लेख बेरोज़गारी पलायन को मजबूर कर रहा है February 20, 2024 / February 22, 2024 | Leave a Comment पूनम नायकबीकानेर, राजस्थान “हम बहुत गरीब हैं, ऊपर से कोई स्थाई रोजगार भी नहीं है. मुझे कभी कभी दैनिक मज़दूरी मिल जाती है और कई बार तो हफ़्तों नहीं मिलती है. मेरी पत्नी लोगों के घरों में जाकर काम करती है. उसी से अभी घर का किसी प्रकार गुजारा चल रहा है. ऐसा लगता है कि बेरोजगारी […] Read more » बेरोज़गारी पलायन को मजबूर कर रहा है
लेख बंदरों के आतंक से प्रभावित होती कृषि February 19, 2024 / February 19, 2024 | Leave a Comment सपनाकपकोट, बागेश्वरउत्तराखंड “बंदरों की बढ़ती संख्या से हमारे खेती सबसे अधिक प्रभावित हो रही है। कहा जाए तो बिल्कुल नष्ट होने की कगार पर है। हम जो भी सब्जियां लगाते हैं बंदर आकर सब कुछ नष्ट कर देते हैं। कई बार अगर आंगन में मैं अपने बच्चों को अकेले छोड़ देती हूं तो बंदर आ […] Read more » Agriculture affected by monkey terror
कविता फूलों जैसी कली है बेटी February 17, 2024 / February 17, 2024 | Leave a Comment प्रियंका कोशियारी कपकोट, उत्तराखंड फूलों जैसी कली है बेटी। तितली जैसी उड़ान है उसकी। कर सकती है वो भी सबकुछ। अपने पिता की शान है वो। मेहंदी के रंग के बदले। हाथों में होगी कलम उसके।। ना बांधो यूं ज़ंजीरों में उसको। तोड़ दो सारे बंधन उसके।। साक्षरता का दीप जलाकर। अंधियारा वह दूर भगाएगी।। न […] Read more » फूलों जैसी कली है बेटी
कविता वे दिन थे मेरे लिए बेहद खास February 17, 2024 / February 17, 2024 | Leave a Comment करीना थायत कक्षा-9 गरुड़, उत्तराखंड वे भी दिन थे मेरे लिए बेहद खास। जब खेलने का था मुझको अहसास।। अब तो जिंदगी से है यही आस। दोबारा खेलने का मौका आए मेरे पास।। न थी चिंता, न थी कोई फिक्र। बस याद आ रहे हैं खेलकूद के दिन। जब खेलते हैं बच्चे सारे दिन। याद […] Read more » Those days were very special for me
लेख बेरोजगारी के कारण अभाव में जीते ग्रामीण February 16, 2024 / February 16, 2024 | Leave a Comment पुष्पा / मीनाक्षीबागेश्वर, उत्तराखंड“स्कूल में अपनी सहेलियों को देखकर मुझे भी मनपसंद खाने और कपड़े खरीदने का मन करता है, लेकिन मुझे अपनी इच्छाओं को दबाना पड़ता है, क्योंकि मेरे माता पिता के पास कोई बेहतर रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं हैं. ऐसे में वो हमें ये सभी चीजें कहां से दिलाएगें? पिता जी ने 12वीं […] Read more » Villagers living in poverty due to unemployment
लेख युवा नौकरी देने वाला क्यों न बनें? February 8, 2024 / February 8, 2024 | Leave a Comment सुहैल अलीपुंछ, जम्मू समय के साथ साथ इंसान ने ऐसी चीजें खोज ली हैं जो हर संभव सफलता हासिल कर उसके जीवन को आसान बना रही है. इसमें विज्ञान और टेक्नोलॉजी का सबसे बड़ा योगदान है. इसकी मदद से आज इंसान दुनिया के एक कोने से बैठकर किसी भी कोने में आसानी से लोगों से बात […] Read more » Why not become a youth employer युवा नौकरी देने वाला क्यों न बनें
लेख अब सशक्त हो रही हैं ग्रामीण किशोरियां February 7, 2024 / February 7, 2024 | Leave a Comment हेमा रावलगनीगांव, उत्तराखंड कुछ साल पहले तक उत्तराखंड के जिन गांवों की किशोरियां 8वीं या बहुत ज्यादा 10वीं तक ही पढ़ा करती थी. जिन्हें लगता था कि वह पढ़ाई करके भी क्या कर सकती हैं? आज उसी गांव की लड़कियां न केवल 10वीं से आगे कॉलेज की पढ़ाई कर रही हैं बल्कि हर क्षेत्र में […] Read more » Now rural girls are becoming empowered
लेख लैंगिक भेदभाव से मुक्त नहीं हुआ ग्रामीण समाज February 6, 2024 / February 6, 2024 | Leave a Comment सीमा कुमारीगया, बिहार“दीदी, हमको भी पढ़ने का बहुत मन करता है. लेकिन मम्मी-पापा स्कूल जाने नहीं देते हैं, कहते हैं पढ़ कर का करेगी. चूल्हा-चौका सीख लेगी तो ससुराल में काम आएगा. घर का काम नहीं सीखेगी तो ससुराल वाले हमें बुरा कहेंगे. आप बताइए दीदी, क्या हम लड़कियों का जन्म खाली (केवल) ससुराल की सेवा […] Read more » लैंगिक भेदभाव से मुक्त नहीं हुआ ग्रामीण समाज
लेख सोशल मीडिया पर सहज होती महिलाएं February 6, 2024 / February 6, 2024 | Leave a Comment ज्योतिदिल्ली पूजा, एक 31 वर्षीय महिला है. वह दिल्ली के उत्तम नगर इलाके में अपने पति और दो पुत्रों के साथ किराए के मकान में रहती है. उसकी इच्छा थी कि वह एक स्वतंत्र और आत्मनिर्भर महिला बने. उन्होंने 4 साल पहले सिलाई सीखी और अब वह इसे घर के कामों के साथ-साथ आत्मनिर्भरता की […] Read more » Social Media
खेल जगत मनोरंजन बिहार : गांव की लड़कियों ने रग्बी फुटबॉल में बनाई पहचान February 5, 2024 / February 5, 2024 | Leave a Comment डॉ. संतोष सारंगमुजफ्फरपुर, बिहार “सयानी लड़की होकर लड़कों के साथ हाफ पैंट पहनकर ग्राउंड में खेलती है, न इसको शर्म आती है और न इसके मां-बाप को!” इस तरह की न जाने कितनी फब्तियां और अनर्गल बातों के व्यंग्य बाण झेलने पड़े हैं 19 साल की सपना को. बिहार के मुजफ्फरपुर जिला स्थित तुर्की ब्लॉक […] Read more »
लेख पशु प्रधान देश में पशुओं के लिए सुविधाओं का अभाव February 1, 2024 / February 1, 2024 | Leave a Comment प्रतिभा लूणकरणसर, राजस्थान भारत को कृषि और पशु प्रधान देश माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी पशु का काफी महत्त्व है. विशेषकर गाय, बैल और बकरी जैसे जानवरों का काफी महत्त्व है. इनमें गाय का विशेष स्थान है. यह न केवल दूध देती है बल्कि यह पूजनीय भी है. हमारे देश में गाय को […] Read more » Lack of facilities for animals in an animal-oriented country पशुओं के लिए सुविधाओं का अभाव
लेख क्या सड़क की ज़रूरत केवल शहरों को है? February 1, 2024 / February 1, 2024 | Leave a Comment अंजू नायकबीकानेर, राजस्थान हमारे देश की अर्थव्यवस्था मुख्यतः ग्रामीण क्षेत्रों पर निर्भर करती है। आज भी देश की 74 प्रतिशत आबादी यहीं से है। लेकिन इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्र आज भी कई प्रकार की बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। इनमें सड़क की समस्या भी अहम है। कुछ दशक पूर्व देश के ग्रामीण क्षेत्रों के सड़कों […] Read more » सड़क की ज़रूरत केवल शहरों को