विवादों में नोबेल विजेता

nobel winnersनोबेल पुरस्कार को अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विश्व के सबसे बड़े पुरस्कार के रूप में माना जाता है। यह स्वीडन के निवासी एवं डायनामाईट के अविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल की याद में प्रतिवर्ष 10 दिसम्बर को दिया जाता है। किसी अच्छे एवं अद्भुत कार्य का प्रतिनिधित्व एवं उसकी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्यता इस पुरस्कार की अनिवार्यता एवं आधार है। लेकिन पिछले कुछ समय से नोबेल पुरस्कार विजेता आर.के.पचौरी, कैलाश सत्यार्थी, अमत्र्य सेन एवं मदर टेरेसा केवल भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में कई विवादास्पद वजहों के कारण खबरों में बने हुए हैं।
प्रख्यात पर्यावरणविद् एवं नोबेल पुरस्कार विजेता तथा द इनर्जी एण्ड रिर्सोस इन्स्टीट्यूट (टेरी) के महानिदेशक आर.के.पचौरी के खिलाफ संस्थान की ही एक युवती ने ई-मेल तथा व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक मैसेज भेजने एवं उत्पीड़न का आरोप लगाया है। दिल्ली के एक पुलिस थाने ने आर.के.पचौरी के खिलाफ एफ.आई.आर भी दर्ज कर ली है। मार्च 07-08, 2015 को हार्वर्ड विश्वविद्यालय में आयोजित होने वाली एक कान्फ्रेन्स में आर.के.पचौरी को आमंत्रित किया गया था, लेकिन इस घटनाक्रम के बाद हार्वर्ड विश्वविद्यालय ने श्री आर.के.पचौरी को भेजा गया अपना निमंत्रण वापस ले लिया है।
दूसरे नोबेल विजेता कैलाश सत्यार्थी अपने चेरिटेबल ट्रस्ट मुक्ति प्रतिष्ठान के रिकार्ड गायब होने को लेकर चर्चा में हैं। कैलाश सत्यार्थी एवं उनकी पत्नी सुमेधा पर ट्रस्ट के पैसे के दुरूपयोग का आरोप है। इन पर आरोप लगाया गया है कि इन्होंने ट्रस्ट के फण्ड के इस्तेमाल में अनियमिततायें कर विदेश यात्रायें की हैं एवं कई अन्य सुविधाओं पर भी इनके द्वारा फण्ड का पैसा खर्च किया गया है। ट्रस्ट के गायब रिकार्ड के बारे में कैलाश सत्यार्थी एवं उनकी पत्नी से पूछताछ की जा रही है।
तीसरे नोबेल पुरस्कार विजेता अमत्र्य सेन हैं, जो नालन्दा विश्वविद्यालय के चांसलर के पद को लेकर चर्चा में हैं। अमत्र्य सेन ने नालन्दा विश्वविद्यालय के गर्वनिंग बोर्ड को पत्र लिखकर कहा है कि सरकार नहीं चाहती है कि मैं इस पद पर आगे भी बना रहूं, इसलिए मैं यहां नहीं रह सकता। पत्र में उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताया है कि आज भी देश के शिक्षण संस्थान सरकार के इशारों पर काम करते हैं। अमत्र्य सेन ने 2014 में चुनाव अभियान के दौरान नरेन्द्र मोदी का विरोध किया था। भाजपा नेता सुब्रहण्यम स्वामी ने अमत्र्य सेन पर कई तरह की आर्थिक अनियमितता का आरोप लगाया है एवं उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की मांग की है।
चौथी नोबेल पुरस्कार विजेता मदर टेरेसा हैं, जिनके बारे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सर संघचालक श्री मोहन भागवत द्वारा की गई टिप्पणी को गलत तरीके से लेने के कारण विवाद उत्पन्न हो गया है। संभवतया श्री भागवत ने मदर टेरेसा द्वारा की गई सेवा पर अंगुली नहीं उठाई है, बल्कि शायद उन्होंने यह कहने की कोशिश की है कि यदि सेवा किसी दूसरे उद्देश्य को ध्यान में रखकर की जाती है तो उसका मूल्य कम हो जाता है। इसके बाद दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल ने न्यायाधीश की तरह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को नसीहत एवं मदर टेरेसा को प्रमाण पत्र इस आधार पर जारी कर दिया है कि मदर टेरेसा के साथ उन्होंने काम किया है।
उपर्युक्त प्रकरणों में गहन जांच की आवश्यकता है। आरोप चाहे इन नोबेल पुरस्कार विजेताओं पर लगाये गये हों अथवा इनके द्वारा लगाये गये हों – दोनों ही स्थितियों में दुनिया के सामने सच्चाई उजागर होना बहुत ही जरूरी है, क्योंकि चर्चा के केन्द्र में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ माने जाने वाले लोग हैं। यह तो जाॅंच के बाद ही स्पष्ट होगा कि इन पर लगाये गये आरोप गलत हैं अथवा इनके द्वारा लगाये गये आरोप। पिछले कुछ समय से ख्याति प्राप्त एवं प्रतिष्ठित व्यक्तियों का विवादों में आना चिन्ता का विषय है। ऐसे विवादों में किस तरह से कमी लाई जा सकती है, हमें इस ओर भी ध्यान देना होगा। वर्तमान में लागू एवं प्रचलित कानूनों एवं नियमों पर पुनर्विचार एवं इनकी पुर्नव्याख्या भी की जा सकती है।

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