कर्मों के कारण है पुनर्जन्म : श्रीमद भगवद् गीता


पुनर्जन्म या REINCARNIATION एक ऐसा शब्द है जिससे लोग REBIRTH के नाम से जानते है हिन्दू धर्म के लोग पुनर्जन्म मतलब जनम,मृत्यु,और पुनः जनम के चक्र में विश्वास करते है अध्यात्मिक कानून के आधार पर पुनर्जन्म का तात्पर्य है” आत्माओ की game.wallpapers.capa.ru_098पुर्नस्थापना” ,संस्कृत में पुनः शब्द का अर्थ होता है ‘अगला समय’ या ‘फिर से’ और जनम का अर्थ होता है जिंदगी इस तरह पुनर्जन्म का अर्थ हुआ अगली ज़िन्दगी या आने वाली ज़िन्दगी पुनर्जन्म में हमारे पुराने कर्मो का बड़ा महत्व है वेदों में कहा गया कि अध्यात्मिक कानून के अनुसार पिछले जन्मों के बुरे कर्म हमें अपने नए जनम में भोगने पड़ते है जैसे एक परिवार मे एक बच्चा जन्म लेता है और वह पूरी तरह से स्वस्थ भी है मगर उसी दम्पति की दूसरी संतान अपंग है या मानसिक रूप से ठीक नहीं है तो यह उसके पिछले जन्म के बुरे कर्मो के कारण है पुनर्जन्म के इस बात को लोगो ने स्वीकार किया है कि हमें अपने पिछले जन्म के पुरे कर्म का फल अपने अगले जन्म में मिलता है
भगवत गीता के अनुसार जिस तरह से एक मनुष्य पुराने कपड़े उतार कर नए कपड़े पहनता है ठीक हमारी आत्मा भी पुराने शरीर को छोड़ कर नया शरीर धारण करती है
स्वामी ज्योतिमयानान्दा ने संस्कृत में कर्म शब्द का अर्थ कार्य बताया है इनके अनुसार हमारे कार्य के भाव की छवि हमारे मस्तिस्क में दो प्रकार से रहती है
(१) पहले प्रकार में हमारे पिछले जन्म के कार्य की छवि के बारे मे हमारा मस्तिष्क बेहोश रहता है उससे कुछ भी याद नहीं रहता है
(२)और दूसरे प्रकार में हमारे कार्य यानि हमारे पिछले जनम की कहानी की हलकी हलकी सी छवि हमारे दिमाग के किसी कोने में संजोये रहती है
हमें कई ऐसे उद्धरण मिले है जहाँ लोगों ने अपने पुराने जन्म के बारे में बताया है मगर अधिकांश लोग मृत्यु के बाद जब नए योनी में प्रवेश करते है तो वो अपने पुराने जन्म के बारे में भूल जाते है
स्वामी ज्योतिमयानान्दा के अनुसार हमारे पीछे जन्म के कार्य बीज की तरह होती है अगर कार्य आछा हुआ तो हमें फल अच्छा मिलता है और अगर कार्य बुरा रहा तो फल भी बुरा मिलता है हमें पिछले जन्म की बातें तो याद नहीं होती मगर अपने उपस्थित जन्म में हम अच्छा कार्य करके अपने आने वाले जन्म को सुखमय बना सकते है
प्राचीन काल से लेकर आधुनिक काल तक पुर्नजन्म के बारे में कई मान्यताएं चलती आई है मगर ऐसे भी कुछ प्रमाण मिले है जिससे प्रमाणित होता है कि प्राचीन काल से ही लोग पुर्नजन्म की बातो पर विश्वास करते आये हैखासकर मिश्र के लोग जब किसी मृतक को दफनाते थे तो वे मृतक की शव के साथ उसकी पसंदीदा चीजे और ज़रूरी सामान दफना देते थे ताकि अगले जन्म में ये चीजे उनके काम आये
स्वामी विवेकानंद का कहना था की ”हमारे अन्दर वो शक्ति है की हम कुछ भी कर सकते है बस हमें उस शक्ति को पहचानने की ज़रूरत है हम क्या है या क्या करना चाहते है ये सब हम अपने अन्दर पा सकते है कहने का तात्पर्य ये है कि अपने अन्दर की शक्ति को जान कर अपने पिछले कार्यो को समझ सके और अपने वर्त्तमान और भविष्य की ज़िन्दगी मे सामंजस्य स्थापित कर सके
बुद्ध धर्म के के अनुयायी भी पुर्नजन्म पर विश्वास करते है ” THE TIBETIAN BOOK OF DEAD ” में हमें वर्णन मिलता है की १ आत्मा १ शरीर को छोड़ कर दूसरे शरीर में प्रवेश करती है
हिन्दू धर्म के अनुसार उस दिन पुर्नजन्म का चक्र समाप्त हो जायेगा जिस दिन हम इंसान कर्म करना छोड़ । जब हमारे बुरे या अच्छे कर्म ही नहीं होगे तो पुर्नजन्म भी नही होगा । वेदों के जानकर विद्वानों का मानना है कि पुर्नजन्म की पहली सीढ़ी कर्म है
फिर भी पुर्नजन्म के के पन्ने खुलने के बाद भी हमारे समाज में यह विषय एक गुत्थी की तरह है लोग तो अभी भी पुर्नजन्म की बातो पर विश्वास नही करते मगर वेदों में पुर्नजन्म को माना गया है। वेदों के अनुसार पुर्नजन्म में कर्म को प्राथमिकता दी गई है । कहने का सार यह है कि अपने लिए हीं सही अच्छे कर्मों को जीवन में प्राथमिक दर्जा दिया जाना चाहिए ।

:-  कीर्ति राज ,मौर्या टीवी
August 20th, 2009 | Category: धर्म-अध्यात्म | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post | 337 views

One Response to “कर्मों के कारण है पुनर्जन्म : श्रीमद भगवद् गीता”

Leave a Reply

Type Comments in Indian languages (Press Ctrl+g to toggle between English and Hindi OR just Click on the letter)
28 queries in 0.249 seconds.