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    Homeसाहित्‍यकविताएक सोच लड़की है पराया धन

    एक सोच लड़की है पराया धन


    क्यो समझते है,
    लड़की है पराया धन
    लड़का है अपना धन
    जबकि दोनों लेते है
    एक कोख से जन्म।

    दोनों की जन्म मै
    मां को होती हैं
    एक सी पीड़ा
    दोनों ही जन्म के बाद
    करते है एक सी क्रीड़ा।
    ये हैं एक प्रकृति नियम
    फिर भी समझते है
    लड़की है पराया धन
    लड़का है अपना धन।।

    दोनों का एक घर
    दोनों का एक आंगन
    दोनों का एक माली
    दोनों का एक चमन
    फिर भी कहते है
    लड़की है पराया धन
    लड़का है अपना धन।।

    लड़की हो जाती है
    शादी के बाद पराई
    लड़के की शादी के बाद
    बहू हो जाती है पराई
    ये कैसा चला आ रहा
    समाज में ये नियम
    आओ सब मिलकर
    बदले ये सब नियम
    और कहने लगे सब
    लड़की है अपना धन
    लड़का है पराया धन।।

    आर के रस्तोगी
    आर के रस्तोगी
    जन्म हिंडन नदी के किनारे बसे ग्राम सुराना जो कि गाज़ियाबाद जिले में है एक वैश्य परिवार में हुआ | इनकी शुरू की शिक्षा तीसरी कक्षा तक गोंव में हुई | बाद में डैकेती पड़ने के कारण इनका सारा परिवार मेरठ में आ गया वही पर इनकी शिक्षा पूरी हुई |प्रारम्भ से ही श्री रस्तोगी जी पढने लिखने में काफी होशियार ओर होनहार छात्र रहे और काव्य रचना करते रहे |आप डबल पोस्ट ग्रेजुएट (अर्थशास्त्र व कामर्स) में है तथा सी ए आई आई बी भी है जो बैंकिंग क्षेत्र में सबसे उच्चतम डिग्री है | हिंदी में विशेष रूचि रखते है ओर पिछले तीस वर्षो से लिख रहे है | ये व्यंगात्मक शैली में देश की परीस्थितियो पर कभी भी लिखने से नहीं चूकते | ये लन्दन भी रहे और वहाँ पर भी बैंको से सम्बंधित लेख लिखते रहे थे| आप भारतीय स्टेट बैंक से मुख्य प्रबन्धक पद से रिटायर हुए है | बैंक में भी हाउस मैगजीन के सम्पादक रहे और बैंक की बुक ऑफ़ इंस्ट्रक्शन का हिंदी में अनुवाद किया जो एक कठिन कार्य था| संपर्क : 9971006425

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