विश्ववार्ता

बलूचिस्तान में जन्म लेती आत्मघाती महिला सेना

प्रमोद भार्गव
पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत में अब महिलाओं ने भी कंधे से कंधा मिलाकर बलूच नागरिकों के दमन चक्र के विरुद्ध मोर्चा खोल लिया है। बलूचिस्तान लिबरेषन अर्मी (बीएलए) ने दावा किया है कि पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के खिलाफ 31 जनवरी से षुरु किए गए हेरोफ फेज-2 में 200 से अधिक पाक सुरक्षाकर्मी मारे गए हैं और 17 को कब्जे में भी ले लिया है। इस आपरेषन की मुख्य उपलब्धि दो आत्मघाती विद्रोही बालाओं की हैरतअंगेज कहानी सामने आई है। इनमें 21 साल की हवा बलोच और 24 साल की आसिफ मेंगल ने सुरक्षा बलों से जंग में लोहा लेते हुए अनेक सैन्यकर्मियों के चितड़े उड़ा दिए। हवा ने जहां सुरक्षाकर्मियों से सीधा मुकाबला किया, वहीं आसिफा ने नोषकी में स्थित आईएसआई के मुख्यालय पर वाहन बम में सवार होकर फिदायीन हमला किया। इसे बलूचिस्तान में दो दषकों का सबसे बड़ा हमला बताया जा रहा है। बीएलए ने इस घटनाक्रम के सत्यापन के लिए हवा बलोच का एक वीडियो भी जारी किया है, जो उनके द्वारा किए हमले से ठीक 12 घंटे पहले का बताया गया है। पाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ ने इन हमलों में महिला लड़ाकों की उपस्थिति की पुश्टि की है।
बलूचिस्तान में यह संकट खुद पाकिस्तान की नाकामियों का नतीजा है। महिला आत्मघाती हमले जता रहे हैं कि अब विद्रोहियों ने मरमिटने की कसम खा ली है। चूंकि पाकिस्तान के पास इन विद्रोहियों से मुकाबला करने का पर्याप्त साहस नहीं है, इसलिए वे हमलों के पीछे भारत का हाथ बताकर भारत विरोधी झूठा नैरेटिव पाकिस्तान से लेकर विदेषी मंचों पर भी गढ़ रहा है। यह खीज उसकी असहायता दर्षाती है। पाकिस्तान के इस झूठ के दुराचरण से दुनिया परिचित है, इसलिए सब जानते हैं कि पाक के ये शड्यंत्रकारी प्रपंच और नापाक इरादे हैं, इसलिए उसे कहीं से भी समर्थन नहीं मिल पा रहा है। पाकिस्तान इस तरह के आडंबर इसलिए भी रचता है, क्योंकि वह अनेक आंतरिक चुनौतियों से झूझ रहा है। अर्थव्यवस्था चौपट है और गरीबी सुरसामुख की तरह बढ़ रही है। अफगानिस्तान भी सीमाई क्षेत्रों में पाक के लिए संकट का सबब बना हुआ है। जबकि वह इस्लामिक देश है। लेकिन अफगानिस्तान पाक के विरुद्ध इसलिए है, क्योंकि अफगानिस्तान पर सैन्य हमलों के लिए अमेरिका के लिए जगह पाकिस्तान ही देता रहा है। अतएव अफगानियों के साथ-साथ बलूच पाक के लिए जानलेवा नासूर साबित हो रहे हैं। इसलिए विश्व मंचों पर उठाए सवालों के प्रतिउत्तर में भारत ने कह दिया है कि पाक अपनी आंतरिक विफलताओं को भारत पर न थोपे। उसे अब लंबे समय से चली आ रही अपने नागरिकों की मांगों का समाधान करना होगा। भारत को किसी भी स्तर पर उसकी नापाक इच्छा कभी भी पूरी नहीं होगी।
दरअसल पाकिस्तान अपने गिरेवान में झांकने की बजाय भारत पर आरोप मढ़ने में लगा रहता है। जबकि दुनिया जानती है कि पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों द्वारा लष्कर-ए-तैयबा और आईएसकेपी जैसे आतंकी संगठनों को बीएलए के खिलाफ खड़ा किया गया है। लष्कर-ए-तैयबा भारत पर भी अनेक आतंकी हमलों में षामिल रहा है। लेकिन भारत तो छोड़िए बलूच में भी पाक सेना बलूच विद्रोहियों के विरुद्ध कमजोर पड़ रही है। इस कारण सरकार और सेना दोनों ही हताष है। विदेषी मामलों के विषेशज्ञों का मानना है कि बीएलए वास्तव में अब एक जन आंदोलन के रूप में दिखाई दे रहा है। जिससे मुकाबला करना सरकार और सेना के लिए कठिन हो रहा है। बलूचिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता जिब्रान नासिर ने इंटरनेट मीडिया पर एक संदेष साझा करके पाक सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा है कि ‘बलूचिस्तान जल रहा है और पाक जिम्मेदारी से बचने की मानसिकता के चलते यहां हालात और खराब कर रहा है। पाक को बलपूर्वक शांति स्थापित करने की बजाय बातचीत पर जोर देना चाहिए।‘ पाक की इस बर्बरतापूर्ण मानसिकता के चलते प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के अनुसार पाकिस्तान में इस साल 28 प्रतिषत आतंकी हमले बढ़े हैं और इस साल जनवरी माह में ही इन हमलों से होने वाली मौतों का प्रतिषत 43 बढ़ गया है। पाक की पीआईसीएसएस रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी में कुल 361 लोग मारे गए हैं, जिनमें 242 आतंकवादी, 73 नागरिक और 46 सेना के जवान हैं। जबकि बीएलए का दावा है कि आपरेषन हेरोफ के दूसरे चरण में बलूच विद्रोहियों ने पाक सेना के 310 सैनिक मार गिए हैं। जबकि सेना ने 216 विद्रोहियों को मारा हैं। बीएलए ने हेरोफ ऑपरेशन की शुरुआत 2024 में की थी। हेरोफ शब्द का अर्थ बलूचों की भाशा ब्राहुई में ‘काला तूफान‘ होता है। बीएलए के प्रवक्ता जीयंद बलूच ने एक बयान में दावा किया हैं कि बीएलए के लड़ाके विभिन्न स्थानों पर अपना नियंत्रण बनाए हुए हैं और कई मोर्चों पर सैन्यबलों के प्रयास को विफल कर दिया है।          
पाक का बड़ा भू-भाग बलूचिस्तान प्रांत में लंबे समय से स्वतंत्रता की लड़ाई लड़ रहा था, वह सफलता के षिखर पर है। बलूचिस्तान को नए देष के रूप में मान्यता मिल जाती है तो 1971 के बाद पाकिस्तान की भूमि पर दूसरा बड़ा विभाजन दिखाई देगा। 1971 में भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने बांग्लादेष की मुक्ति वाहिनी सेना को सैनिक मदद देकर पाक के दो टुकड़े कर दिए थे। 93 हजार पाक सैनिकों ने भारतीय सेना के समक्ष हथियार डाल दिए थे। सैनिकों का इतना बड़ा समर्पण इस घटना से न तो पहले कभी हुआ और न ही बाद में ?
प्रसिद्ध लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता मीर यार बलूच को बलूच लोगों के अधिकारों की वकालत के लिए जाने जाते हैं। बलूचों ने संयुक्त राष्ट्र से बलूचिस्तान में शांति रक्षक बल भेजने और पाक सेना को बलूच सीमा क्षेत्र से बाहर कर देने का आग्रह भी किया हुआ है।बलूचिस्तान में इस समय विद्रोह की आग चरम पर हैं। बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी आजादी की मांग करने वाला सबसे पुराना सशस्त्र अलगाववादी संगठन है। यह संगठन पहली बार 1970 में अस्तित्व में आया था। इसने जुल्फिकार अली भुट्टो के कार्यकाल में बलूचिस्तान प्रांत में सशस्त्र विद्रोह का शंखनाद कर किया था। कालांतर में सैनिक तानाशाह जिया उल हक द्वारा सत्ता हथियाने के बाद बलूच नेताओं के साथ बातचीत हुई, जिसके परिणामस्वरूप संघर्ष विराम की स्थिति बन गई थी। नतीजतन बलूचिस्तान में सशस्त्र विद्रोह खत्म हो गया था और बीएलए का भी कोई वजूद नहीं रह गया था। किंतु कारगिल युद्ध के बाद सैन्य तानाशाह जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ का तख्तापलट कर सत्ता हथिया ली। इसके बाद मुषर्रफ के संकेत पर साल 2000 में बलूचिस्तान उच्च न्यायालय के न्यायाधीष नवाबमिरी की हत्या कर दी गई और मुषर्रफ ने कुटिल चतुराई बरतते हुए पाक सेना से इस मामले में आरोपी के रूप में बलूच नेता खेरबक्ष मिरी को गिरफ्तार करा दिया। इसके बाद फिनिक्स पक्षी की तरह बीएलए फिर उठ खड़ा हुआ। तब से ही बीएलए स्वतंत्रता संग्राम लड़ रहा है।

 प्रमोद भार्गव