नवीन की ताजपोशी के सियासी मायने
डॉ. रमेश ठाकुर
नितिन नवीन को पार्टी की कमान सौंपकर भारतीय जनता पार्टी ने सियासी पटल पर एक नई इबारत लिखी है। पार्टी में वरिष्ठों और अनुभवी नेताओं की लंबी कतार होने के बावजूद एक युवा नेता को अध्यक्ष बनाने का सीधा-सीधा मतलब है भारतीय राजनीति में नई संस्कृति को बढ़ावा देना। दरअसल, ये ऐसा सियासी संदेश है जिसे दूसरे दलो को भी सीखना चाहिए। देश में तमाम दल ऐसे हैं जो परिवार से घिरे हैं। उनके यहां अध्यक्ष पार्टी से किसी सामान्य कार्यकर्ताओं को बनाने की रत्ती भर भी परंपरा नहीं है। कोई सोच भी नहीं सकता कि टीएमसी, शिवसेना, सपा, बसपा, टीडीपी जैसी पार्टियों में कोई सामान्य पार्टी का कार्यकर्ता अध्यक्ष भी बने लेकिन भाजपा ने नितिन नवीन को अपना अध्यक्ष बनाकर ऐसे दलों को सोचने पर विवश कर दिया है। इस परंपरा को कोई अपनाए या नहीं लेकिन दूसरे दलों के कार्यकर्ताओं में चेतनाएं जरूर जग गई हैं। वह भी अपने दल में ऐसे उच्च पदों पर आसीन होने की कल्पनाएं करेंगे हालांकि, ऐसा दूसरे दलों में भी होगा, संभव नहीं?
नवीन की ताजपोशी किसी चमत्कार से कम नहीं? देशवासी भाजपा के इस कदम को राजनीति में बदलती हुई नई तस्वीर के रूप में देख रहे हैं। बीते 14 दिसंबर को उन्हें कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया और 20 जनवरी को पूर्णकालिक ओहदे पर बिठा दिया गया, वह भी निविर्रोध? ये अकल्पनीय है और चमत्कारी फैसले जैसा है। नवीन का कार्यकारी अध्यक्ष का प्रोबेशन समय एक महीना ही रहा हालांकि, तमाम राजनीतिक पंड़ित नवीन के सामने पार्टी की लय को बरकरार रखने की चुनौती देख रहे हैं। निश्चित रूप से ऐसा देखा जाएगा, कयास भी लगाए जाएंगे लेकिन संगठन बड़ा है, टीम वर्क बेहतरीन है, सपोर्ट उन्हें वरिष्ठों की मिलेगी। इसलिए हो सकता है वह प्रेशर न लें। वैसे, नितिन नवीन की संगठनात्मक क्षमता का आकलन पार्टी अगले एकाध साल में ही कर लेगी जिसमें बंगाल विधानसभा चुनाव पहली परीक्षा होगी। बंगाल को जीतना पार्टी का न सिर्फ सपना है बल्कि मोदी-शाह के लिए प्रतिष्ठा का सवाल भी बन हुआ है।
नवीन के समक्ष एक सबसे बड़ी चुनौती तो 2014 से भारतीय जनता पार्टी ने जो विस्तार किया है, उसे यथावत रखने की रहेगी। केंद्र में नरेंद्र मोदी के आगमन के बाद पार्टी में सदस्यों की संख्या पिछले के मुकाबले आधे से ज्यादा बढ़ी। क्योंकि सदस्यता के लिहाज से भाजपा मौजूदा वक्त में विश्व की सबसे बड़ी पार्टी है जिसमें युवाओं की तादाद बहुतायत है, इसलिए युवा नेताओं के जोश और अनुभव में उन्हें तालमेल बिठाकर चलना होगा। दक्षिण भारत को भेदना अब भाजपा के लिए अंतिम लक्ष्य हो गया है। वह हिस्सा उनसे अभी भी अभेद है। कर्नाटक में पार्टी सरकार बना चुकी है। आंध्र प्रदेश में टीडीपी के गठबंधन में है लेकिन तेलंगाना, तमिलनाडु में सफलता नहीं मिली है। हालांकि, केरल में पहली बार भाजपा का एक इकलौता सांसद बना और तिरुवनंतपुरम में मेयर बनाने में सफल हो चुकी है पर, पूर्णरूपी कब्जा करने की कसक अभी बाकी है। नवीन को इन्हीं चुनौतियों से जूझना पड़ेगा।
भाजपा नवीन में संगठनात्मक मजबूती पहले देख चुकी है। 2023 के छत्तीसगढ़ विधान सभा चुनाव में पार्टी की जीत को नितिन नवीन के राजनीतिक जीवन का सबसे महत्त्वपूर्ण मोड़ माना जाता है। तब, उनकी बड़े नेताओं ने प्रशंसाएं भी की थी। नवीन तभी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह के चहेते बनें। तभी, तो उन्हें राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष बनाने के सवा महीने बाद ही समूची पार्टी की बागडोर सौंप दी। पद को संभालने वाले अब तक के सबसे युवा अध्यक्ष हैं नवीन। लेकिन उनके करियर को असली रफ्तार साल 2019 में मिली थी जब उन्हें सिक्किम विधान सभा चुनाव में भाजपा के अभियान की कमान सौंपी गई थी। फिलहाल, भाजपा के नए बॉस अब नितिन नवीन बनें हैं। कैसे होंगे अगले कुछ महीने उनके लिए, पहले से गठित टीम में बदलाव होगा या फिर पुरानी टीम के साथ ही नवीन आगे बढ़ेंगे। आगे लगातार चुनाव हैं, किन रणनीतियों पर करेंगे काम, इसका अंदाजा कुछ समय बाद लग जाएगा।
डॉ. रमेश ठाकुर