राजनीति

ईरान के लिए कांग्रेस इतनी दुखी क्यों है

राजेश कुमार पासी

जब से अमेरिका और इसराइल ने ईरान पर हमला किया है, तब से पूरी कांग्रेस गहरे दुःख में डूबी हुई है। कांग्रेस की प्रतिक्रिया से ऐसा लग रहा है कि जैसे देश पर ही हमला हो गया हो। मेरा तो मानना है कि अगर देश पर हमला हो जाये, तब भी कांग्रेस इतनी दुःखी नहीं हो सकती, जितनी ईरान पर हमले से दुःखी नजर आ रही है ।  कांग्रेस की प्रतिक्रिया से यह संदेश निकल रहा है कि भारत को ईरान के पक्ष में इजराइल और अमेरिका पर हमला कर देना चाहिए। सवाल यह है कि क्या ईरान भारत का इतना बड़ा दोस्त है कि उसके लिए अपनी बर्बादी को आमंत्रित करके देश को युद्ध की आग में झोंक दिया जाए। ईरान पर हमले के विरोध में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी ने एक लेख लिखा है, जो देश के  कुछ प्रमुख समाचार पत्रों द्वारा प्रकाशित किया गया है। इस लेख के माध्यम से केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया है कि वो ईरान के प्रति अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा रही है। सोनिया गांधी कई बार लेख लिख चुकी है और ज्यादातर इस्लामिक मुद्दों पर ही लिखे गए हैं। उन्होंने मोदी सरकार को गाजा की समस्या के लिए भी कई बार घेरा है। अजीब बात है कि उन्हें देश में कोई समस्या नजर नहीं आती, जिसके लिए वो लेख लिखें। जो कांग्रेस दिन-रात मोदी सरकार को कोसती रहती है, उसे देश में कोई समस्या नहीं दिखाई देती। विपक्ष का काम है कि वो सरकार का विरोध करे, लेकिन विरोध का मुद्दा तो कम से कम देशहित और लोकहित होना चाहिए।   भारत ने ईरानी नेता खामनेई की मौत पर शोक व्यक्त कर दिया है, लेकिन इससे कांग्रेस को कोई फर्क नहीं पड़ता है। वास्तव में कांग्रेस चाहती है कि भारत सरकार अमेरिका और इजराइल के हमले की खुलकर निंदा करे। भारत हमेशा युद्ध का विरोध करता रहा है और इस युद्ध को भी रोकने की मांग कर रहा है। कांग्रेस की मांग यह है कि प्रधानमंत्री मोदी खुद सामने आकर इजराइल और अमेरिका को ईरान पर हमले के लिए जिम्मेदार मानते हुए उनकी आलोचना करें। मोदी ऐसा करने वाले नहीं हैं, क्योंकि उन्हें ऐसा करने की जरूरत नहीं है। मोदी ने ईरान की भी आलोचना नहीं की है, क्योंकि भारत अभी तक इस युद्ध में तटस्थ बना हुआ है। 

               अगर मोदी अमेरिका और इजराइल की आलोचना करते हैं तो उससे देश को कोई फायदा नहीं होने वाला है और ईरान को भी कुछ मिलने वाला नहीं है। ईरान के सबसे बड़े सहयोगी चीन और रूस ने इस हमले के लिए इजराइल और अमेरिका की निंदा की है, लेकिन ईरान को कोई फायदा नहीं हुआ। ईरान भी बेमतलब अरब देशों पर हमले कर रहा है, लेकिन भारत ने इसका भी विरोध नहीं किया है। कांग्रेस इस मुद्दे पर चुप है, उसे यह भी बोलना चाहिए था कि ईरान अरब देशों पर गलत हमले कर रहा है । वास्तव में कांग्रेस को न तो ईरान की चिंता है और न ही अरब देशों से कोई मतलब है, उसे तो सिर्फ यह दिखाना है कि वो मुस्लिमों की सबसे बड़ी हितेषी है। कांग्रेस अपनी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति के लिए देश को युद्ध की आग में झोंकने को तैयार है। सवाल यह है कि जब इसी अमेरिका ने इराक को बर्बाद किया था तो कांग्रेस ने क्या किया था, तब तो देश में उसकी सरकार चल रही थी। सद्दाम हुसैन को फांसी दे दी गई तो क्यों नहीं कांग्रेस ने  उसके समर्थन में सेना उतार दी। लीबिया के नेता कर्नल गद्दाफी को मार दिया गया, तब कांग्रेस की सरकार ने क्या किया था। देखा जाए तो आज से नहीं, बल्कि कई दशकों से अमेरिका पूरी दुनिया में गुंडागर्दी कर रहा है । उसने कई देशों को बर्बाद कर दिया है। क्या भारत उसको रोकने में सक्षम है, इस सवाल का जवाब कांग्रेस को देना चाहिए। सोवियत संघ के विघटन के बाद दुनिया एकध्रुवीय बन चुकी है और अमेरिका ही एकमात्र विश्वशक्ति है। ईरान पर उसका हमला गलत हो सकता है, लेकिन इजराइल का हमला गलत नहीं है। दोनों ही देश एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं। ईरान पिछले कई सालों से इजराइल को बर्बाद करने के लिए कई आतंकवादी संगठनों को प्रश्रय दे रहा है। उसने इजराइल को बर्बाद करने के लिए ही हमास, हिज़्बुल्लाह और हूती जैसे खतरनाक आतंकवादी संगठन खड़े किए हैं। क्या कांग्रेस ने कभी मोदी सरकार पर दबाव बनाया कि वो इसके लिए ईरान की निंदा करे। ईरान के आतंकवादी संगठन सिर्फ इजराइल के लिए खतरा नहीं हैं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए खतरा हैं, लेकिन कांग्रेस को इससे कोई मतलब नहीं है। 

              अमेरिका ने श्रीलंका के पास एक ईरानी वॉरशिप को उड़ा दिया है, जो कि भारत में हुए एक युद्धाभ्यास से लौट रहा था।   कांग्रेस ईरानी वॉरशिप पर हमले के लिए भारत की जिम्मेदारी तय करने की कोशिश कर रही है। हमें उस शिप की जिम्मेदारी लेने की बात कही जा रही है, जो एक हफ्ते पहले ही हमारी समुद्री सीमा से बाहर निकल चुका था, वो श्रीलंका के नजदीक था और उसने उनसे मदद मांगी थी। नौसेना अभ्यास में 50 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया था, उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भारतीय नौसेना की नहीं थी। अंतरराष्ट्रीय सीमा में सब अपनी जिम्मेदारी पर चलते हैं, दूसरे देशों की तरह ईरान का वॉरशिप भी अपने देश वापिस गया था। वो श्रीलंका में क्या कर रहा था, इसका जवाब तो ईरान के पास होगा। कांग्रेस क्या चाहती है कि इस हमले का बदला लेने के लिए भारत अपनी नौसेना अमेरिकन नेवी के खिलाफ उतार दे। कांग्रेस चाहती क्या है, उसे स्पष्ट रूप से देश को बताना चाहिए। देश तो पता चलना चाहिए कि देश की विदेश नीति में क्या गलती है। जब दुनिया में कई जगहों पर युद्ध चल रहे हैं तो भारत शांति से आगे बढ़ रहा है, क्या यही विदेश नीति की गलती है। कांग्रेस मोदी सरकार को ऐसे उकसा रही है कि वो ईरान के पक्ष में अमेरिका और इजराइल पर हमला कर दे।  भारत की  विदेश नीति यही है कि भारत किसी युद्ध में न उलझे और चुपचाप विकास की राह पर चलता रहे, ये नीति चीन की भी है ।  हम पाकिस्तान के साथ युद्ध में नहीं फंसे, जैसे ही हमने अपने उद्देश्य पूरे किए, युद्ध से बाहर निकल आये। पाकिस्तान हार चुका था, हम उसे और बर्बाद कर सकते थे, लेकिन हमारा उद्देश्य यह नहीं था। हमने उसे सबक सिखाया और युद्ध खत्म कर दिया। इसके लिए भी मोदी सरकार पर निशाना साधा गया कि अमेरिका के दबाव में युद्ध विराम किया गया है। सच तो यह है कि अमेरिका और चीन चाहते हैं कि भारत रूस की तरह एक लंबे युद्ध में फंस जाए। भारत की विदेश नीति की यह बड़ी सफलता है कि वो इस समय युद्ध क्षेत्र में किसी के पक्ष में नहीं खड़ा है। 

              जहां तक ईरानी वॉरशिप पर हमले की बात है, तो युद्ध के समय नियम कौन मानता है, अगर युद्ध क्षेत्र से बाहर अमेरिका ने एक युद्धपोत को निशाना बनाया है तो ईरान दूतावासों को निशाना बना रहा है । अंतरराष्ट्रीय नियम कहते हैं कि दूतावासों पर हमला नहीं किया जाएगा, लेकिन ईरान चुन-चुन कर दूतावासों पर हमले कर रहा है। डोनाल्ड ट्रंप के एक मंत्री ने बयान दिया है कि अमेरिका ने भारत को रूस से 30 दिन तक तेल खरीदने की अनुमति दी है। इस बयान पर विपक्ष हमलावर हो गया है कि भारत अमेरिका से पूछकर सारे काम कर रहा है। सवाल यह है कि अमेरिका नहीं कहेगा तो क्या भारत रूस से तेल नहीं खरीदेगा । दूसरी बात है कि रूस ने अमेरिका से पहले ही बयान दे दिया था कि वो भारत को तेल की कमी नहीं होने देगा। अमेरिका की सरकार तो अपने देश में अपनी इज्जत बचा रही है कि हमने कहा तो भारत रूस से तेल खरीद रहा है। डोनाल्ड ट्रंप क्या बोलते हैं, उन्हें भी पता नहीं होता, ऐसा ही हाल उनके मंत्रियों का भी है। रोज अपना बयान बदल देते हैं, ईरान युद्ध में उनके बयानों पर उनकी जमकर छीछालेदर हो रही है, लेकिन भारतीय विपक्ष के लिए उनका बयान सत्यवचन हैं। जो आदमी अपने घर में ही मजाक का पात्र बन गया है, उसके बयानों को भारत का विपक्ष बहुत गंभीरता से लेता है। जब वो कहता है कि मोदी बहुत महान नेता हैं, तो उसे सुनाई नहीं देता। वास्तव में कांग्रेस मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति का खेल खेल रही है। अपने आपको मुस्लिमों का एकमात्र हमदर्द साबित करने के खेल में कांग्रेस विपक्ष से आगे निकलना चाहती है। वास्तव में कांग्रेस भाजपा के खिलाफ नहीं, बल्कि अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ मुहिम चला रही है। ईरान के मुद्दे पर वो मोदी सरकार पर इसलिए जबरदस्त तरीके से हमलावर है, कि देश के मुस्लिम समाज को संदेश दिया जा सके कि उनके धार्मिक मुद्दों की वही रक्षक है। पूरी तरह से मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति पर चलते हुए कांग्रेस विपक्ष से वो मुस्लिम वोट बैंक वापस लेना चाहती है, जिस पर कभी उसका पूरा कब्जा था। कांग्रेस को अपनी राजनीति के लिए देश की विदेश नीति पर सवाल नहीं खड़े करने चाहिए। विदेश नीति पर राजनीति करना सही नहीं है, क्योंकि इससे पूरी दुनिया में गलत संदेश जाता है। कांग्रेस को समझना होगा कि उसकी ओछी राजनीति उसको ही बर्बाद कर रही है। भाजपा को उसकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति थोड़ा सा भी नुकसान नहीं पहुंचा सकती, बल्कि कुछ फायदा ही पहुंचा सकती है। विपक्षी दल उसकी राजनीति को समझ रहे हैं, इससे विपक्षी एकता को खतरा पैदा हो सकता है। 

राजेश कुमार पासी