हिमांशु डबराल

लेखक स्‍वतंत्र टिप्‍पणीकार व ब्लॉगर हैं।

सजायाफ्ता जन प्रतिनिधियों को क्यूँ मिले सरकारी पेंशन…

उल्लेखनीय है कि किसी आपराधिक मामले में दो साल से आधिक सजा हो जाने पर कानूनन कोई भी नेता सजा ख़तम होने के छ: साल बाद तक चुनाव लड़कर संसद या विधानसभा में नहीं आ सकता। इन कड़े प्रावधानों के बावजूद अपनी पिछली कथित जनसेवा और विधायी सदन में काटे गये कार्यकाल के एवज में वही नेता आराम से उसी जनता की गाढ़ी कमाई को पेंशन के रूप में हड़प सकता है जिसपर कथित आपराधिक अत्याचार के लिए वह सजायाफ्ता घोषित होता है।