हुंकार

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हिमकर श्याम जब भी देनी चाही किसी ने आवाज वह हंसा- एक तीखी हंसी यूं देना चाहते हो तुम आवाज किसे ? यूं दे पाओगे कभी आवाज व्यवस्था को क्या ऐसी होती है आवाज बदलाव की यह नहीं है आवाज १२१ करोड़ आवाम की   देखना, एक दिन तमाम प्रयासों छटपटाहटों और आक्रोशों के बावजूद… Read more »