कि पूरा देश शर्मिंदा हो गया है। यूथ कांग्रेस ने प्रदर्शन के तुरंत बाद पोस्ट करके इसके लिए अपने कार्यकर्ताओं के काम की तारीफ की है । अर्धनग्न होकर प्रदर्शन करने गए यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को आम जनता ने पीट-पीट कर कार्यक्रम से बाहर निकाल दिया। इससे जनता के गुस्से का अंदाजा लगाया जा सकता है।

यूथ कांग्रेस की ये हरकत सोच समझ कर की गई लगती है, क्योंकि इसके लिए पूरी तैयारी की गई है। ये न तो आंदोलन है और न ही विरोध प्रदर्शन है, ये देश को बदनाम करने की साजिश है। जनता की प्रतिक्रिया को देखने के बाद कांग्रेस पीछे हट गई, लेकिन उसने माफी नहीं मांगी है। इसके विपरीत कांग्रेस के नेताओं और प्रवक्ताओं ने इस घटना का बचाव किया है। कहा जा रहा है कि सरकार का विरोध करना विपक्ष का अधिकार है, इसमें गलत क्या है। कांग्रेस को अच्छी तरह पता है कि उसने बहुत बड़ी गलती कर दी है, इसलिए उसके बड़े नेताओं ने इस मामले पर चुप्पी साध ली है।

 कोरोना के बाद मोदी बड़े विरोध का सामना कर रहे हैं और ये विरोध भी उनके बड़े समर्थक वर्ग द्वारा किया जा रहा है। यूजीसी के दिशानिर्देशों के विरोध में मोदी का कट्टर समर्थक सवर्ण वर्ग बेहद नाराज है। देखा जाए तो इस समय भाजपा बैकफुट पर नजर आ रही है। मोदी सरकार को पता चल गया है कि उससे बड़ी गलती हो गई है, इसलिए वो इस मामले पर चुप है। यूथ कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नंगे होकर जो प्रदर्शन किया है, उससे पूरा देश कांग्रेस के प्रति नफरत से भर गया है। राजनीतिक रूप से निष्पक्ष व्यक्ति भी समझ नहीं पा रहे हैं कि ये कांग्रेस ने किया क्या है। यूजीसी के मामले को लेकर बैकफुट पर चली गई भाजपा को खड़े होने का मौका मिल गया है। पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल नरवणे की किताब को लेकर कांग्रेस ने पूरा संसद सत्र बर्बाद कर दिया है जबकि उस मुद्दे में कोई जान नहीं थी। उस मुद्दे को उठाना भी एक तरह से देशविरोधी काम था। जिस किताब को देश की सेना ने प्रकाशित करने की अनुमति न दी हो, उसके कुछ अंशों लेकर आंदोलन करना देशविरोधी माना जाएगा। पूरी निर्लज्जता के साथ भारत की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में कांग्रेसियों का प्रदर्शन बता रहा है कि कांग्रेस वैचारिक दिवालियेपन का शिकार हो गई है। इससे पता चलता है कि क्यों कांग्रेस लगातार चुनाव हारती जा रही है। राहुल गांधी वोट चोरी का शोर मचाते हैं, लेकिन उनके नेताओं और  कार्यकर्ताओं की ऐसी ओछी हरकतें वोट चोरी करवा रही हैं।

जिन युवकों ने इस प्रदर्शन में हिस्सा लिया, वो आम कार्यकर्ता नहीं हैं बल्कि सभी संगठन में पदाधिकारी हैं। इससे पता चलता है कि राहुल गांधी की सोच और आचरण कांग्रेस में नीचे तक चला गया है। कांग्रेस को पता नहीं है कि कौन सा काम कहाँ और कब करना है। मोदी सरकार को बदनाम करने के लिए कांग्रेस किसी भी हद तक जाने को तैयार है। समझ नहीं आता है कि मोदी विरोध में कांग्रेस कितना और नीचे गिरेगी। जब लगता है कि कांग्रेस इससे ज्यादा नीचे नहीं गिरेगी, तभी कांग्रेस सबको गलत साबित कर देती है। कांग्रेस की इस हरकत के बाद अन्य विपक्षी दल भी उसका विरोध कर रहे हैं। कट्टर मोदी विरोधी राजद नेता मनोज कुमार झा ने कहा है कि कांग्रेस को सम्मेलन स्थल पर ये काम नहीं करना चाहिए था, इससे देश की बदनामी होती है। बसपा नेता मायावती ने भी कांग्रेस के प्रदर्शन की कड़ी निंदा की है। राहुल गांधी के सहयोगी और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि जहां पूरी दुनिया के डेलीगेट्स आ रहे हो, वहां नंगे होकर ऐसा प्रदर्शन करना ठीक नहीं है। कांग्रेस नेताओं के कारण जो हंगामा हुआ है, मैं उसके पक्ष में नहीं हूं। इससे पता चलता है कि इंडिया गठबंधन भी कांग्रेस की इस हरकत से परेशान है।

लगातार चुनावी हार ने कांग्रेस की राजनीतिक समझ को पंगु कर दिया है, इसलिए उसकी राजनीतिक जमीन खिसकती जा रही है। कांग्रेस अपने कार्यकर्ताओं के इस भोंडे प्रदर्शन का बड़ी बेशर्मी के साथ बचाव कर रही है। उसे अहसास ही नहीं है कि वो मोदी के अंधे विरोध में देश विरोध की ओर चली गई है। देश की जनता में कांग्रेस की लोकप्रियता लगातार कम होती जा रही है। केंद्र की सत्ता से बाहर होने के बाद कांग्रेस धीरे-धीरे राज्यों की सत्ता से भी बाहर जा रही है। जिस पार्टी ने देश पर सबसे ज्यादा समय तक शासन किया है, वो यह भी भूल गयी है कि अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में घुसकर प्रदर्शन नहीं किया जाता है क्योंकि इनसे देश की प्रतिष्ठा जुड़ी हुई होती है। कांग्रेस को पता है कि ये न तो भाजपा का कार्यक्रम था और न ही ये मोदी सरकार का कार्यक्रम था, फिर वो यहां किसका विरोध कर रही थी। ऐसे कार्यक्रम किसी दल या नेता के नहीं होते बल्कि देश के होते हैं। इन कार्यक्रमों का आयोजन जरूर सरकार द्वारा किया जाता है लेकिन ये कार्यक्रम जनता के होते हैं। जनता के कार्यक्रम में हंगामा करके मोदी सरकार को नुकसान नहीं पहुंचाया जा सकता, बल्कि खुद का नुकसान होता है।

कांग्रेस के कई नेताओं ने कहा है कि प्रदर्शन करना गलत नहीं था, लेकिन जगह गलत चुनी गई थी।  केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने कहा था कि नेता विपक्ष देश के लिए खतरनाक हो गया है तो उनका विरोध हुआ लेकिन इस प्रदर्शन के बाद साबित हो गया है कि वो सही कह रहे थे। कांग्रेस के इस कदम को उसकी कुंठा, हताशा, निराशा और बौखलाहट कह सकते हैं। इससे लगता है कि राहुल गांधी सत्ता पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं ।  मोदी सरकार को घेरने के चक्कर में वो खुद का नुकसान कर रहे हैं। लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना जरूरी है, लेकिन कांग्रेस जैसा विपक्ष लोकतंत्र को कमजोर करता है। कांग्रेस को सत्ता पाने से ज्यादा अच्छा विपक्ष बनने की कोशिश करनी होगी। कांग्रेस भाजपा की छवि खराब करके सत्ता पाना चाहती है लेकिन उसकी अपनी छवि बिगड़ती जा रही है। 

राजेश कुमार पासी