राजस्थान के चुनाव में कौन कहां कैसे किस पर कितना भारी ?

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◆पॉलिटिकल सर्वे में सबकी ताकत का आंकलन करेगी पॉलिटिकल सर्वे कंपनी

◆हर विधानसभा क्षेत्र में हर धर्म, समाज, जाति, वर्ण और वर्ग के लोगों का मूड मापने निकलेगी सर्वे टीम

◆बीजेपी व कांग्रेस सहित पांच छोटी पार्टियां भी मैदान में 

जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान में विधानसभा चुनाव नवंबर के अंत में हैं। इस चुनाव में बीजेपी और कांग्रेस में सीधी जंग है। यह जंग किस विधानसभा सीट पर कैसी होगी, लोग किसके साथ है, किस पार्टी का कितना जोर है, और किसका केवल शोर है, किस पॉलिटिकल खेमे में किस – किस के बीच आपसी जंग है और उस जंग में कौन किससे कितना कमजोर है, यह जानकारी जुटाने के लिए इलेक्शन स्ट्रेटजी के क्षेत्र की प्रमुख कंपनी प्राइम टाइम इन्फोमीडिया प्राइवेट लिमिटेड अगले सप्ताह से राजस्थान का पॉलिटिकल तापमान मापने निकल रही है। यह कंपनी गुजरात और महाराष्ट्र में चुनावी सर्वे और ग्राउंड रियलिटी जुटाने का काम पहले भी कर चुकी है।  जाने माने राजनीतिक विश्लेषक निरंजन परिहार की कंपनी ‘प्राइम टाइम’ का गुजरात विधानसभा के पिछले दो चुनावों का सामाजिक समीकरणों पर आधारित तथ्यात्मक आंकलन काफी सटीक रहा।

विधानसभा चुनाव के लिहाज से ग्राउंड रियलिटी जुटाने के लिए प्रदेश की सभी 200 सीटों पर ‘प्राइम टाइम’ यह सर्वे कर रही है, और यह काम 30 अगस्त तक पूरा कर लिया जाएगा। प्रदेश में हर धर्म, समाज, जाति, वर्ण और वर्ग के लोगों से व्य़क्तिगत बातचीत के आधार पर विश्लेषण तय होगा, जिसके लिए हर विधानसभा क्षेत्र में 10-10 लोग काम करेंगे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह सर्वे टीम, किस पार्टी के किस राजनीतिक कार्यकर्ता की किस वर्ग में कितनी पैठ है और किस वर्ग से किस नेता को समर्थन मिलना संभव है या नहीं, और मिलेगा तो भी कितना मिलेगा, इस बारे में वास्तविक तथ्यात्मक जानकारी जुटाएगी । ‘प्राइम टाइम’ का यह सर्वे किस पार्टी के लिए है, यह जानकारी देने से इंकार करते हुए परिहार कहते हैं कि यह एक व्यावसायिक जानकारी है, जिसे जाहिर करना नीतिगत रूप से उचित नहीं है। उल्लेखनीय है कि कांग्रेस व बीजेपी दोनों दलों में कई दिग्गज नेताओं से परिहार के काफी विश्वसनीय रिश्ते हैं। सन 2013-14 में नरेंद्र मोदी के  प्रधानमंत्री बनने के महाअभियान के लिए प्रशांत किशोर की संकल्पना को ग्राउंड पर लागू करने में परिहार प्रमुख भूमिका में रहे हैं तो राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के भी वे बेहद करीबी माने जाते हैं।  इसी कारण यह कयास मुश्किल है कि वे किस पार्टी के लिए काम करने जा रहे हैं।

‘प्राइम टाइम’ का यह सर्वे उम्मीदवारी और हार जीत के साथ साथ ग्राउंड रियलिटी के आधार पर पॉलिटिकल पार्टी को अपने समीकरण स्थापित करने और कार्यकर्ताओं को कहां काम सौपना है, यह तय करने का रास्ता आसान करने में मददगार साबित होगा। परिहार कहते हैं कि उनका यह सर्वे ऐसा होगा, जो ग्राउंड रियलिटी की सामान्य राजनीतिक समझ से ऊपर होगा, तथा उनकी रिपोर्ट पर अमल किया जाना ही जीत सुनिश्चित करेगा।  

उल्लेखनीय है कि राजस्थान में बीजेपी और कांग्रेस के अलावा भी पांच छोटी पार्टियां मैदान में दिख रही हैं। बीजेपी में नरेंद्र मोदी के चेहरे पर ही चुनाव होना है, तो कांग्रेस में अशोक गहलोत तय चेहरा है। अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी पिछले साल भर से मैदान में उतरी है, हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी भी पूरे दमखम से पहले से ही तैयार है। दक्षिणी राजस्थान के आदिवासी इलाके में भारतीय ट्राइबल पार्टी सक्रिय है, तो मायावती की बहुजन समाज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआएमआइएम) भी चुनाव मैदान में रहेगीं। इन सबकी उपस्थिति के बावजूद परिहार कहते हैं कि मैदान में असली खिलाड़ी तो प्रधानमंत्री मोदी और मुख्यमंत्री गहलोत ही होंगे, जिनके बीच मौजूदा हालात में सीधा मुकाबला कुछ सीटों के अंतर का भी संभव है। इसीलिए ग्राउंड रियलिटी जुटाने की जरूरत महसूस की जा रही है, ताकि कहां किसके लिए कितना क्या करना है, यह सीधे समझ में आ सके। वे कहते हैं कि कांग्रेस या बीजेपी कोई भी हो, राजनीतिक दलों का नेतृत्व इस तथ्य से अच्छी तरह वाकिफ है कि हर कार्यकर्ता का अपने इलाके में व्यक्तिगत वजूद होता है और वह उसी वजूद के लिए स्वयं को केंद्र में रखकर ही हर बात बताता है, अतः किसी भी नेता या कार्यकर्ता के फीडबैक पर उनकी अपनी ही पार्टी का नेतृत्व भरोसा कम ही करता है। वे जोर देकर कहते हैं कि इसी कारण व्यावसायिक कंपनियों के सर्वे की सत्यता और विश्वसनीयता ज्यादा प्रभावी और निष्पक्ष मानी जाती हैं। 

सामाजिक समीकरण और जातिगत आधार राजनीतिक दलों के जीत का गणित कैसे सुधारते – बिगाड़ते हैं, इसके उदाहरण के तौर पर परिहार बताते हैं कि मारवाड़ इलाके के पाली, जालोर और सिरोही जिलों की कुल 14 सीटों पर आज भले ही बीजेपी 11 और कांग्रेस केवल 1 सीट पर ही है। लेकिन वहां दोनों ही पार्टियों के कार्यकर्ताओं का फीडबैक काफी विरोधाभासी है। जबकि राजनीतिक, सामाजिक व जातिगत तौर पर नए समीकरण साधकर बीजेपी सभी सीटें जीत सकती है, तो कांग्रेस भी अपने हालात में चौंकानेवाले बदलाव ला सकती हैं।  राजस्थान की सभी 200 सीटों पर ‘प्राइम टाइम’ का ग्राउंड रियलिटी जुटाने का यह काम 30 अगस्त तक पूरा हो जाएगा। तब तक प्रदेश की  चुनावी तस्वीर भी आकार लेने लगेगी।

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