-सुनील कुमार महला
आज का समय तकनीक का समय है, या यूँ कहें कि हम तकनीक के युग में सांस ले रहे हैं। यह तकनीक ही है, जो मनुष्य के जीवन को अधिक सुविधाजनक बना रही है, लेकिन इसके साथ-साथ हमारी सोच, कार्यशैली और आदतें भी आज बदल रही है। कहना ग़लत नहीं होगा कि वर्तमान दौर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) इस परिवर्तन का सबसे प्रमुख उदाहरण बनकर उभरी है। तेजी से बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच दुनिया भर में आधुनिक तकनीकों के विकास और नवाचार पर विशेष जोर बढ़ा है। आज दुनिया के विभिन्न देश अपनी नीतियों में नई-नई तकनीकों व नवाचारों को शामिल कर अपने देश की विभिन्न पारंपरिक कार्यप्रणालियों को लगातार बदल रहे हैं। विशेष रूप से एआई ने वैश्विक स्तर पर कार्य प्रणाली और मानव भूमिका को गहराई से प्रभावित किया है, इसलिए आज इसे विकास के लिए अनिवार्य और बहुत ही अहम् माना जा रहा है। इसी संदर्भ में, नई दिल्ली में एक महत्वपूर्ण एआई शिखर सम्मेलन(इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026; 16 फरवरी से 20 फरवरी 2026 तक) आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एआई की संभावनाओं, इसकी चुनौतियों, रोजगार पर इसका प्रभाव और आम जीवन में इसके उपयोग को लेकर जागरूकता बढ़ाना है। कहना ग़लत नहीं होगा कि आज एआई का दायरा स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा, कारोबार और रक्षा जैसे क्षेत्रों तक फैल चुका है, जिससे नए अवसर पैदा हुए हैं, लेकिन यह भी कटु सत्य है कि रोजगार पर प्रभाव, जोखिम, डेटा सुरक्षा और पर्यावरणीय असर जैसी चिंताएँ भी इसके कारण सामने आई हैं। विशेष रूप से डेटा केंद्रों में ऊर्जा और पानी की बढ़ती खपत को लेकर प्रश्न उठ रहे हैं। इसलिए एआई आधारित विकास को सफल बनाने के लिए इसके लाभों के साथ-साथ संभावित खतरों के समाधान पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है।
बहरहाल, यहां पाठकों को बताता चलूं कि नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 20 फरवरी 2026 तक इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 के आयोजन का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया। यह पाँच दिवसीय कार्यक्रम ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला प्रमुख एआई शिखर सम्मेलन माना जा रहा है, जिसमें 300 से अधिक प्रदर्शक भाग ले रहे हैं और एआई नीति तथा नवाचार पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया है। गौरतलब है कि यह समिट भारत मंडपम सहित नई दिल्ली के विभिन्न स्थलों पर आयोजित हो रही है तथा इसमें 100 से अधिक देशों की भागीदारी है, साथ ही शीर्ष तकनीकी कंपनियों जैसे गूगल और माइक्रोसॉफ्ट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी(सीईओ), शोधकर्ता, नीति-निर्माता और कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष शामिल हो रहे हैं। यह भी उल्लेखनीय है कि कार्यक्रम के दौरान 500 से अधिक सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जबकि 800 से अधिक प्रदर्शक, स्टार्टअप, शोध संस्थान और राष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडल इसमें भाग ले रहे हैं।
16-20 फरवरी तक आयोजित यह एआई शिखर सम्मेलन भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआइ) के क्षेत्र में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है, जबकि उससे आगे केवल संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन हैं। स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय के ग्लोबल एआई वाइब्रेंसी टूल के अनुसार भारत का स्कोर 21.59 है, जबकि अमेरिका का 78.6 और चीन का 36.95 है। इस सूचकांक में भारत कई विकसित देशों जैसे दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन, सिंगापुर, जापान, कनाडा, जर्मनी और फ्रांस से आगे है। भारत वर्तमान में चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होने के साथ-साथ एआई के क्षेत्र में अग्रणी विकासशील देश भी बन चुका है। इसलिए इस स्तर का वैश्विक आयोजन पहली बार किसी विकासशील देश में होना ऐतिहासिक माना जा रहा है। सम्मेलन में 13 देशों के लगभग 300 पवेलियन वाले एक्सपो का आयोजन भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता को भी प्रदर्शित करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के माध्यम से आम लोगों तक तकनीक के लाभ पहुँचाने, सस्ती तकनीक उपलब्ध कराने और वैश्विक असमानताओं को कम करने में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, बशर्ते देश निवेश बढ़ाए, प्रतिभाओं को बनाए रखे और अनुकूल तकनीकी पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करे।
वास्तव में, यह समागम विश्व के सबसे बड़े एआई आयोजनों में से एक माना जा रहा है और ग्लोबल साउथ में आयोजित पहली बड़ी एआई शिखर बैठक के रूप में देखा जा रहा है, जिससे भारत सहित विभिन्न विकासशील देशों की भूमिका मजबूत होगी। सम्मेलन में एआई आधारित नवाचार, प्रतियोगिताएँ, हैकाथॉन तथा करोड़ों रुपये के पुरस्कार वाले कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इससे विभिन्न देशों को उद्योग और निवेश के अवसर मिल रहे हैं, साथ ही एआई के वास्तविक उपयोग (एप्लीकेशन), स्टार्टअप सहयोग और व्यापारिक साझेदारी पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
यदि हम यहां पर इस समिट के प्रमुख उद्देश्यों की बात करें तो, इनमें क्रमशः समावेशी और जिम्मेदार एआई विकास (एआई सभी के लिए और अच्छे के लिए), वैश्विक सहयोग को बढ़ावा देना, विकसित और विकासशील देशों के बीच तकनीकी अंतर को कम करना, सामाजिक-आर्थिक विकास को गति देना (स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, उद्योग और पर्यावरण में सुधार), सुरक्षित, विश्वसनीय और नैतिक एआई के लिए अंतरराष्ट्रीय नीति संवाद को आगे बढ़ाना तथा भारत को वैश्विक एआई केंद्र के रूप में स्थापित करना शामिल है।
हालाँकि, एआई के बढ़ते प्रभाव के बीच एक महत्वपूर्ण मानवीय प्रश्न भी सामने आता है। आज एआई के कारण लिखना तेज और आसान हो गया है, लेकिन इससे वास्तविक रचनात्मकता का अर्थ कुछ हद तक धुंधला पड़ने लगा है। अब लोग केवल लेख की गुणवत्ता नहीं देखते, बल्कि यह भी सोचते हैं कि उसे इंसान ने लिखा है या मशीन ने। यह सच है कि एआई द्वारा तैयार सामग्री अक्सर संतुलित और प्रभावी होती है, लेकिन उसमें वह जीवंतता नहीं होती जो किसी इंसान के अनुभव, संघर्ष और भावनाओं से आती है। एआई प्रेम, पीड़ा या संवेदनाओं की भाषा तो लिख सकती है, पर उसने स्वयं कुछ महसूस नहीं किया होता। इसलिए जब ऐसी रचना किसी व्यक्ति के नाम से प्रस्तुत की जाती है, तो यह बौद्धिक नकल जैसी स्थिति भी पैदा कर सकती है। हमें यह समझना होगा कि वास्तविक सृजन केवल परिणाम नहीं, बल्कि सोचने, गलती करने, सीखने और संघर्ष करने की प्रक्रिया भी है, जिसे एआई छोटा कर देती है।
फिर भी; एआई कोई दुश्मन नहीं है। यदि इसे एक ईमानदार औजार की तरह जैसे जानकारी खोजने, विश्लेषण करने या भाषा सुधारने के लिए आदि के लिए उपयोग किया जाए, तो यह अत्यंत उपयोगी सिद्ध हो सकती है। समस्या तब उत्पन्न होती है जब हम इसके माध्यम से किए गए कार्य का पूरा श्रेय स्वयं लेने लगते हैं। इसलिए यह कहना उचित होगा कि एआई सुविधा अवश्य प्रदान करती है, लेकिन वास्तविक रचनात्मकता आज भी मनुष्य के अनुभव, संघर्ष और ईमानदारी से ही जन्म लेती है।
सुनील कुमार महला