अनिल कुमार बैनिवाल
(लेखक शाह सतनाम जी ब्वायज कालेज, सिरसा में व्याख्याता हैं)

हिन्दी वेब पत्रकारिता की चुनौतियां – अनिल कुमार बैनिवाल


संचार के संकुचन को तोड़ते हुए इंटरनेट ने एक क्लिक के सहारे सम्‍पूर्ण विश्‍व को विजित कर लिया है। सूचना प्रौद्योगिकी की इस महान विजय के फलस्‍वरुप वेब पत्रकारिता अथवा सायबर जर्नलिज्‍म का सूत्रपात हुआ। वेब की दुनिया में हिंदी पत्रकारिता अपने शैशवाकाल से गुजर रही है। परन्‍तु अल्‍प समय में सायबर जगत में समाचारों व विचारों में हिंदी का तेजी से प्रयोग अंग्रेजी भाषा की गुलामी की बेडि़यों को तोड़ने का एक फरमान प्रतीत होता है। फिर भी हिंदी का व्‍यापक इस्‍तेमाल बड़ी सूझबूझ व सहजता के साथ करना होगा ताकि हमारी मातृभाषा केवल मात्र भाषा बनकर न रह जाये।

गांवों से लेकर शहरों तक, झोपड़ियों से लेकर राजमहलों तक तथा धरती से लेकर अंतरिक्ष तक सूचना ने नई तकनिकों के सहारे हर जगह अपने पांव फैला दिए है। सूचना तकनीकी के क्षेत्र में टेलिफोन, मोबाईल, रेडियो व टेलिविजन ने जिस नये युग का श्री गणेश किया कंप्‍यूटर के आगमन ने उसमें क्रान्ति ला दी। रेड़ियो, टेलिविजन व मोबाईल जैसे सशक्त संचार माध्यमों के पश्चात् एवं लम्बे अन्तराल तक गहरी नींद मे सोये संचार को जगाने का बीड़ा कंप्‍यूटर ने बखुबी उठाया है। संचार के विस्तृत क्षेत्र की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए तीन सूक्ष्म शब्दों ‘डब्‍ल्‍यू डब्‍ल्‍यू डब्‍ल्‍यू’ ने संचार की गति को अत्यधिक तीव्र कर दिया। एक उंगली के इशारे पर मिलों की दूरियों को पलक झपकने के साथ ही तय कर सूचना क्रांति ने एक नये युग का सूत्रपात किया। कहा जाता है कि वर्तमान में वह व्यक्ति सबसे श्रेष्ठ है जिसके पास ज्यादा सूचनाएं हैं और सूचना आदान प्रदान करने की संसार की सबसे बड़ी कडी है इन्टरनेट।

इन्टरनेट आज एक सर्वव्यापी सत्ता बन कर उभरा है। यह एक ऐसा माध्यम है जिसके द्वारा किसी सैन्य सामग्री को प्रयोग किये बिना विश्व को जीता जा सकता है। अलादीन के चिराग की तरह तेज सूचना संवाहक के रूप मे इन्टरनेट ने सारे विश्व के ज्ञान के खजाने को समय व दूरी की सीमाओं को लांघकर हमारे समक्ष प्रस्तुत कर दिया है।

1969 में जब अमेरिका रक्षा विभाग ने कुछ कंप्‍यूटरों को जोड़कर एक नेटवर्क तैयार किया तब शायद उन्हें यह अनुमान नहीं था कि उनके द्वारा बोया गया यह अदना बीज एक दिन सम्पूर्ण विश्व को वटवृक्ष की भांति अपनी छाया से ओतप्रोत कर देगा।

संचार के सबसे शक्तिशाली व तीव्र माध्यम के रूप मे इन्टरनेट ने संचार के सभी परम्परागत मॉडलों व प्रक्रियाओं को गौण बना दिया है। विश्व संचार की इस नई तकनीक ने हमें अपना दास बना लिया है और इसी कारण इंटरनेट में किसी भी प्रकार का व्यवधान हमें चिंतित कर देता है। अगर कहा जाए कि आण्विक शक्ति के विकास के बाद इंटरनेट विश्व की सबसे बड़ी उपलब्धि है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।

पिछले कुछ समय तक हमारे पास सूचना के तीन माध्यम थे – पत्र-पत्रिकाएं, रेड़ियो और टेलिविजन परन्तु अब कलम विहीन पत्रकारिता के रुप में साइबर जर्नलिजम का आविर्भाव हुआ है। जिस समाचार के लिए कुछ समय पहले तक घन्टों इंतजार करना पड़ता था, वह अब पल भर में हमारे दृश्य पटल पर होता है। इसे विस्तार से पढ़ा भी जा सकता है तथा संग्रहित भी किया जा सकता है। इसके द्वारा रोजमर्रा के रूटिन समाचारों से लेकर सिनेमा, फैशन, जीवनशैली, शिक्षा, समाज, विज्ञान, रहस्यरोमांच से लेकर ज्योतिष तक सभी विषयों पर ताजा तथा उपयोगी सामग्री प्राप्त की जा सकती है। महत्वपूर्ण राष्ट्रीय व अंतराष्ट्रीय समाचार पत्रों के इन्टरनेट संस्करणों ने एक नई प्रणाली ई-जर्नलिजम की शुरूआत की है।

एक सूचना को विश्व के कोने कोने मे पहुंचाने के लिए एक संदेश एक भाषा से दूसरी, दूसरी से तीसरी और तीसरी से चौथी भाषा की गोद में कूदता हुआ विश्व के सभी उन्नत भाषाओं की गोदे मे खेलने लगा है। सात हजार वर्ष पूर्व सांकेतिक भाषा के रूप में संचार के प्रयोग को भाषा रूपी साधन ने अपनी शरण देकर सार्थक बनाया। भारत ने इन्टरनेट पत्रकारिता मे लगभग दस साल पहले दस्तक दी। कुछ समय पहले तक जहां हमें अपनी समाचार पढ़ने सम्बंधी आवश्यकताओं की पूर्ति हेतू समाचार पत्र, समाचार सुनने के लिए रेडियो तथा समाचार देखने के लिए टेलीविजन पर निर्भर रहना पडता था वहीं अब समाचार पढ़ने, सुनने व देखने का एक स्थान इन्टरनेट समाचार पोर्टल के रूप में विकसित हो चुका है। इन्टरनेट पत्रकारिता पर काफी लम्बे समय तक अग्रेजी भाषा का कब्ज़ा रहा है। परन्तु गत पांच-छह वर्षों से हमारी मातृभाषा हिन्दी का प्रयोग समाचार पोर्टल के रूप मे किया जाने लगा है।

”नई दुनिया” अखबार द्वारा ”वेब दुनिया” के नाम से हिन्दी भाषा में पहला इन्टरनेट पोर्टल शुरू होने के साथ ही हिन्दी समाचारों का वेबकरन हुआ। इसके पश्चात् ”नेट जाल” नामक ई समाचार पोर्टल ने अपनी उपस्थिति इन्टरनेट पर दर्ज कराई। हिन्दी समाचार पोर्टल के बढ़ते आकर्षण को देखते हुए कुछ अंतर्राष्ट्रीय संगठनों जैसे गूगल, रेडिफ, बी.बी.सी., सत्यम इन्फोलाइन तथा याहू जैसे बड़े-बड़े पोर्टलों ने भी हिन्दी समाचार सेवा शुरू की।

इंटरनेट समाचार सेवा को अपनी प्रतिष्ठा का प्रतिक मानकर अधिकतर हिन्दी समाचार पत्रों ने इंटरनेट समाचार पोर्टल शुरु किए। अभी हाल ही में याहू व जागरण के मध्य हुए करार ने हिन्दी समाचार पोर्टल के भविष्य को चार चांद लगा दिए है। हमारी मातृभाषा में ताजा तरीन समाचारों से लैस वेबसाइटों ने समाचारों की रुपरेखा को नया आयाम प्रदान किया है। हिन्दी समाचार पोर्टल के रुप में जागरण डॉट कॉम ने विश्व की प्रमुख समाचार वेबसाइटों में उच्च स्थान पाकर भारत के मस्तक को और उंचा कर दिया है।

प्रमुख दैनिक समाचार पत्रों दैनिक भास्कर, राष्ट्रीय सहारा, दैनिक ट्रब्यून, अमर उजाला, राजस्थान पत्रिका, नवभारत टाइम्स, हिन्दी मिलाप, नई दुनिया, स्वतन्त्र चेतना, प्रभासाक्षी के अतिरिक्त समाचार चैनलों आजतक, एन.डी.टी.वी., सी.एन.बी.सी. आवाज़, टोटल टीवी, आइबीएन सेवन, आदि ने भी हिन्दी इन्टरनेट समाचार पोर्टलों के माध्यम से हिन्दी का मान सम्मान बढाया है।

वास्तव में सूचना प्रौद्योगिकी और आधुनिक संचार क्रांति के इस युग मे यदि हम यह स्वीकार कर लें कि भारत की एक सम्पर्क भाषा आवश्यक है और वह केवल हिन्दी हो सकती है तो हिन्दी उस चुनौती का सामना करने मे समर्थ हो जायेगी जो उसके सामने मुंह बाए खड़ी है। इन्टरनेट एक ऐसा मंच है जहां से हम अपनी मातृभाषा को अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चमका सकते हैं।

वर्तमान समय में हिन्दी के लगभग 2500 दैनिक तथा 10000 के आस पास साप्ताहिक समाचार पत्र प्रकाशित हो रहे हैं परन्तु इन समाचार पत्रों में से दो दर्जन के भी इन्टरनेट के संस्करण नहीं है। चौथी दुनिया तथा पंचजन्य के अलावा अन्य कोई साप्ताहिक समाचार वेबसाइट नहीं है। विडम्बना की बात तो यह है कि इनमें से अधिकतर समाचार पत्रों की वेबसाइटों पर अखबारों की खबर ही ज्यों की त्यों परोसी जाती है। इन वेबसाइटों में समाचारों को अपडेट करने वाले वेब पोर्टलों की संख्या न के बराबर है। इसका एक सीधा कारण यह है कि इन वेब साइटों को विज्ञापन के रूप मे मिलने वाली कमाई बहुत कम है। बाज़ारवाद व प्रतिस्‍पर्धा की दौड़ में धन के बिना इन्टरनेट पोर्टल को समय के साथ चलाना काफी कठिन है।

समाचार पोर्टलों पर समाचार पढ़ने के साथ-साथ कुछ अंतर्राष्ट्रीय समाचार संगठनों ने हिन्दी मे समाचार सुनाने की सुविधा भी प्रदान की है। इसमें ऑल इडिया रेडियो, बी.बी.सी. हिन्दी व वाइस आफ अमेरिका का नाम प्रमुखता से लिया जा सकता है।

जहां तक समाचार सुनने के साथ देखने का सवाल है विभिन्न हिन्दी चैनलों की साइट पर महत्वपूर्ण समाचारों के विडियो देखे भी जा सकते है। इनमें आजतक, आई.बी.एन.सेवन, एन.डी.टीवी आदि के नाम प्रमुखता से लिए जा सकते हैं। इन चैनलों की साइट पर फ्लैश फाइल के रूप में विडियो समाचार उपलब्ध है।

दुनिया भर में हिन्दी की महत्वपूर्ण समाचार वेब साइटों से समाचार एकत्रित करके एक स्थान पर उपलब्ध करवा कर गुगल, सीफी व याहू ने पाठक का काम आसान कर दिया है। इन तीनों संगठनों की समाचार पोर्टल पर महत्वपूर्ण ऑनलाइन समाचार साइटों के खण्ड बने होते है जिन्हें पाठक अपनी पसंद के अनुरुप मुख्य पृष्ठ पर ही व्यवस्थित कर सकते है।

हिन्दी पत्रकारिता से जुड़े विभिन्न ऑनलाइन संस्करणों के समाचार अपनी पसंद के अनुरुप आर.एस.एस. यानी ‘रियल सिंपल सिंडिकशन’ की सहायता से अपनी निजी वेबसाइट, ई-मेल अथवा ब्‍लॉग पर एकत्रित कर पढा, सुना व देखा जा सकता है। इन समाचार साइटों से अपने मोबाइल पर अपडेट समाचार संदेश प्राप्त किया जाना हमारी त्वरित सूचना पाने की इच्छा की पूर्ती करता है।

इस प्रकार हम देख सकते हैं कि काफी अल्प समय मे हिन्दी के ई-समाचार पत्रों ने जिस प्रकार से सफलता के नये प्रतिमान स्थापित किये है, उससे हिन्दी पत्रकारिता के इस नये रूप का भविष्य अवश्य ही उज्जवल होगा। परन्तु साथ ही साथ ई-जर्नलिज्म का विकास प्रिंट मीडिया के लिए भी खतरनाक हो सकता है। ब्रिटेन व अमेरिका मे उनके प्रिंट समाचार पत्र की बजाए ई-समाचार पत्र के प्रयोगकर्ता ज्यादा होना वहां के मीडिया जगत के लिए चिंता का विषय बन गया है। भारत में ऐसी स्थिति ना आये इसके लिए प्रयास किया जाना चाहिए ताकि वेब पत्रकारिता से धनार्जन भी किया जा सके, साथ ही साथ वेब समाचार पत्रों को ज्यादा आकर्षक, विचारशील व ताजा सूचनाओं के द्वारा समयानुकूल बनाये जाने की आवश्यकता है। समाचार पत्रों के प्रिंट संस्करणों की ओर देखें तो वहां भी हिन्दी समाचार पत्रों खासकर दैनिक भास्कर और दैनिक जागरण देश के शीर्ष समाचार पत्रों के रूप में उभरे है। इन्होंने अंग्रजी के धुरंधर समाचार पत्रों को भी पटखनी दी है। मीडिया विशेषज्ञों की मानें तो अंग्रेजी पत्रों के प्रसार में कमी का एकमात्र कारण इन पत्रों की कवरेज प्राय: राष्ट्रीय विषयों तक सीमित रहना है। इसका सीधा फायदा हिन्दी पत्रकारिता के प्रिंट व वेब संस्करण उठाते नजर आ रहे हैं जो राष्ट्रीय मुदों के साथ-साथ प्रादेशिक व स्थानीय समाचारों को कवरेज दे रहे हैं। हिन्दी वेब पत्रकारिता की कुछ प्राथमिक समस्याओं का समाधान हो जाए तो यह अत्यधिक सकारात्मक भविष्य का उद्धाटन कर सकती है।

– पहला, यह कि हिन्दी समाचार वेबसाइट का अंग्रेजी समाचार की साइटों की तरह अपडेशन।

– दूसरा, इसके द्वारा अतिरिक्त आय प्राप्त होने के उपाय।

– तीसरा, ई-पत्रों हेतू अलग से विज्ञापन व मार्केटिंग इकाई का गठन।

– चौथा, प्रशिक्षित लोगों का चयन।

– पांचवा, अंग्रजी समाचार पत्रों की तरह ऐसे केन्द्रिय (एकमात्र) फोन्ट का चयन जिससे एक फोन्ट का इस्तेमाल करके हिन्दी समाचार साइटों का इस्तेमाल किया जा सके। क्योंकि वर्तमान में प्रत्येक हिन्दी वेबसाइट का फोंट (अक्षर) एक-दुसरे से अलग है।

इसके अतिरिक्त वेब समाचार पत्र को ज्यादा रचनात्मक, शिक्षाप्रद व सूचनात्मक बना कर इसके रास्ते में आने वाले पत्थरों को समय रहते हटाया जा सकता है।

(लेखक शाह सतनाम जी ब्वायज कालेज, सिरसा में व्याख्याता हैं)

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5 thoughts on “हिन्दी वेब पत्रकारिता की चुनौतियां – अनिल कुमार बैनिवाल

  1. Ramesh

    अनिल बेनीवाल जी आपने बहुत ही अच्छा लेख लिखा, पढ़कर वेब पत्रकारिता के bare me meri ruchi badh गयी है. बहुत बहुत बधाई
    kripya iss tarh के or लेख lekhen

  2. sunil patel

    श्रीमान अनिल जी. वाकई बहुत अच्छा लिखा है. बहुत सरल भाषा में लिखा है जिससे हर कोई बहुत अछे से पढ़ और समझ सकता है. फिर से बधाई. आगे भी लिखते रहे.

  3. अनिल कुमारAnil Kumar

    वाकई में बहुत जानकारी पूण लेख लिखा है आपने…. इस लेख से मेरे कल्पना शक्ति का और विकास होगा… धन्यवाद…

  4. राजीव बिश्‍नोईRajeev Bishnoi

    आदरणीय अनिल जी,
    आप ने वाकई ही वेब पत्रकारिता के बारे में अच्छा लिखा हैं ,भविष्य में आप से इसी तरह के लेख की उमीद करते हैं

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