More
    Homeसाहित्‍यगजलमैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

    मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

    मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है
    उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है

    वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान
    उनको भी पाँव उठाने के लिये सहारे के लिये तरसते देखा है

    जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग
    उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते हमने देखा है 

    जिनके हाथो के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर
    उन्ही हाथो को पत्तो की तरह थर थर कापते देखा है

    जिनकी आवाज में कभी बिजली कडकने का होता था भरम
    उनके होठो पर भी आज जबरन चुप्पी का ताला लगा देखा है

    ये जवानी,ये ताकत ये सब तो  कुदरत की इनायत है
    इनके रहते हुये भी,इंसान को बेजान हुआ देखा है

    अपने आप पर इतना ना कभी  इतराना यारो !
    वक्त की मार से अच्छे अच्छे को मजबूर देखा है 

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

    LEAVE A REPLY

    Please enter your comment!
    Please enter your name here

    Must Read

    spot_img