लेख संवैधानिक मूल्य : गणतंत्र की आत्मा और नागरिक दायित्व January 25, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment 26 जनवरी गणतंत्र दिवस बाबूलाल नागा भारतीय संविधान केवल शासन चलाने का दस्तावेज नहीं, बल्कि एक जीवंत दर्शन है जो देश की आत्मा, उसकी चेतना और दिशा—तीनों को परिभाषित करता है। संविधान की उद्देशिका में निहित स्वतंत्रता, समता, समानता, बंधुता, संप्रभुता, समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र जैसे मूल्य पूरे संविधान की वैचारिक रीढ़ हैं। ये मूल्य “हम भारत के लोग” द्वारा स्वयं को दी गई वह सामूहिक प्रतिबद्धता हैं जो प्रत्येक नागरिक को अधिकारों के साथ-साथ कर्तव्यों का भी निरंतर स्मरण कराती है। संविधान का सच्चा सम्मान केवल औपचारिक आयोजनों से नहीं, बल्कि इन मूल्यों को अपने व्यवहार और सार्वजनिक जीवन में उतारने से होता है। भारत 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस की 77वीं वर्षगांठ मना रहा है। 26 नवंबर 1949 को संविधान सभा द्वारा भारतीय संविधान को अंगीकार किया गया और 26 जनवरी 1950 को इसे देश की शासन व्यवस्था के रूप में लागू किया गया। यह वही ऐतिहासिक क्षण था, जब भारत औपनिवेशिक शासन की छाया से बाहर निकलकर एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य के रूप […] Read more » 26 जनवरी गणतंत्र दिवस
महिला-जगत लेख सम्मान, सुरक्षा और समानता का सवाल January 23, 2026 / January 23, 2026 | Leave a Comment भारत में विकास और समानता की चर्चा तब तक अधूरी मानी जाती है जब तक उसमें बालिकाओं की स्थिति का ईमानदार मूल्यांकन न हो। 23 जनवरी को मनाया जाने वाला राष्ट्रीय बालिका दिवस इसी मूल्यांकन Read more » राष्ट्रीय बालिका दिवस
लेख लोकतंत्र की असली ताकत: जागरूक मतदाता January 23, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment राष्ट्रीय मतदाता दिवस Read more » 25 जनवरी राष्ट्रीय मतदाता दिवस जागरूक मतदाता लोकतंत्र की असली ताकत
महत्वपूर्ण लेख राजनीति राष्ट्र की सुरक्षा, संप्रभुता और आत्मसम्मान की अडिग प्रहरी January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment भारतीय सेना देश की सीमाओं की रक्षा करने वाली सबसे विश्वसनीय और संगठित संस्थाओं में से एक है। उत्तर में हिमालय की बर्फीली चोटियों से लेकर पश्चिम के रेगिस्तानी क्षेत्रों और पूर्वोत्तर के दुर्गम पहाड़ी इलाकों तक, भारतीय सैनिक कठिनतम परिस्थितियों में तैनात रहते हैं। अत्यधिक ठंड, भीषण गर्मी, दुर्गम भौगोलिक स्थिति Read more » 15 जनवरी: भारतीय सेना दिवस Indian Army Day January 15: Indian Army Day भारतीय सेना दिवस
खान-पान धर्म-अध्यात्म लोक पर्वों में समता का उत्सव: मकर संक्रांति January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment मकर संक्रांति केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय समाज की सामूहिक चेतना, कृषि संस्कृति और सामाजिक समता का प्रतीक है। यह त्योहार सूर्य के उत्तरायण होने का उत्सव है, जो अंधकार से प्रकाश, ठंड से ऊष्मा और निराशा से आशा की ओर बढ़ने का संकेत देता है। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में मकर संक्रांति अलग- Read more » मकर संक्रांति
खान-पान मासूमों का बचपन जंक फूड के हवाले क्यों ? January 6, 2026 / January 6, 2026 | Leave a Comment अहाना की मौत कोई साधारण हादसा नहीं है बल्कि यह उस खामोश महामारी का प्रतीक है जो आज हमारे घरों, स्कूलों और बाजारों में खुलेआम पल रही है—जंक फूड। चमकदार पैकेटों, आकर्षक विज्ञापनों और “टेस्टी” के नाम पर परोसे जा रहे जहर ने एक मासूम जिंदगी छीन ली। यह घटना केवल एक परिवार का निजी दुख नहीं बल्कि पूरे समाज, नीति-निर्माताओं और व्यवस्था के मुंह पर करारा तमाचा है। Read more » Why should the childhood of innocent children be given to junk food बचपन जंक फूड के हवाले
राजनीति विधि-कानून उन्नाव रेप केसः न्याय, सत्ता और कानून की कसौटी पर सुप्रीम कोर्ट की दखल January 2, 2026 / January 2, 2026 | Leave a Comment उन्नाव की पीड़िता की कहानी केवल एक अपराध की दास्तान नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां सत्ता, भय और दबाव के बीच न्याय की राह अत्यंत कठिन हो जाती है। एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार, उसके परिवार पर लगातार हमले, पीड़िता के पिता की हिरासत में संदिग्ध मौत और गवाहों को डराने की घटनाओं ने इस केस को Read more » power and law Unnao Rape Case: Supreme Court's intervention on the touchstone of justice उन्नाव रेप केसः
लेख नववर्ष का संकल्प: समतामूलक समाज की ओर कदम December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्ममंथन, आत्मसमीक्षा और नए संकल्पों का अवसर होता है। हर नया साल हमें यह सोचने का मौका देता है कि बीते समय Read more » नववर्ष का संकल्प
लेख नववर्ष का संकल्प: समतामूलक समाज की ओर कदम December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment आज जब समाज अनेक तरह की चुनौतियों—असमानता, भेदभाव, जातिवाद, सांप्रदायिकता और सामाजिक विघटन—से जूझ रहा है, तब नववर्ष पर समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लेना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। ऐसा समाज, जहां व्यक्ति की पहचान उसकी जाति, धर्म, भाषा या वर्ग से नहीं बल्कि उसकी मानवता से हो. जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले—यही एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। Read more » नववर्ष का संकल्प
राजनीति कटघरे में सियासतः विधायक निधि या वसूली निधि? December 16, 2025 / December 16, 2025 | Leave a Comment बाबूलाल नागा राजस्थान की राजनीति एक बार फिर उस सवाल के कटघरे में खड़ी है जो भारतीय लोकतंत्र को भीतर से खोखला करता रहा है – क्या जनप्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए चुने जाते हैं या सत्ता को निजी कमाई का साधन बनाने के लिए? जनता के विकास के लिए बनी विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि […] Read more » विधायक निधि या वसूली निधि
लेख मानवाधिकार दिवस: संकल्प समानता, न्याय और गरिमा का December 10, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment यह दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की याद में मनाया जाता है, जिसने पहली बार पूरी दुनिया के सामने यह सिद्धांत रखा कि अधिकार किसी सरकार की देन नहीं, बल्कि हर इंसान का जन्मसिद्ध हक हैं। 10 दिसंबर 1948 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों Read more » international human rights day मानवाधिकार दिवस