सहारनपुर के मौलाना अब्दुल लतीफ़ ने बद्रीनाथ धाम पर ठोका मुस्लिमों का दावा

जैसे-जैसे उत्तर प्रदेश चुनाव निकट आ रहे हैं, वोट ध्रुवीकरण की सियासत भी तेज होनी शुरू हो गयी है। पहले उत्तर प्रदेश समेत समस्त भारत को रामजन्मभूमि को विवादित बनाकर साम्प्रदायिकता की आग में झोंक रखा था, उसी तर्ज पर पर बद्रीनाथ को विवादित बनाकर देश को साम्प्रदायिकता की आग में झोंकने का प्रयास किया जा रहा है।ज्ञात हो, यूपीए के कार्यकाल में कश्मीर में शंकराचार्य हिल्स को भी सुलेमान हिल्स बनाने का काम किया गया था, पुरातन विभाग द्वारा भी सुलेमान का पत्थर लगा दिया गया था, लेकिन भाजपा के घोर विरोध के बाद पत्थर हटाकर शंकराचार्य हिल्स का पत्थर दुबारा लगाया गया था।उत्तर प्रदेश स्थित सहारनपुर के एक मौलाना का वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें वो एक पवित्र हिन्दू तीर्थ स्थल पर मुस्लिमों का दावा ठोकता हुआ दिख रहा है। देवबंदी मौलाना अब्दुल लतीफ़ के इस वायरल वीडियो में वो कहता दिख रहा है कि बद्रीनाथ धाम हिन्दुओं का नहीं तीर्थ स्थल, मुस्लिमों का है। सोशल मीडिया पर इस वीडियो के सामने आने के बाद लोगों ने यूपी पुलिस से उसकी गिरफ़्तारी की माँग की है। 

इस वीडियो में मौलाना अब्दुल लतीफ़ कहता है, “असली बात तो ये हैं कि वो बद्रीनाथ नहीं, बदरुद्दीन शाह हैं। ये मुस्लिमों का धार्मिक स्थल है, इसीलिए इसे मुस्लिमों के हवाले कर दिया जाना चाहिए। ये बद्रीनाथ नहीं हैं। नाथ लगा देने से वो हिन्दू हो गए क्या? वो बदरुद्दीन शाह हैं। तारीख़ उठा कर देखिए। इतिहास का अध्ययन कीजिए, फिर बकवास कीजिए। मुस्लिमों को उनका धार्मिक स्थल चाहिए।”

इतना ही नहीं, उक्त मौलाना इस वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से भी माँग करता है कि मुस्लिमों को बद्रीनाथ धाम सौंप दिया जाए। साथ ही उसने मंदिर प्रबंधन से भी मंदिर को खाली करने के लिए कहा। अंत में धमकाते हुए वो कहता है, “अगर मुस्लिमों को उनका धार्मिक स्थल नहीं मिला तो हम बद्रीनाथ धाम की तरफ मार्च करेंगे। मुस्लिम वहाँ मार्च कर के बद्रीनाथ धाम पर कब्ज़ा करेंगे।”

लोगों ने उसके इस बयान पर आक्रोश जताया। ‘ज़ी मीडिया’ के पत्रकार तेजपाल रावत ने कहा, “अभी तो ये लोग देवभूमि में ही बसे हैं। अब इन लोगों का कहना यह भी है कि बद्रीनाथ हमारा है। ईद के दिन इन लोगों ने बद्रीनाथ पर जाकर नमाज अदा की। आगे आप लोग जागे नहीं तो क्या-क्या हो सकता है!” इस वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने उत्तराखंड में भू-कानून की माँग की। हालाँकि, ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं करता कि ये वीडियो कब का है। ये पुराना भी हो सकता है, जो अब वायरल हो रहा हो।

सुप्रीम कोर्ट में गोवा के स्टैंडिंग काउंसल प्रशांत पटेल उमराव ने कहा कि मौलाना अब्दुल लतीफ़ का वक्तव्य प्रदेश की कानून व्यवस्था के लिए खतरा पैदा कर सकता है, इसीलिए इसकी शीघ्र गिरफ्तारी हो। उन्होंने सोशल मीडिया पर सहारनपुर पुलिस और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर के उसकी गिरफ़्तारी की माँग की। लोगों ने उसके बयान को हिन्दुओं को ठेस पहुँचाने वाला और सामाजिक एकता भंग करने वाला बताया।

नवंबर 2017 में भी मौलाना अब्दुल लतीफ़ का बद्रीनाथ धाम को लेकर इसी तरह का बयान वायरल हुआ था। वो सहारनपुर के मदरसा दारुल उलूम निश्वाह का मौलाना है। तब उसने पीएम मोदी को पत्र लिख कर इस बारे में माँग की थी। तब बद्रीनाथ के पुजारियों ने उसे पागल करार दिया था। योग गुरु बाबा रामदेव ने तब इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि बद्रीनाथ धाम की स्थापना इस्लाम के जन्म से भी सैकड़ों वर्ष पूर्व हुई थी।

कुछ ही दिनों पहले हिंदुओं के पवित्र तीर्थ स्थल बद्रीनाथ धाम में 15 मुस्लिम श्रमिकों द्वारा ईद की नमाज अदा किए जाने के मुद्दे ने अब जोर पकड़ लिया था। कार्रवाई की माँग करते हुए हिन्दू संगठनों ने उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज को ज्ञापन दिया है, जिस पर उन्होंने चमोली के पुलिस अधीक्षक को जाँच के आदेश दिए थे। आरोप है कि वहाँ चल रहे निर्माण कार्य में संलग्न श्रमिकों में से कुछ मुस्लिम समुदाय के लोगों ने नमाज पढ़ी थी।

उत्तराखंड में स्थित बद्रीनाथ मंदिर मुख्यतः भगवान विष्णु को समर्पित है। संतों द्वारा वर्णित भगवान विष्णु के पवित्र 108 धामों में इसका नाम आता है। साथ ही ये जगद्गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापित चार मठों में से भी एक है। ये सिर्फ अप्रैल से नवंबर तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है क्योंकि बाकी महीनों में काफी ठंड पड़ती है। दिलचस्प बात ये है कि इसके मुख्य पुजारी दक्षिण भारतीय राज्य केरल से चुने जाते है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

* Copy This Password *

* Type Or Paste Password Here *

17,136 Spam Comments Blocked so far by Spam Free Wordpress