चारदीवारी के लिए वास्तु सिद्धांत

1. भूखण्ड के चारों ओर चारदीवारी बनवानी आवश्यक होती है। चारदीवारी में कम से कम दो गेट होने चाहिए। चारदीवारी में कभी भी एक गेट न बनवाएं। इससे परिवार में अनेक परेशानियां उत्पन्न हो सकती है।
2. किसी उद्योग, फैक्ट्री या दुकान में चारदीवारी ज्यादा ऊंची हो तो अशुभ सूचक हैं। इससे उद्योगपति का वंश आगे नहीं बढ़ता।
3. चारदीवारी के अंदर उत्तर एवं पूर्व दिशा की ओर दक्षिण एवं पश्चिम दिशा की अपेक्षा अधिक खाली स्थान छोड़ना चाहिए।
4. मकान की दीवार तथा चारदीवारी की दीवार में अंतर रखना आवश्यक है।
5. चारदीवारी की नैऋत्य कोण की दीवार सबसे ऊंची होने पर यश, मान-सम्मान, धन व सुख प्राप्त होता है। चारदीवारी की वायव्य कोण की दीवार सबसे ऊंची होने पर निरोग व सुख प्राप्त होता है।
6. चारदीवारी की पूर्व दिशा की ओर दीवार सबसे ऊंची नहीं होनी चाहिए। इससे परिवार के सदस्यों में कलह उत्पन्न होती है।7. चारदीवारी की आग्नेय कोण की दीवार सबसे ऊंची होने पर यश मिलता है।
8. चारदीवारी की उत्तरी दीवार सबसे ऊंची होने पर धन की हानि होती है। इससे परिवार की स्त्रियां रोगग्रस्त होती है तथा परिवार कर्ज में डूबा रहता है।
9. चारदीवारी की ईशान कोण की दीवार सबसे ऊंची होने पर समस्त कार्य बाधित होते हैं।


वास्तु एवं धार्मिक तस्वीर के लिए वास्तु सिद्धांत- वास्तुशास्त्र में धार्मिक तस्वीरों का अत्यंत महत्व दिया गया है। मकान में विभिन्न स्थानों पर प्रयोग किए जाने वाले धार्मिक तस्वीरों के लिए वास्तुशास्त्र में निम्न स्थान बताए गए हैं-
1. रामायण, महाभारत या किसी भी प्रकार के युद्ध वाली तस्वीर, इन्द्रजालिक तस्वीर, पत्थर या लकड़ी के बने राक्षसों की मूर्तियां तथा रोते हुए किसी मनुष्य की मूर्ति या तस्वीर को कमरे के किसी भी कमरे में लगाना अशुभ माना गया है।
2. बच्चों के पढ़ने के कमरे में सरस्वती जी, प्रेरणादायक महापुरुषों तथा गुरुजनों की तस्वीर लगवानी चाहिए। बच्चों के कमरे में फिल्मी स्टारों की तस्वीर नहीं होनी चाहिए। ऐसे किसी भी काल्पनिक व्यक्ति की तस्वीर बच्चों के कमरे में न लगाएं जिससे बच्चों के मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है।
3. परिवार के मुखिया को अपनी स्टडी टेबल पर ईशान कोण में अपने आराध्य देवी-देवता की तस्वीर लगानी चाहिए।
4. वास्तु सिद्धांत के अनुसार मकान के मुख्यद्वार पर धार्मिक या मांगलिक तस्वीर अवश्य लगानी चाहिए। इनके कारण बुरी आत्माएं और बुरी नजर आदि मकान में प्रवेश नहीं कर पाती है।
5. सूअर, सियार, सांप, गिद्ध, उल्लू, कबूतर, कौआ, बाज आदि पशु-पक्षियों की तस्वीर भी मकान में नहीं लगानी चाहिए।
6. अपने स्वर्गवासी पूर्वजों की तस्वीर दक्षिण या पश्चिम दिशा में लगानी चाहिए।
7. कमरे की दीवार पर धार्मिक तस्वीर लगाते समय यह अवश्य ध्यान रखें कि वे तस्वीरें एक-दूसरे के सामने न हों।
8. मकान में तस्वीर सौम्य एवं मनमोहक होनी चाहिए। इससे मन प्रसन्न रहता है। यह शांति का भी प्रतीक होता है।


वास्तुशास्त्र में रंग का महत्व- वास्तुशास्त्र में रंगों का विशेष महत्व बताया गया है। प्रकृति में अनेक रंग मौजूद है और इन सभी रंगों का अपना अलग प्रभाव एवं महत्व है। मकान का फर्श बनाते समय काले रंग के पत्थर का अधिक प्रयोग नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से इस मकान में रहने वालो पर राहु का बुरा प्रभाव बढ़ जाता है जिससे उसमें रहने वाले लोगों की चिंता एवं परेशानी बढ़ जाती है।
फर्श एवं दीवारों के लिए सफेद रंग का अधिक उपयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसका अधिक प्रयोग करने से परिवारिक जीवन अत्यधिक महत्वाकांक्षी हो जाएगा जो भविष्य में भोग-विलास के कारण परिवारिक सुख को समाप्त कर देता है। यदि शुक्र का प्रभाव अधिक एवं शक्तिशाली हो तो सफेद रंग का प्रयोग करना शुभ होता है लेकिन शुक्र कमजोर हो तो सफेद रंग का प्रयोग करना अशुभ होता है। यदि शुक्र उच्च, शक्तिशाली एवं केंद्र या त्रिकोण में हो या मित्रक्षेत्री हो तो मकान की साज-सज्जा में निर्मलता व पीले व शुभ्र रंग का प्रयोग करना उचित होता है। यदि गुरु का प्रभाव निम्न हो, शत्रुक्षेत्री व कमजोर हो तो पीले व शुभ्र रंग का प्रयोग करने से परिवार में विरोध पैदा करता है जिससे परिवार के सदस्यों के आपस में नहीं बनती। गुरु-शुक्र का संबंध होने पर भी पीले व सफेद रंग का अधिक प्रयोग भी आपसी मतभेद को पैदा करता है।
प्रत्येक राशि एवं ग्रह का अपना एक रंग होता है जो व्यक्ति के लिए शुभ होता है। प्रत्येक रंग का अपना प्रभाव होता है। वास्तुशास्त्र के अनुसार मकान बनवाते समय छोटे-मोटे वास्तुदोष को दूर करने के लिए यदि हम मकान का रंग एवं उसकी आंतरिक कमरे की सजावट अपनी राशि के अनुकूल करवाएं तो वह दूर हो सकते हैं। इससे उस मकान में रहने वाले सभी लोग सुख एवं शांति का अनुभव करते हैं। राशि के अनुकूल मकान को रंग कराने से समृद्धि में बढ़ोतरी होती है।
विभिन्न रंग प्रभावमध्यम पीला मकान में मध्यम पीला रंग कराने से उस मकान में रहने वालों में अच्छें गुण आ जाते हैं।हल्का पीला यह रंग लोगों की बुद्धिमता का सूचक होता है। इस रंग से मकान रंगवाने से मस्तिष्क पर अच्छा प्रभाव पड़ता है।गहरा पीला यह रंग स्वस्थ जीवन का सूचक होता है। यह रंग शरीर में स्फूर्ति एवं ताजगी पैदा करने वाला होता है।तीव्र मध्यम पीला यह रंग मानव प्रेम का सूचक है।गहरा शुद्ध लाल यह रंग प्यार एवं मिलन का सूचक है।मध्यम लाल इस रंग का प्रयोग मकान में करने से स्वास्थ्य तथा जीवन्तता का पता चलता है।चमकदार लाल यह रंग चाह तथा लालसा को दर्शाता है।गहरा नारंगी यह रंग महत्वकांक्षी जीवन का प्रतीक होता है।मध्यम नारंगी यह रंग संघर्षशील एवं उत्साहित जीवन को दर्शाता है।हल्का नारंगी रंग यह रंग जीवन एवं मन की तीव्रता को बताता है।गहरा भूरा रंग इस रंग को उपयुक्तता का सूचक माना गया है।गाढ़ा गुलाबी रंग वास्तुशास्त्र में इस रंग को स्त्रीत्व एवं उत्सव का सूचक होता है।मध्यम गुलाबी रंग इस रंग को वास्तुशास्त्र में कोमलता एवं सरल स्वभाव का सूचक माना गया है।तीव्र हल्का सुनहरा यह रंग मोहकता का सूचक माना गया है।मध्यम सुनहरा वास्तुशास्त्र में इस रंग को सुख-संपन्नता का सूचक माना गया है।गाढ़ा मध्यम सुनहरा यह रंग वैभवशाली जीवन का प्रतीक है।तीव्र मध्यम नीला यह रंग आदर्शवाद का सूचक माना गया है।गहरा नीला रंग इस रंग को वास्तुशास्त्र में ईमानदारी एवं लगन का सूचक माना गया है।हल्का नीला रंग यह रंग शांतिप्रियता को दर्शाता है।हल्का मध्यम नीला रंग यह रंग दयालुता को दर्शाता है।मध्यम हरा रंग यह रंग खुलेपन एवं व्यवहारिकता को बताता है।गहरा हरा रंग इस रंग को भोलेपन का प्रतीक माना जाता है।हल्का बैंगनी रंग यह रंग कोमलता का सूचक होता है।गहरा बैंगनी रंग यह वैभवशालिता का सूचक है।

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