अमित शाह का बजा सियासी बिगुल

कुमार कृष्णन 

केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने दो दिवसीय बिहार दौरे के क्रम में जहां राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के कार्यकर्ताओं का उत्साह बढ़ाया, वहीं विपक्ष को विभिन्न मुद्दों को लेकर घेरा। उन्होंने राजद और कांग्रेस को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया तो परिवारवाद को लेकर भी निशाना साधा। 

मुख्यमंत्री एवं जनता दल (यूनाइटेड) के प्रमुख कुमार के आधिकारिक आवास एक अणे मार्ग पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने राज्य में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सहयोगियों के साथ इस साल के अंत में प्रस्तावित राज्य विधानसभा चुनाव की रणनीति को लेकर चर्चा की। 

नीतीश कुमार लंबे समय से बिहार राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  की धुरी रहे हैं। अमित शाह और शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी में यह संकेत साफ हो गया कि बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का अस्तित्व नीतीश कुमार के बिना अधूरा है। इसीलिए बैठक में तय हुआ कि पूरी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  टीम एकजुट होकर अधिक से अधिक सीटें जीतने की रणनीति पर काम करेगी। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का लक्ष्य इस बार 225 सीटें जीतने का है। बैठक में तय हुआ कि विधानसभा चुनाव से पहले कुछ और साझा चुनावी अभियान चलाए जाएंगे। इस दौरान भाजपा, जदयू, हम और लोजपा रामविलास  सहित सभी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के सहयोगी दल मिलकर विपक्ष को घेरेंगे।  गौरतलव है कि बिहार में विधानसभा की 243 सीटें हैं. इनमें से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन ने 225 सीटें जीतने का लक्ष्‍य रखा है। बिहार में सामान्‍य बहुमत से सरकार बनाने के लिए 122 विधायकों की जरूरत होती है, ऐसे में यदि बिहार में एनडीए 225 सीटें जीतने में सफल रहता है तो गठबंधन को दो तिहाई बहुमत हासिल हो जाएगा। बैठक में इस लक्ष्य को कैसे हासिल करना है, इसको लेकर भी मंथन हुआ। इसके साथ ही तय हुआ है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन  आक्रामक रणनीति के साथ मैदान में उतरेगा।सुशासन और विकास के मुद्दे पर फोकस रहेगा।  

पार्टी नेताओं को चुनाव में जीत का मंत्र देते हुए अमित शाह ने कहा कि जो भी कमी है, उसको ताकत में बदलना है। जिन बूथों पर हम हारते हैं या कम वोट आता है, उन बूथों को जीतना है। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र में यह रणनीति सफल हुई। शाह ने ऐलान किया कि छह अप्रैल को पार्टी स्थापना दिवस और 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती बड़े स्तर पर मनाई जाएगी। बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का यही स्वरूप रहेगा। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन बिहार में स्थिर सरकार देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने ये भी कहा कि जंगलराज नहीं आए, इसके लिए संकल्पित होकर बीजेपी काम करेगी. आरजेडी के शासनकाल के जंगलराज के मुद्दे को चुनाव में उठाया जाएगा।

अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने  बिहार के पटना में केन्द्र सरकार और राज्य सरकार की 800 करोड़ रूपए से अधिक लागत वाली विभिन्न योजनाओं का लोकार्पण एवं शिलान्यास किया। श्री शाह ने कहा कि विपक्षी सरकारों के शासनकाल में बिहार में सहकारिता को पूरी तरह चौपट कर दिया गया था और सैकड़ों चीनी मिलें बंद हो गईं थीं। उन्होंने कहा कि एक ज़माने में बिहार का चीनी उत्पादन देश के चीनी उत्पादन का 30 प्रतिशत से अधिक था जो विपक्षी सरकारों के कार्यकाल में घटकर 6 प्रतिशत से भी कम रह गया। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने का काम करेगी। उन्होंने कहा कि 1990 से 2005 तक विपक्षी सरकारों ने बिहार में हत्या, अपहरण, फिरौती, डकैती और लूटपाट की एक इंडस्ट्री चलाई जिसने राज्य को पूरी तरह से बरबाद कर दिया।  शाह ने कहा कि बिहार में विपक्षी सरकारों के शासनकाल में जातीय नरसंहार हुए, सत्तापोषित भ्रष्टाचार हुआ और चारा घोटाले से राज्य को देश और दुनिया में बदनाम करने का काम किया गया। उन्होंने कहा कि विपक्षी सरकार को बिहार के इतिहास में हमेशा के लिए जंगल राज के रूप में जाना जाएगा। बिहार में नीतीश सरकार के 10 साल के कार्यकाल में हर गांव तक सड़क, बिजली और नल से जल पहुंचा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने घर, शौचालय, पानी, दवाएं, राशन देकर बिहार के गरीबों के कल्याण के काम किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछली केन्द्र सरकार के 10 साल के कार्यकाल में बिहार को 2 लाख 80 हज़ार करोड़  रुपए दिए गए थे जबकि मोदी सरकार के 10 साल में बिहार को 9 लाख 23 हज़ार करोड़ रूपए दिए गए हैं।

श्री शाह ने कहा कि बिहार में 4 लाख करोड़ रूपए के सड़क और पुल, 1 लाख करोड़ रूपए के रेलवे प्रोजेक्ट्स और 2 हज़ार करोड़ रूपए के एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स भी दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि 8 हज़ार करोड़ रूपए से बिहार में 7 बड़े पुलों का निर्माण हो रहा है, 31 हज़ार करोड़ रूपए से 5 हज़ार किलोमीटर लंबी रेल लाइन बन रही है और देश में पहली किसान रेल भी बिहार से ही शुरू हुई। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने बिहार में मखाना बोर्ड बनाया और बरौनी के खाद कारखाने सहित 766 अन्य प्रोजेक्ट भी केन्द्र सरकार की मदद से राज्य में शुरू हुए हैं। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार का विकास का 20 साल का ट्रैक रिकॉर्ड है और अब यहां से जंगलराज समाप्त हो चुका है।

नीतीश कुमार पिछले दो दशकों से बिहार में राजग का ‘‘चेहरा’’ रहे हैं लेकिन अटकलें हैं कि जेडीयू प्रमुख के कथित खराब स्वास्थ्य को देखते हुए भाजपा इस बार अपने फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है। पहले, नीतीश कुमार कई बार अचानक राजग का साथ छोड़ चुके हैं। हालांकि, कुमार यह दोहराते रहे हैं कि वे हमेशा के लिए राजग में वापस आ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक अमित शाह ने सभी दलों के साथ मिलकर विधानसभा चुनाव को लेकर खास प्लानिंग पर विचार किया है। 

भाजपा के रणनीतिकार और गृह मंत्री अमित शाह राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव पर यूं ही नहीं हमलावर है। इस बार अमित शाह को लालू यादव का वो स्वरूप याद आ रहा है जिन्होंने आरक्षण के रथ पर सवार हो कर भाजपा को आरक्षण विरोधी करार देकर उनके हाथों से जीत छीन ली थी। 2015 में लालू यादव को एक मुद्दा ‘आरक्षण’ मिला था। इस बार तो लालू यादव दो धारी तलवार भांज रहे हैं। लालू यादव वक्फ बोर्ड संशोधन बिल को मुस्लिम विरोधी ठहराने लगे हैं और साथ ही 65 प्रतिशत आरक्षण को 9वीं अनुसूची में नहीं डालने को ‘आरक्षण चोर’ बताने लगे हैं।

इधर, राजद के नेता अब केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर पलटवार कर रहे हैं। राजद की सांसद मीसा भारती ने कहा कि राजद अध्यक्ष लालू यादव जब रेल मंत्री थे, तब उन्होंने बिहार को तीन कारखाने दिए थे। अमित शाह को यह पता होना चाहिए कि बिहार को किसी ने कारखाना देने का काम किया है, तो वे लालू यादव हैं। अगर कोई पूछे कि बिहार में क्या है, तो रेलवे के वही तीन कारखाने हैं जो लालू यादव की सरकार में बने। लालू यादव ने बिहार में छह विश्वविद्यालय देने का काम किया, उसके बाद सातवां विश्वविद्यालय यहां नहीं बना।

राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पटना के बापू सभागार में दिए भाषण पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि एनडीए और भाजपा के नेताओं का काम योजनाओं का शिलान्यास और शुभारंभ के नाम पर केवल मीडिया की सुर्खियां बटोरना है, काम से मतलब नहीं है। ऐसी योजनाओं की एक लंबी सूची है।

राजद प्रवक्ता ने कहा कि इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता है कि दस वर्षों से केंद्र में और लगभग दो दशकों से बिहार की सत्ता पर काबिज भाजपा नेता विपक्षी नेताओं से कामों का हिसाब मांग रहा है। इसकी जानकारी तो उन्हें सरकारी दस्तावेजों से ही मिल जाएगी। राजद के शासनकाल से एनडीए के शासनकाल में आपराधिक घटनाओं में दो सौ प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार पर बोलने से पहले गृहमंत्री को 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नीतीश कुमार पर लगाए गए भ्रष्टाचार और घोटालों की सूची भी देख लेनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि दरअसल बिहार की जनता उनसे जानना चाहती है कि 10 वर्षों में केंद्र की सरकार ने बिहार को क्या दिया?

कुमार कृष्णन

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