26/11 को एक साल


taj_attackएक साल पहले दहल गया था ‘पूरा देश’। मुम्बई में हुए सिलसिलेवार आंतकी हमलों ने पूरे देश में दहशत का माहौल पैदा कर दिया था। मौत का ऐसा मंजर किसी ने सपने में भी नहीं सोचा था। लाशों के ढेर में पसरा सन्नाटा और उस सन्नाटे में गूंजती गोलियों की आवाजें। पूरा देश आतंकियों के खूनी खेल को अपने-अपने टीवी सेटों पर टकटकी लगाए देख रहा था। 26/11 को एक साल हो गया है लेकिन आज भी लोग उस खौफनाक मंजर को यादकर सहम जाते हैं। आज भी एक आम आदमी घर से निकलने के बाद पहले सोचता है कि शाम को घर लौटगा कि नहीं। जिन्होंने अपने करीबी खोये, जिस मां ने अपने बेटे को खोया, जो बच्चे अनाथ हो गए, उन सबकी जिन्दगी तो 26/11 के बाद जैसे रूक गयी है। हर हिन्दुस्तानी के दिल से यही आवाज निकल रही है कि ‘बहुत हुआ अब’।

इस समय सेना प्रमुख के बयान ने आंतकवाद के खिलाफ सरकार के रवैये को लेकर हकीकत जाहिर की। सेना प्रमुख जनरल दीपक कपूर ने कहा कि ”अमेरिका में 9/11 के बाद कुछ नहीं होता है। इंडोनेशिया में भी बाली में विस्फोट के बाद कुछ नहीं होता है। लेकिन हमारे यहां संसद के हमले के बाद 26/11 होता है, बस अब और नहीं।” हलांकि उनका ये बयान मुंबई हमले की बरसी के समय में आया। सेना प्रमुख का ये बयान भारतीय सेना के हौसले को दर्शाता है लेकिन एक सवाल भी खड़ा करता है कि अब तक आंतकवाद के खिलाफ हमारी सरकार ने कड़ा रवैया क्यों नही अपनाया? क्या 26/11 जैसे हमले का इंतजार हो रहा था?

संसद में हमले के बाद भी कोई कड़े कदम नहीं उठाये गये। जिसका खामियाजा 26/11 के रूप में देखने को मिला।

आज भी आतंकियों के हौसले बुलंद हैं। 26/11 की बरसी के मौके पर सरकार को सबक लेने की आवश्‍यकता है और आतंकवाद के खिलाफ कड़े रवैये को अपनाने की जरूरत है तभी देश आतंकवाद से मुक्त हो पायेगा।

- हिमांशु डबराल

November 28th, 2009 | Category: राजनीति | Print This Post Print This Post | Email This Post Email This Post | 82 views

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