कला-संस्कृति मनोरंजन
पारंपरिक मेलों पर संकट: सुरक्षा और आजीविका के बीच संतुलन की तलाश
/ by जगराम गुर्जर
जगराम गुर्जर भारत के पारंपरिक मेले केवल मनोरंजन का साधन नहीं हैं. वे हमारे सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक जीवन का जीवंत हिस्सा हैं। गांव-गांव, शहर-शहर लगने वाले ये मेले सदियों से लोगों के मेल-मिलाप, लोक संस्कृति और आजीविका का आधार रहे हैं। यहां झूले लगाने वाले, खिलौने बेचने वाले, बर्तन, चूड़ी, हस्तशिल्प बेचने वाले दुकानदार, […]
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