अय्यर उवाच: शैतान ही पैसे की बरबादी का कर सकते समर्थन


-लिमटी खरे

एक तरफ कांग्रेसनीत केंद्र और कांग्रेस की ही दिल्ली सरकार द्वारा भारत की प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुके राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए माकूल माहौल तैयार करने में दिन रात एक की जा रही है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता और पिछले दरवाजे (बरास्ता राज्य सभा) संसद में अपनी आमद देने वाले मणि शंकर अय्यर द्वारा ही यह कहा जा रहा है कि अगर कामन वेल्थ गेम्स सफल होते हैं तो इससे वे खुश नहीं होंगे।

आखिर एसा क्या हो गया है कि कामन वेल्थ गेम्स की मेजबानी लेने के पांच सालों के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मणिशंकर अय्यर अचानक भडक पडे हैं। अमूमन वैसे तो माना यही जाता है कि नब्बे के दशक के उपरांत कांग्रेस का कोई भी वरिष्ठ नेता तब तक सार्वजनिक तौर पर बयानबाजी नहीं करता है जब तक कि कांग्रेस का आलाकमान उसे प्रत्यक्ष या परोक्ष तौर पर एसा करने के लिए इशारा न कर दे।

राजनीति में एक दूसरे के कद को कम करने या यूं कहें कि साईज में लाने के उद्देश्य से वरिष्ठ नेताओं द्वारा इस तरह के खेल को अंजाम दिया जाता है। इस मामले को भी दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बढते कद से जोडकर देखा जा रहा है। देश की राजनैतिक राजधानी दिल्ली जैसे प्रदेश में लगातार तीसरी बार सत्ता में बैठना कोई मामूली बात नहीं है। हो सकता है कि शीला के बढते कद ने कांग्रेस की दूसरी पंक्ति के नेताओं की नींद हराम कर दी हो और उन्होंने षणयंत्र के तहत कांग्रेस की राजमाता श्रीमति सोनिया गांधी के कान भरने आरंभ कर दिए हों।

बहरहाल कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य चीख चीख कर इस बात को कह रहे हैं कि अक्टूबर में दिल्ली में होने वाले कामन वेल्थ गेम्स का आयोजन अगर सफल होता है तो उन्हें खुशी के बजाए दुख होगा। उन्होंने इस आयोजन को पैसों की बरबादी करार देते हुए कहा कि सिर्फ और सिर्फ ‘‘शैतान‘‘ ही इसका समर्थन कर सकते हैं। मणिशंकर अय्यर की इस बात को सही माना जा सकता है कि यह वाकई पैसे की बरबादी ही है, किन्तु उस वक्त मणिशंकर अय्यर कहां थे, जब इस आयोजन में भारत ने मेजबानी करने का प्रस्ताव रखा था, और भारत को मेजबानी प्रदान भी की गई थी।

इतना ही नहीं 2005 से अब तक जब कामन वेल्थ गेम्स के लिए बैठकें पर बैठकें होती रहीं, आयोजन के लिए स्टेडियम दुरूस्त होते रहे, करोडों अरबों रूपयों का आवंटन जारी किया गया, सडकों, चमचमाती विदेशी लुक वाली यात्री बस, चकाचक यात्री प्रतीक्षालय, विदेशियों की सुविधा के लिए आरामदेह विलासिता भरे मंहगे टायलेट आदि का निर्माण कराया जा रहा था, तब राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर पता नहीं किस नींद में सो रहे थे। अचानक ही कामन वेल्थ गेम्स से तीन माह पूर्व ही उनकी तंद्रा टूटी है, और उन्होंने कामन वेल्थ गेम्स पर उलटबंसी बजाना आरंभ कर दिया है।

हमें तो देश के इलेक्ट्रानिक मीडिया की सोच पर भी तरस ही आता है। अपनी टीआरपी (टेलीवीजन रेटिंग प्वाईंट) बढाने के चक्कर में इस तरह की बेकार खबरों से सनसनी पैदा करने की नाकामयाब कोशिश में ही लगा रहता है इस तरह का मीडिया। मीडिया ने मणिशंकर के कामन वेल्थ गेम्स वाले बयान पर तो काफी सनसनी फैलाई पर किसी ने भी अय्यर से यह सवाल पूछने की जहमत नहीं उठाई कि आखिर पांच सालों तक जब यह पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा था, तब वे चुप क्यों बैठे?

आज अचानक किस बोधी वृक्ष के नीचे बैठने से उन्हें इस सत्य का भान हुआ कि पैसा पानी की तरह बहाया जा रहा है, और शैतान ही इसका समर्थन कर सकता है। चूंकि इस खेल का समर्थन कांग्रेस की राजमात श्रीमति सोनिया गांधी, युवराज राहुल गांधी और दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित सहित कंेद्र की कांग्रेसनीत संप्रग और दिल्ली की कांग्रेस सरकार कर रही हैं तो क्या राज्य सभा सदस्य मणिशंकर अय्यर खुद मंत्री न बन पाने के चलते अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष श्रीमति सोनिया गांधी, कांग्रेस की नजर में भविष्य के प्रधानमंत्री राहुल गांधी और दिल्ली की गद्दी पर तीसरी मर्तबा बैठने वाली शीला दीक्षित सहित समूची सरकार को ही ‘‘शैतान‘‘ की संज्ञा दे रहे हैं।

वैसे मणिशंकर अय्यर का यह कथन सही ठहराया जा सकता है कि इसकी तैयारियों में बहाए गए 35 हजार करोड रूपयों का उपयोग देश के गरीबों और बच्चों की बेहतरी में करना मुनासिब होता। सच है देश की दो तिहाई आबादी को आज दो जून की रोटी तक मुहैया नहीं है और सरकार 35 हजार करोड रूपए दिखावे में खर्च कर रही है। यह राशि आई कहां से है? भारतीय रिजर्व बैंक ने कहीं से नोट तो नहीं छापे हैं, जाहिर है यह समूचा धन देश के गरीब गुरबों के द्वारा हर कदम पर दिए जाने वाले कर से ही जुटाई गई है।

एक तरफ जहां मणिशंकर अय्यर द्वारा इस आयोजन को लेकर सरकार को कोसा जा रहा है, वहीं उसी वक्त देश के खेल मंत्री एम.एस.गिल द्वारा 19वंे राष्ट्रमण्डल खेलों के लिए सज रहे स्टेडियम का जायजा लिया जा रहा था। खेल मंत्री इस आयोजन को भारत की इज्जत का सवाल भी निरूपित कर रहे हैं। गिल ने नेहरू स्टेडियम को देखकर यह कहा कि उन्हें खुशी हो रही है कि यह स्टेडियम आखिरकार पूरा हो गया है।

इधर भारत गणराज्य के खेल मंत्री एम.एस.गिल इस आयोजन पर पैसे की कथित तौर पर बरबादी में अपनी ओर से खुशी जता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस के ही राज्य सभा सदस्य मणि शंकर अय्यर द्वारा इस तरह की खुशी वही जाहिर कर सकता है जो ‘‘शैतान‘‘ हो। अब फैसला जनता करे या मणिशंकर अय्यर अथवा देश पर आध्शी सदी से ज्यादा राज करने वाली कांग्रेस कि मणि शंकर अय्यर आखिर ‘‘शैतान‘‘ की उपाधि किसे देना चाह रहे हैं।

July 30th, 2010 | Tags: , | Category: खेल जगत | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post | 152 views

3 Responses to “अय्यर उवाच: शैतान ही पैसे की बरबादी का कर सकते समर्थन”

Leave a Reply

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)
32 queries in 0.247 seconds.