लिमटी खरे

हमने मध्य प्रदेश के सिवनी जैसे छोटे जिले से निकलकर न जाने कितने शहरो की खाक छानने के बाद दिल्ली जैसे समंदर में गोते लगाने आरंभ किए हैं। हमने पत्रकारिता 1983 से आरंभ की, न जाने कितने पड़ाव देखने के उपरांत आज दिल्ली को अपना बसेरा बनाए हुए हैं। देश भर के न जाने कितने अखबारों, पत्रिकाओं, राजनेताओं की नौकरी करने के बाद अब फ्री लांसर पत्रकार के तौर पर जीवन यापन कर रहे हैं। हमारा अब तक का जीवन यायावर की भांति ही बीता है। पत्रकारिता को हमने पेशा बनाया है, किन्तु वर्तमान समय में पत्रकारिता के हालात पर रोना ही आता है। आज पत्रकारिता सेठ साहूकारों की लौंडी बनकर रह गई है। हमें इसे मुक्त कराना ही होगा, वरना आजाद हिन्दुस्तान में प्रजातंत्र का यह चौथा स्तंभ धराशायी होने में वक्त नहीं लगेगा. . . .

क्या अपनी फौज हटाने के साथ ही तालिबान के लिए रेड कारपेट बिछा रहा अमेरिका!

(लिमटी खरे) दुनिया के चौधरी अमेरिका के द्वारा अफगानिस्तान से सेना वापसी की घोषणा के बाद 04 मई को अफगानिस्तान...

संसद के मानसून सत्र के पहले केंद्र में मंत्रीमण्डल विस्तार की अटकलें

(लिमटी खरे)संसद का मानसून सत्र जुलाई के दूसरे सप्ताह में आरंभ होने की उम्मीद है। इसी के साथ नरेंद्र मोदी...

19 queries in 0.366