कितना प्यार करती हूँ तुमको

कितना प्यार करती हूँ तुमको
शायद तुम ये जानते नहीं
दूर रहकर भी कितने पास हूँ
क्यों तुम ये मानते नहीं ?

तुम मेरे सूर्य देव हो,मै किरण हूँ तुम्हारी
दिन निकलते ही साथ चलती हूँ तुम्हारे
सुबह जो सुनते हो पक्षियों की चहचहाट
मै ही तो गुनगुनाती हूँ कान में तुम्हारे

उपवन में जो तुम देखते हो कलियाँ 
आगमन पर बनती हूँ फूल लिये तुम्हारे
बंद रक्खा था जब साथ सोये थे मेरे
आजाद किया था तुम्हे उठते तुम्हारे

सुबह जो सूंघते है वो गंध हे मेरी
सुबह जो चलती है वायु  तो मेरी
मंद समीर के झोके जब चलते
आँखे मूँद लेती हूँ चलते चलते

ऊपर से गिरी है जब बूँद एक नीचे
समझ न लेना ये बादल वाली  बूंदे
होते है वे मेरे प्यार के आँसू
जो टपकते है बनकर प्यार की बूंदे

होते हो जब दोपहर गगन बीच तुम
चारो तरफ अग्नि फैलाते हो तुम
उसको और कुछ समझना ना तुम
वह प्यार की अग्न है लगाते हो तुम

शाम को जब पश्चिम में अस्त हो तुम
साथ में ही तो छिप जाते हम और तुम
इसका दूसरा अर्थ निकाले ये न दुनिया
दिन की थकान मिटाते हम और तुम

आर के रस्तोगी 

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आर के रस्तोगी
जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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