मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है

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मैंने हर रोज जमाने को रंग बदलते देखा है
उम्र के साथ जिन्दगी के ढंग बदलते देखा है

वो जो चलते थे तो शेर के चलने का होता था गुमान
उनको भी पाँव उठाने के लिये सहारे के लिये तरसते देखा है

जिनकी नजरों की चमक देख सहम जाते थे लोग
उन्ही नजरों को बरसात की तरह रोते हमने देखा है 

जिनके हाथो के जरा से इशारे से टूट जाते थे पत्थर
उन्ही हाथो को पत्तो की तरह थर थर कापते देखा है

जिनकी आवाज में कभी बिजली कडकने का होता था भरम
उनके होठो पर भी आज जबरन चुप्पी का ताला लगा देखा है

ये जवानी,ये ताकत ये सब तो  कुदरत की इनायत है
इनके रहते हुये भी,इंसान को बेजान हुआ देखा है

अपने आप पर इतना ना कभी  इतराना यारो !
वक्त की मार से अच्छे अच्छे को मजबूर देखा है 

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जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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