विकास के अनंत अवरोधक

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– डॉ. मनोज चतुर्वेदी गांव की चौपालों पर बैठा हुआ नौजवान, किसान, कुंभकार, ग्वाला हो या विश्वविद्यालयों में एम. फिल तथा पी-एच-डी. किया हुआ नौजवान हो। सबके मन में एक ही पीड़ा है कि भारतीय समाज को कैसे बदला जाए? इस पर लंबे-चौड़े शोध पत्र तैयार करते हैं। कुल मिलाकर सबका यही कहना होता है… Read more »