कुमार कृष्णन

विगत तीस वर्षो से स्वतंत्र प​त्रकारिता, देश विभिन्न समाचार पत्र और पत्रिकाओं में रचनाएं प्रकाशित संपर्क न. 09304706646

कुछ कर गुजरने के जूनुन ने पहुंचाया जया को इस मुकाम तक

जया देवी का सराधी गांव  हर साल सूखे के कारण फसलों के बर्बाद होने से परेशान रहता था। ऐसे में जया देवी ने इस समस्या का तोड़ निकालने का फैसला लिया और एक दिन वो एग्रीकल्चर टेक्नोलॉजी मैनेजमेंट एजेंसी  के गवर्निंग सदस्य किशोर जायसवाल  से मिलीं। उन्होने जया को सूखे का कारण और बारिश के पानी को कैसे बचाया जाये? इसके बारे में बताया। किशोर जायसवाल ने उनको बंजर जमीन  पर पेड़ लगाने के लिए कहा।

गांधी की विरासत कहाँ तक होगी मददगार

गाँधी जी और उनके सहयोगियों तथा वहाँ के किसानों की सक्रियता के कारण तत्कालीन बिहार सरकार ने उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जिसके मनोनीत सदस्य गाँधी जी भी थे। इस कमेटी की रिपोर्ट को सभी पक्षों द्वारा स्वीकार किया गया और तीन कठ्ठा प्रथा समाप्त कर दी गई। इसके अलावा किसानों के हित में अनेक सुविधायें दी गईं। इस प्रकार निहलों के विरुद्ध ये आन्दोलन सफलता पूवर्क समाप्त हुआ। इससे चंपारण के किसानों में आत्मविश्वास जगा और अन्याय के प्रति लङने के लिये उनमें एक नई शक्ति का संचार हुआ। चंपारण सत्याग्रह भारत का प्रथम अहिंसात्मक सफल आन्दोलन था। गाँधी जी द्वारा भारत में पहले सत्याग्रह आन्दोलन का शंखनाद चंपारण से शुरु हुआ। यहाँ किसानों के बच्चों को शिक्षित करने के लिए ग्रामीण विद्यालय खोले गये। लोगों को साफ-सफाई से रहने का तरीका सिखाया गया। सारी गतिविधियाँ गांधीजी के आचरण से मेल खाती थीं। स्वयंसेवकों ले मैला ढोने, धुलाई, झाडू-बुहारी तक का काम किया। इसके साथ ही गांधीजी का राजनीतिक कद और बढ़ा।