राजनीति विधि-कानून उन्नाव रेप केसः न्याय, सत्ता और कानून की कसौटी पर सुप्रीम कोर्ट की दखल January 2, 2026 / January 2, 2026 | Leave a Comment उन्नाव की पीड़िता की कहानी केवल एक अपराध की दास्तान नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां सत्ता, भय और दबाव के बीच न्याय की राह अत्यंत कठिन हो जाती है। एक नाबालिग लड़की के साथ बलात्कार, उसके परिवार पर लगातार हमले, पीड़िता के पिता की हिरासत में संदिग्ध मौत और गवाहों को डराने की घटनाओं ने इस केस को Read more » power and law Unnao Rape Case: Supreme Court's intervention on the touchstone of justice उन्नाव रेप केसः
लेख नववर्ष का संकल्प: समतामूलक समाज की ओर कदम December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment नववर्ष केवल कैलेंडर की तारीख बदलने का नाम नहीं है बल्कि यह आत्ममंथन, आत्मसमीक्षा और नए संकल्पों का अवसर होता है। हर नया साल हमें यह सोचने का मौका देता है कि बीते समय Read more » नववर्ष का संकल्प
लेख नववर्ष का संकल्प: समतामूलक समाज की ओर कदम December 30, 2025 / December 30, 2025 | Leave a Comment आज जब समाज अनेक तरह की चुनौतियों—असमानता, भेदभाव, जातिवाद, सांप्रदायिकता और सामाजिक विघटन—से जूझ रहा है, तब नववर्ष पर समतामूलक समाज के निर्माण का संकल्प लेना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है। ऐसा समाज, जहां व्यक्ति की पहचान उसकी जाति, धर्म, भाषा या वर्ग से नहीं बल्कि उसकी मानवता से हो. जहां हर नागरिक को समान अवसर, सम्मान और न्याय मिले—यही एक सशक्त लोकतंत्र की पहचान है। Read more » नववर्ष का संकल्प
राजनीति कटघरे में सियासतः विधायक निधि या वसूली निधि? December 16, 2025 / December 16, 2025 | Leave a Comment बाबूलाल नागा राजस्थान की राजनीति एक बार फिर उस सवाल के कटघरे में खड़ी है जो भारतीय लोकतंत्र को भीतर से खोखला करता रहा है – क्या जनप्रतिनिधि जनता की सेवा के लिए चुने जाते हैं या सत्ता को निजी कमाई का साधन बनाने के लिए? जनता के विकास के लिए बनी विधायक स्थानीय क्षेत्र विकास निधि […] Read more » विधायक निधि या वसूली निधि
लेख मानवाधिकार दिवस: संकल्प समानता, न्याय और गरिमा का December 10, 2025 / December 17, 2025 | Leave a Comment यह दिन 1948 में संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित मानवाधिकारों की सार्वभौम घोषणा की याद में मनाया जाता है, जिसने पहली बार पूरी दुनिया के सामने यह सिद्धांत रखा कि अधिकार किसी सरकार की देन नहीं, बल्कि हर इंसान का जन्मसिद्ध हक हैं। 10 दिसंबर 1948 को पहली बार संयुक्त राष्ट्र संघ ने मानवाधिकारों Read more » international human rights day मानवाधिकार दिवस