राजनीति

अपनों के निशाने पर राहुल गांधी

राजेश कुमार पासी

ऐसा लगता है कि धीरे-धीरे कांग्रेस के नेताओं का धैर्य जवाब दे रहा है। इसकी वजह यह हो सकती है कि कांग्रेसियों को धीरे-धीरे अहसास होने लगा है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सत्ता में आने वाली नहीं है। पूरा देश कांग्रेस के पतन को देख रहा है. ऐसा कैसे हो सकता है कि कांग्रेस के बड़े नेता इसे देख न रहे हों। गांधी परिवार के दो बड़े वफादार नेताओं ने राहुल की कांग्रेस पर सवाल खड़ा कर दिया है। मध्यप्रदेश के कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने कुछ समय पहले ‘संगठन की शक्ति’ के नाम पर एक बयान दिया था जिसका अप्रत्यक्ष रूप से निशाना राहुल गांधी ही थे । दिग्विजय सिंह ने भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी और प्रधानमंत्री मोदी की एक तस्वीर पोस्ट करके लिखा था कि चित्र बेहद प्रभावशाली है। उन्होंने लिखा था कि आरएसएस का जमीनी स्वयंसेवक और और जनसंघ-बीजेपी का कार्यकर्ता नेताओं के चरण में बैठकर प्रदेश का मुख्यमंत्री और देश का प्रधानमंत्री बना, ये संगठन की शक्ति है। इससे यह संदेश गया कि दिग्विजय सिंह भाजपा और मोदी जी की तारीफ कर रहे हैं।

जब इस बारे में पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि इसका क्या मतलब है, क्या वो कांग्रेस के संगठन में सुधार चाहते हैं। इसका जवाब देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा था कि वो आरएसएस और भाजपा के घोर विरोधी हैं, उन्होंने केवल संगठन की तारीफ की है। उनसे पूछा गया कि क्या वो कांग्रेस के संगठन में सुधार चाहते हैं। उनका कहना था कि इसमें सुधार की गुंजाइश है और हर संगठन में सुधार की गुंजाइश रहनी चाहिए । उन्होंने कहा था कि कांग्रेस मूल रूप में एक आंदोलन की पार्टी है लेकिन अब किसी आंदोलन को वोटों में तब्दील करने में हम कमजोर पड़ जाते हैं। कांग्रेस के नेताओं ने उनके बयान पर चुप्पी साध ली थी और कहा था कि दिग्विजय सिंह ने बैठक में संगठन में सुधार की कोई बात नहीं की है। 19 दिसम्बर को अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि उन्होंने राहुल गांधी से कहा है कि वो सामाजिक और आर्थिक मुद्दों के साथ-साथ कांग्रेस संगठन पर भी ध्यान दें। देखा जाए तो दिग्विजय सिंह ने यह बता दिया था कि वो कांग्रेस के वर्तमान संगठन से खुश नहीं हैं। 

             अब कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने राहुल गांधी और उनके कुछ नजदीकी नेताओं पर सीधा हमला कर दिया है। दिग्विजय सिंह ने सीधा हमला नहीं किया था लेकिन मणिशंकर अय्यर ने तो नाम लेकर हमला किया है। उन्होंने कहा है कि वो गांधीवादी, नेहरूवादी और राजीववादी हैं लेकिन राहुलवादी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी तो भूल गए हैं कि मैं भी पार्टी में हूँ। इसके अलावा उन्होंने जयराम रमेश, शशि थरूर, पवन खेड़ा और केसी वेणुगोपाल पर भी तंज कसा। कांग्रेस इस बार केरल में अपनी सरकार बनने की उम्मीद कर रही है लेकिन मणिशंकर अय्यर ने कहा कि कांग्रेस केरल में नहीं जीतेगी। सबसे बड़ी बात यह है कि उन्होंने यह बयान केरल में ही दिया है। उनका कहना है कि आगामी चुनाव के बाद भी विजयन मुख्यमंत्री पद पर बने रहेंगे। कांग्रेस ने उनके बयानों से किनारा कर लिया है। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा कि अय्यर का अब कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है, वो अपनी निजी हैसियत से बोल रहे थे। इससे चिढ़ कर अय्यर ने पवन खेड़ा को कठपुतली बता दिया। उन्होंने कहा कि खेड़ा दूसरों के इशारे पर बोलते हैं और उनके प्रति मेरे मन में कोई सम्मान नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रवक्ता पद पर ऐसी नियुक्ति पार्टी की मूर्खता को दर्शाती है. वो केवल जयराम के इशारों पर बोलते हैं। वह प्रवक्ता न होकर, तोता हैं। कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल पर हमला करते हुए उन्हें गुंडा करार दिया। अय्यर ने कहा कि आप कल्पना करें कि वेणुगोपाल ने वह पद संभाल रखा है, जो कभी सरदार पटेल के पास था। शशि थरूर के बारे में कहा कि वो मोदी सरकार में विदेश मंत्री का पद लेना चाहते हैं। उन्होंने शशि थरूर को सबसे बड़ा गैरसिद्धान्तवादी करियरवादी बताया और कहा कि वो नरेंद्र मोदी की कई बार प्रशंसा कर चुके हैं।

 उन्होंने ‘इंडिया’ गठबंधन को मजबूत करने के लिए तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को सबसे उपयुक्त व्यक्ति बताया । उन्होंने कहा कि स्टालिन नारेबाजी से दूर रहकर संघवाद और नीतिगत मुद्दों को उठाते हैं और राहुल गांधी के प्रधानमंत्री बनने की राह में बाधा नहीं बनेंगे। उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि स्टालिन ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘सूट-बूट की सरकार’ जैसे नारे भी नहीं देते। उन्होंने केरल कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस आगामी विधानसभा चुनाव में नहीं जीतेगी क्योंकि कांग्रेस नेता कम्युनिस्टों से जितनी नफरत करते हैं, उससे कहीं ज्यादा एक-दूसरे से नफरत करते हैं। 

             दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर कांग्रेस के बड़े नेता रहे हैं, हालांकि वो अब पहले की तरह सक्रिय नहीं हैं। वैसे भी इस समय कांग्रेस में राहुल गांधी और उनकी जुंडली के कुछ नेता ही सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने कांग्रेस संगठन पर आरोप लगाया था जिसका मतलब था कि कांग्रेस में भाजपा की तरह कार्यकर्ता मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री नहीं बन सकता। उनके द्वारा भाजपा और संघ के संगठन की तारीफ करना ही कांग्रेस के संगठन की कमी की ओर इशारा था। मणिशंकर अय्यर ने कोई इशारा नहीं किया है, सीधी बात की है। देखा जाए तो उन्होंने राहुल गांधी को अपना नेता मानने से मना कर दिया है। गांधी परिवार की भक्ति भी उन्होंने नहीं छोड़ी है, इसलिए कहा है कि राहुल गांधी प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

उन्होंने कहा है कि कांग्रेस को विचार करना चाहिए कि क्यों कांग्रेस के नेता पार्टी छोड़ रहे हैं। ये बात सभी जानते हैं कि राहुल गांधी से निराश होकर कांग्रेस छोड़ने वालों की गिनती करना मुश्किल है। जहां कुछ नेता राहुल गांधी के रवैये से परेशान होकर कांग्रेस को अलविदा बोल चुके हैं तो कुछ नेता कांग्रेस में अंधकारमय भविष्य को देखते हुए कांग्रेस से किनारा कर चुके हैं। राहुल गांधी के आसपास ऐसे नेताओं का जमघट है, जिनका जनता में कोई समर्थन नहीं है। देखा जाए तो राहुल गांधी की सलाहकार मंडली में सोशल मीडिया में दिखने वाले नेताओं का दबदबा है। ये नेता मीडिया में दिखाई देते हैं लेकिन जनता में इनकी पकड़ नहीं है, इसलिए इन्हें जनता के मुद्दों की भी समझ नहीं है। अय्यर ने राहुल गांधी के नारों का मजाक बनाकर बता दिया है कि राहुल गांधी के नारे हवा-हवाई हैं जिनका जनता में कोई असर नहीं है। देखा जाए तो राहुल गांधी हवा-हवाई मुद्दों को लेकर मोदी सरकार से भिड़े रहते हैं। राहुल गांधी को जनता के मुद्दों से कोई मतलब नहीं है. वो अपनी धुन में चले जा रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए कहा कि स्टालिन ‘वोट चोर, गद्दी छोड़’ और ‘सूट-बूट की सरकार’ जैसे नारे भी नहीं देते। इसका मतलब है कि ऐसे नारे देना उनकी नजर में मूर्खतापूर्ण हरकत है और राहुल गांधी यही कर रहे हैं। 

             मणिशंकर अय्यर ने वही कहा है जो आज हर कांग्रेसी के मन में है। यहां उस कांग्रेसी की बात नहीं की जा रही है, जो आंख बंद करके राहुल गांधी के पीछे चल रहा है। जिसे भी राजनीति की थोड़ी भी समझ है, वो जानता है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस विपरीत दिशा में जा रही है। धीरे-धीरे चलने वाला भी एक दिन अपनी मंजिल तक पहुँच जाता है लेकिन उल्टी दिशा में जाने वाला तो मंजिल से दूर ही जाता है। अय्यर ने खुद को गांधीवादी,नेहरूवादी और यहां तक की राजीववादी भी बता दिया, लेकिन राहुलवादी होने से इनकार कर दिया। उनके कहने का मतलब है कि वो आज भी कांग्रेस के सच्चे सिपाही हैं लेकिन आंख बंद करके राहुल गांधी के पीछे नहीं चल सकते।

             वास्तव में आज कांग्रेस का मतलब ही राहुल गांधी रह गया है। जो राहुल गांधी को पसंद नहीं है, उसकी कांग्रेस में कोई हैसियत नहीं है। देखा जाए तो जो लोग आज कांग्रेस को चला रहे हैं, वो राहुलवादी हैं। कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं की यही शिकायत रही है जिसके बारे में अय्यर बोल रहे हैं। पवन खेड़ा जैसे नेताओं के बारे में उनका कहना कि उनकी नियुक्ति करना पार्टी की मूर्खता है, दर्शाता है कि वो पार्टी में होने वाली नियुक्तियों से सहमत नहीं है। वो सिर्फ सहमत नहीं हैं बल्कि ऐसी नियुक्तियों को पार्टी की मूर्खता बता रहे हैं। उनके बयानों में उनकी निराशा और हताशा छुपी हुई है। ये एक कट्टर कांग्रेसी का दर्द है जो अय्यर के मुंह से बाहर निकला है। अय्यर किसी दूसरी पार्टी में जाने वाले नहीं हैं, उनका राजनीतिक जीवन समाप्ति की ओर है, इसलिए यह भी नहीं कहा जा सकता कि वो किसी लालच में ये बयान दे रहे हैं। जिस पार्टी ने पद और सम्मान दिया हो, उसको डूबते हुए देखना दर्दनाक होता है। दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर जैसे लोग इसी दर्द से गुजर रहे हैं। कितने ही ऐसे नेता पार्टी छोड़कर जा चुके हैं और कुछ जाने वाले हैं। वास्तव में राहुल गांधी को आईना दिखाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन जो व्यक्ति आंख बंद करके चल रहा हो, उसको कुछ भी दिखाया और समझाया नहीं जा सकता। आज मणिशंकर बोल रहे हैं, पहले दिग्विजय सिंह बोल रहे थे और कल कोई और बोलेगा लेकिन लगता नहीं है कि राहुल गांधी पर कोई असर होगा । 

राजेश कुमार पासी