लेख सार्थक पहल

निमाड़ का नर्मदालय शिक्षा और स्वावलंबन का मंदिर

नासिक से निमाड़ में आकर भारती ठाकुर दीदी ने जनजातीय बच्चों के लिए समर्पित किया है जीवन

मन समर्पित तन समर्पित और ये जीवन समर्पित। चाहता हूं देश की धरती तुझे कुछ और भी दूं। कवि रामावतार त्यागी की ये पंक्तियां नासिक की भारती ठाकुर दीदी के व्यक्तित्व को चरितार्थ करती हैं। वे नर्मदा परिक्रमा करती हुई निमाड़ पहुंची थीं और फिर मां नर्मदा से मिली आत्मप्रेरणा के बाद यहीं की होकर रह गयीं। पिछले बीस सालों  में उन्होंने परोपकार शब्द को पल पल जिया है और भील भिलाला आदिवासी  बच्चों की शिक्षा दीक्षा और स्वरोजगार के लिए मप्र के खरगोन जिले में लेपा गांव की धरती पर नर्मदालय जैसा प्रेरक संस्थान खड़ा कर दिया है। 

यह यात्रा संकल्प, समर्पण और उच्च परोपकारी चेतना की सफलता की है।  उन्होंने  2005 में नर्मदा परिक्रमा की थी और तब उनका नर्मदा परिक्रमा मार्ग में ही प्रेरणा जगी थी कि वे सेवानिवृत्त होकर जनजातीय बच्चों की शिक्षा के लिए अपना बाकी जीवन समर्पित करेंगी। अपनी एकमात्र पेंशन के भरोसे वे मंडलेश्वर में अपने नर्मदा परिक्रमा में मिले परिचितों के बीच पहुंची और उसके बाद जो उन्होंने पिछले दो दशक में किया वो खरगोन कसरावद क्षेत्र का गौरव बन गया है। यहां उन्होंने गांव गांव पैदल पैदल चलते हुए छोटे छोटे समूहों में बच्चों को पढ़ाने की जो मशाल जलाई उसके बाद तो लोग जुड़ते गए और प्रकल्प खड़ा होता गया। कसरावद का लेपा गांव में नर्मदालय शिक्षा, स्वरोजगार और स्वाबलंबन का तीर्थ है। यहां राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा तिथि को अयोध्या जैसा ही राममंदिर तीर्थ साकार हुआ था एवं बीते माह ही रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानंद और मां शारदा की भव्य प्रतिमाओं का श्रीरामकृष्ण विश्व सद्भावना निकेतन में लोकर्पण हुआ है। नासिक की भारती दीदी के नर्मदालय की कहानी पर मराठी भाषी लेखिका शुभदा मराठे ने एक विचारोत्तेजक अनुभूतियों पर कहानी नर्मदालय की नाम से पुस्तक लिखी है। इस पुस्तक को पढ़कर आप जानेंगे कि किस प्रकार भारती ठाकुर दीदी निमाड़ की धरा पर नर्मदा किनारे जंगल में रहने वाले बच्चों के बीच पहुंची। उनके बीच कुप्रथाओं, परिवारों में व्यसनों का सामना किया, लोगां का विरोध भी देखा मगर स्कूल में कभी कभी जाने वाले बच्चों को असल शिक्षा की राह दिखाई साथ ही पूरे महेश्वर, मंडलेश्वर, खरगोन कसरावद क्षेत्र को जनजातीय शिक्षा का आदर्श केन्द्र स्थापित किया। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने सटीक लिखा है कि महाराष्ट्र के नासिक में सरकारी नौकरी करने वाली एक महिला एक नवीन अनुभव लेने की इच्छा से सहेली के साथ नर्मदा परिक्रमा पर निकलती है और परिक्रमा पूरी करते ही वह मां नर्मदा की बेटी हो जाती है। नर्मदा की बेटी बनकर भारती ठाकुर दीदी ने  भूख, गरीबी, अशिक्षा  और अज्ञानता के दलदल में फंसे जनजातीय बचपन को सुसंस्कारित और शिक्षित किया है व उन्हें निमाड़ के गांव गांव की स्थानीय आवश्यकता अनुसार स्वावलंबी और आत्मनिर्भर बना रही हैं। लेपा गांव का नर्मदालय भारती दीदी की अंर्तचेतना को दिशा देने वाली सखी मां नर्मदा ने ही साकार कराया है। अब दीदी प्रवाजिका विशुद्धानंदा के नाम से हम सबकी मार्गदर्शक एवं परोपकारी जीवन जीना सिखाने वाली प्रेरणा हैं। श्

जनजातीय बच्चों को शिक्षा एवं स्वावलंबन का मंच

नर्मदालय में गरीब जनजातीय परिवारों के 250 से अधिक बच्चों के लिए आवासीय शिक्षा दी जा रही है। बच्चों को पढ़ाने के साथ ग्रामीण जीवन की आवश्यकता अनुसार हुनरमंद बनाया जा रहा है। यहां जन सहयोग से कई लैब स्थापित की गई हैं। जहां बच्चे पढ़ाई के साथ फर्नीचर, लकड़ी और फायबर पर नक्काशी, कृषि यंत्रों का सुधार व चालन  सहित कई तरह के कौशल सीख रहे हैं।

विवेक कुमार पाठक