व्यंग्य बाण : उफ, ये सादगी

Posted On by & filed under व्यंग्य

छात्र जीवन में मैंने ‘सादा जीवन उच्च विचार’ पर कई बार निबन्ध लिखा है। निबन्ध में यहां-वहां का मसाला, कई उद्धरण और उदाहरण डालकर चार पंक्ति की बात को चार पृष्ठ बनाने में मुझे महारथ प्राप्त थी। मेरे निबन्ध को इसीलिए सर्वाधिक अंक भी मिलते थे। वस्तुतः किसी भी बात के, बिना बात विस्तार को… Read more »