राम मंदिर से डिजिटल इंडिया तक का सफर।

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भाजपा को  हिंदुत्व की पार्टी और धर्म की राजनीति करने  वाली पार्टी कहने वाले जरा भाजपा की देश के विकास  के लिए किए गए कार्यों को भी अवलोकन कर लेना चाहिए।मोदी जी सँपेरों का देश कहे जाने वाले भारत को डिजिटल इंडिया और विज्ञान तथा तकनीक से 21वीं सदी का न्यू इंडिया बनाने में विगत 5 वर्षों से लगातार प्रयास कर रहे हैं।देश की गति को तेज करने के लिए बुलेट ट्रेन देश मे लाने की महत्वकांसी  प्रोजेक्ट को देश को सुलभ कराने में दिन रात चीन ,जापान के साथ संबन्ध बनाये हुए हैं।अव्यवस्थित और तितर बितर,शहरों,प्रदूषित और लँगड़े शहरों को स्मार्ट सिटी में तब्दील करने को दिन रात होम वर्क कर रहे हैं।और आज लोग प्रधानमंत्री मोदी जी को और भाजपा सरकार पर राम मंदिर निर्माण नहीं करने का आरोप लगा रहे हैं इसके पीछे लोगों की आस्था तो प्रकट होती जरूर है मगर देश को इस वक्त राम से ज्यादा काम की जरूरत है जो विगत 60 सत्तर वर्षों से  नहीं हुआ है।युवाओं की चिंता मोदी जी को है इसीलिए स्किल इंडिया और स्टार्टअप लेकर आये हैं।इससे भी बड़ी चिंता मोदी जी को देश के नागरिकों की स्वास्थ्य की चिंता थी इस चिंता के समाधान और देशवासियों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान परियोजना लेकर आये हैं जो विश्व की सबसे बड़ी योजना है। और देश को फिट रखने के लिए 29 अगस्त को “फिट इंडिया”मूवमेंट का आगाज किया गया है।

        देश को निर्मल बनाने के लिए स्वच्छ भारत और गंगा को स्वच्छ रखने के लिए  नमामि गंगे ऐतिहासिक परियोजना लेकर आये हैं।देश की माताओं,बहिनों के आखों से आँसूं पोछने के लिए उज्वला योजना लेकर आये हैं जिससे करोड़ों गरीब घरों को धुवां मुक्त कर एक बहुत बड़ा उपकार किया है।भले ही हमारा समाज आज तक पुत्र को ही अधिक महत्व देता आ रहा है  बेटियों को शिक्षा से वंचित तो किया ही जाता रहा है ,लेकिन उनको कोख में ही मार दिया जाता है।इस कलंक को देश से मिटाने के लिए सरकार बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ का संदेश लेकर बालिका शसक्तीकरण को अमली जामा पहनाने में लगे हैं।इतना ही नहीं भाजपा को दलित विरोधी होने का भी नाम दिया जाता है  मगर प्रधानमंत्री पद की सपथ लेते ही मोदी जी ने एलान कर दिया कि बाबा साहेब अंबेडकर का बनाया हुआ संविधान से ही मैं चाय वाला भी देश का प्रधानमंत्री बना हूँ।और लगातार हो रहे दलितों पर हमलों पर गहरी चिंता करते हुए मोदी जी ने कहा कि पत्थर ,लाठी मारनी ही है तो मुझे मारो मगर मेरे वंचित दलितों को मत मारो।मोदी जी को दलितों की चिंता थी उन पर हो रहे अत्याचारों के लिए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट कर एससी एसटी को संसद में अध्यादेश लाकर पुनः मूल रूप में प्रभावित कराया।

       आज चारों तरफ राम मंदिर निर्माण के लिए हिन्दू संघटन और शिवसेना जैसे राजनैतिक दल,साधु संत अयोध्या में राममंदिर निर्माण के लिए दबाव बना रहे हैं जबकि देश की  सर्वोच्च अदालत में इसकी सुनवाई चल रही है।साधु संतों को भी चुनाव के ठीक पहले ही राम लला की याद आती है।मगर राम की प्रासंगिकता सिर्फ मन्दिर बनाकर ही नहीं हो सकती राम तो भारत भूमि के कण कण और हर हिन्दू के दिलों में बसे हैं ।सिर्फ अयोध्या में ही राम मंदिर जरूरी होता तो प्रधानमंत्री पद सँभालते ही मोदी जी डिजिटल इंडिया की नींव नहीं रखते वरन राम मंदिर की नींव रखते।राम मंदिर से ही देश का काया पलट हो जाता तो प्रधानमंत्री  स्किल इंडिया, मेक इन इंडिया,की नींव नहीं रखते बल्कि राम मंदिर की ईंट रखते।राम मंदिर भाजपा और मोदी का मुख्य विजन होता तो 5 सालों में सरदार पटेल की गगन चुम्बी इमारत नहीं वरन, राम लला की झलक आज तक मिल गयी होती।राम मंदिर से ही देश के विकास की गति रप्तार पकड़ लेती तो मोदी जी बुलेट ट्रेन के लिए चीन और जापान के आगे हाथ नहीं फैलाते।राम मंदिर निर्माण से आतंकवाद खत्म हो जाता,कालाधन वापस आ जाता,नकली नोटों का धंधा खत्म हो जाता,और अर्थव्यवस्था पटरी पर आ जाती तो 8 नवंबर 2016 को नोटबन्दी नहीं होती बल्कि मन्दिर का शिलान्यास हो रहा होता।राम मंदिर निर्माण से देश की आर्थिक नीति बदल जाती ,पंचवर्षीय योजनाएं अपना शतप्रतिशत लक्ष्य हॉसिल कर रही होती तो प्रधानमंत्री योजना आयोग को नीति आयोग नहीं बनाते वो अयोध्या आयोग बनाकर भव्य राममंदिर बनाते।जब देश की सब नीतियां बिना रामलला की चल रही हैं  तो पुरुषोत्तम राम को जबरदस्ती हर पांच वर्ष बाद गाय,दलित,मुसलमानों की तरह राजनीति में वोट बैंक बनाना राम भक्ति नहीं सत्ता की चाहत के सिवा कुछ नहीं हो सकती! 

       मोदी जी ही नहीं अटल जी ने भी प्रधानमंत्री बनने के तुरंत बाद समझौता एक्सप्रेस के साथ पाकिस्तान की यात्रा की थी न कि अयोध्या की? देश को परमाणु शक्ति राष्ट्र बनाने के लिए अटल जी ने पोखरण में  परमाणु हथियारों का परीक्षण किया वो भी चाहते तो अयोध्या में मन्दिर निर्माण का परीक्षण कर सकते थे।वास्तव में सरकारों का काम किसी धर्म विशेष के लिए मन्दिर मस्जिद बनाना नही होता बल्कि संविधान के तहत ही कल्याणकारी राज्य की नींव रखनी होती है ।

सच्चे अर्थो में किसी महापुरुष को मानना है तो उसके आदर्शों पर चलना होता है ।बिना मन्दिर के भी राम आज इतने महत्वपूर्ण हैं तो अपने त्याग के बल पर अपनी मर्यादा के बल पर अपने स्वभाव,आचरण,और सत्य की राह के बल पर जिंदा है।मन्दिर बन जाने से न तो राम राज आ सकता है।मन्दिर न बनने से भी राम के प्रति आस्था कम होने वाली है।राम मंदिर के लिए युद्ध जैसी स्थिति पैदा करना राम भक्ति नहीं वरन राम के प्रति राजनीतिक बिजनेस जैसा प्रतीत होता है।राम मंदिर न होते हुए भी राम की जड़ें इस देश मे बहुत गहरी हैं।एक गाने के बोल हैं “प्यार को प्यार ही रहने दो कोई नाम न दो”अब ये कहना भी उचित होगा कि “राम को राम ही रहने दो कोई नाम न दो”

आई.पी. ह्यूमन

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