रामस्वरूप रावतसरे
इज़राइल द्वारा 26 दिसंबर 2025 को सोमालीलैंड को एक स्वतंत्र देश के रूप में आधिकारिक मान्यता देने वाला पहला देश बन गया है। यह पहली बार है जब किसी देश ने सोमालीलैंड को उसकी 1991 की स्वतंत्रता घोषणा के बाद आधिकारिक रूप से मान्यता दी है। सोमालिया से 34 साल पहले इसने खुद को आजाद घोषित किया था। इजरायल का ये निर्णय न केवल अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र में कूटनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि इजराइल की विदेश नीति में भी एक बड़े बदलाव को यह दर्शाता है।
प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विदेश मंत्री गिदोन सा’आर के साथ मिलकर एक वीडियो कॉल के जरिए सोमालीलैंड के राष्ट्रपति अब्दिरहमान मोहम्मद अब्दुल्लाही के साथ एक जॉइंट डिक्लेरेशन पर साइन किए। नेतन्याहू ने इस घटनाक्रम को ‘ऐतिहासिक और निर्णायक’ बताते हुए कहा कि यह दोनों देशों के बीच औपचारिक द्विपक्षीय संबंधों की शुरुआत है। इस समझौते के तहत दोनों देशों में दूतावास खोले जाएँगे और राजदूत नियुक्त किए जाएँगे। इससे राजनयिक संबंध स्थापित होंगे। सोमालीलैंड की आबादी लगभग 6.2 मिलियन यानी 62 लाख है। भारत में हैदराबाद की आबादी करीब 67 लाख है यानी हैदराबाद से भी इस देश की जनसंख्या थोड़ी कम है।
इजराइल और सोमालीलैंड के बीच हुई फोन बातचीत में नेतन्याहू ने आर्थिक विकास, कृषि और सामाजिक क्षेत्रों में सहयोग का वादा किया। उन्होंने सोमालीलैंड के राष्ट्रपति को इज़राइल की आधिकारिक यात्रा के लिए आमंत्रित किया और संकेत दिया कि वे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ‘अब्राहम समझौते में’ सोमालीलैंड को शामिल करने का अनुरोध करेंगे।
सोमालीलैंड की सरकार ने इस मान्यता का स्वागत किया है और समझौते पर साइन होते ही देश में जश्न मनाया जाने लगा। हजारों लोग राजधानी हरगेसा के फ़्रीडम स्क्वायर में इकट्ठा हुए और सोमालीलैंड के झंडे लहराने लगे। इजराइल द्वारा आजाद देश के रूप में दी गई मान्यता का इन्होंने जमकर जश्न मनाया।
इज़राइल को औपचारिक मान्यता मिलने से अफ्रीका और मिडिल ईस्ट में भी भारी विरोध हुआ है। सऊदी अरब ने इस कदम की निंदा की। इसके अलावा अफ्रीकन यूनियन, सोमालिया, मिस्र, तुर्की, जिबूती और दूसरे देशों ने भी इजरायल के इस कदम की निंदा की है।
जानकारी के अनुसार सोमालीलैंड एक ब्रिटिश उपनिवेश था जिसने पहली बार 1960 में गृहयुद्ध के बाद आजादी की घोषणा की थी। उस समय इजराइल समेत 34 देशों ने उसे मान्यता दी थी हालाँकि बाद में वह स्वेच्छा से सोमालिया के साथ मिल गया। 1991 में सोमालिया की केंद्र सरकार के पतन के बाद सोमालीलैंड ने पुनः स्वतंत्रता की घोषणा की। तब से अब तक, सोमालीलैंड ने राजनीतिक स्थिरता, लोकतांत्रिक संस्थाएँ, स्वतंत्र मुद्रा और प्रशासनिक ढाँचा विकसित किया है लेकिन वैश्विक मान्यता उसे नहीं मिल सकी थी। कुछ देशों जैसे ब्रिटेन, इथियोपिया, तुर्की, यूएई, डेनमार्क, केन्या और ताइवान ने वहाँ संपर्क कार्यालय बनाए लेकिन आधिकारिक मान्यता नहीं दी। अभी तक यह हॉर्न ऑफ अफ्रीका में एक ‘स्वघोषित’ आजाद देश है। यह सोमालिया के उत्तर-पश्चिमी इलाके में है। इसकी सीमा उत्तर-पश्चिम में जिबूती, दक्षिण और पश्चिम में इथियोपिया और पूर्व में सोमालिया के बाकी हिस्सों से मिलती है।
लेकिन इस देश के पास जमीनी बॉर्डर नहीं है बल्कि अदन की खाड़ी में 850 किलोमीटर लंबी तटीय सीमा है जो लाल सागर को अरब सागर से जोड़ता है और दुनिया का सबसे व्यस्त वॉटरवे ट्रेड मार्ग है। यहाँ से दुनिया भर के बड़े व्यापार पर नजर रखी जा सकती है। इस क्षेत्र का सामरिक महत्व काफी है इसलिए यहाँ सदियों से लड़ाईयाँ होती रही हैं।
सोमालीलैंड में काफी स्थिर और कानूनी शासन है जहाँ पायरेसी और आतंकवाद के मामले कम हैं। इसकी अपनी पुलिस और मिलिट्री है और यह इलाके में अपनी जमीन बनाए रखता है। इसके विपरीत सोमालिया को यूएन से देश के तौर पर पहचान मिली है. वह अराजकता, सिविल वॉर, आतंकवाद और हिंसा से ग्रसित रहा है। अल शबाब इसके बड़े हिस्से पर कब्जा कर चुका है। यहाँ बड़े पैमाने पर अपराध, नरसंहार और पायरेसी आम है। इसकी इकॉनमी खत्म हो गई है और यह मदद पर जिंदा है। सोमालिया का एक ‘देश’ के तौर पर जो भी महत्व है, वह अफ्रीकन यूनियन और दूसरी क्षेत्रीय ताकतों से मिली मान्यता की वजह से है।
हकीकत यह है कि सोमालीलैंड एक ‘देश’ है जहाँ डेमोक्रेसी, काम करने वाली सरकार और तुलनात्मक रूप से स्थिरता है। इसकी एक डेवलपिंग इकॉनमी भी है लेकिन अभी तक यूएन ने इसे ‘देश’ के तौर पर मान्यता नहीं दी है। सोमालिया में ऐसा कुछ नहीं है लेकिन यूएन ने इसे एक ‘देश’ के तौर पर मान्यता दी है।
जानकारों की माने तो सोमालीलैंड का जियोपॉलिटिकल महत्व ‘ज़मीन’ से नहीं, समुद्र में स्थित होने की वजह से है। अदन की खाड़ी में सोमालीलैंड का समुद्र तट काफी अहम है। यहाँ ईरान के सपोर्ट वाले हूथी शिपिंग लेन पर हमला कर रहे हैं और इस इलाके का इस्तेमाल इजराइल पर मिसाइल लॉन्च करने के लिए कर रहे हैं। रेड सी शिपिंग लेन कई महीनों से पश्चिमी जहाजों के लिए खतरनाक रही हैं क्योंकि हूथी उन पर हमला करते रहते हैं। सोमालीलैंड के साथ दोस्ताना रिश्ते होने से इज़राइल को समुद्री इंटेलिजेंस के लिए सपोर्ट मिलता रहेगा और इस इलाके में ईरानी असर का मुकाबला करने में मदद मिलेगी। साथ ही, जिबूती में चीन की बढ़ती मौजूदगी के बीच सोमालीलैंड का बरबेरा पोर्ट का अपना महत्व बताया जाता है।
सोमालीलैंड को अभी यूएन से मान्यता नहीं मिली है लेकिन एक देश बनने के लिए जो जरूरी मान्यताएँ हैं, वह सब सोमालीलैंड के पास मौजूद है। किसी देश को ‘पहचान’ दूसरे देशों से मिलती है, फिलहाल इजरायल ने कदम बढ़ाया है। उम्मीद की जा सकती है कि बाकी देश भी सोमालीलैंड को मान्यता देने के लिए आगे आएँगे। एक देश की पहचान उसके लोगों, एक फंक्शनल गवर्निंग बॉडी और अपनी पावर दिखाने की उसकी अपनी इच्छा से होती है। सोमालीलैंड पिछले तीन दशकों से ऐसा ही रहा है।
रामस्वरूप रावतसरे