लेखक परिचय

चरखा फिचर्स

चरखा फिचर्स

जल से जीवन अस्त व्यस्त है

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संकट में है मांजरकूद गांव उमेन्द्र सागर, जल ही जीवन है यह कहावत तो हमने कई बार सुनी है पर जब जल ही मुसीबत बन जाए तो क्या करें? यह प्रश्न उन हजारों लोगों का है। जो जल तांडव के प्रकोप को झेलते रहते हैं| पिछले दिनों देश के कई हिस्सों में आने वाली बाढ़… Read more »

परंपरागत खेती से दूर होते लद्दाख के किसान

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अंज़ारा अंजुम खान लद्दाख याक की तरह ही गाय की नस्लों में से एक डज़ो लद्दाख जैसे संवेदनशील क्षेत्र में कृषि के लिए हमेशा से उपयुक्त माना जाता था। यह 9800 फीट की उंचाई तक और ठंड में आसानी से खेत जोत सकता है। यही कारण है कि इसे खेती के लिए सस्ता और सुविधाजनक विकल्प माना… Read more »



सफाई कर्मचारी की असुरक्षित जीवन-शैली

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कोई अन्य नौकरी नही देगा हम शापित हैं। दिल्ली शहर की घनी आबादी के बीच ओखला के एक कमरे के घर में 25 साल का रंजीत अपने मां-बाप पत्नी और एक बेटी के साथ रहता है। उसकी शादी को दो साल हुए हैं। वह उन लोगों में से एक है, जो जीवित रहने के लिए… Read more »

गृहणी से उद्धयमी बनी गीता देवी

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सरस्वती अग्रवाल “व्यवसाय करने के लिए ज़्यादा पढ़ा लिखा होना जरुरी नही है बल्कि रुची होना ज़रुरी है” ये वाक्य है उत्तराखण्ड़ राज्य जनपद चमोली ग्राम भटोली के एक साधारण परिवार की गृहणी गीता देवी का  जिन्होने केवल 5वीं तक शिक्षा ग्रहण की है। बावजुद इसके वो एक सफल उद्धमी हैं और हर महीने 3500 से 4000 तक… Read more »

पलायन को आईना दिखाती पहाड़ की महिला

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पंकज सिंह बिष्ट आज जहाँ एक तरफ पहाड़ के लिए पलायन श्राप बना हुआ है। जिसे रोकना सरकार के लिए एक चुनौती है। ऐसे में इसी पहाड़ की महिलायें अपना उद्यम स्थापित कर स्वरोजगार को अपना रही हैं। यह उन युवाओं को भी एक नई राह और एक नई दिशा दिखाने का काम कर रही… Read more »

शुद्ध पियो शुद्ध जियो

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सरस्वती अग्रवाल “शद्ध पियो- शुद्ध जियो” ये लाईन किसी उत्पाद के विज्ञापन की नही बल्कि ये वाक्य है उत्तराखण्ड के राज्य जनपद चमोली के गडोरा गांव के 38 वर्षिय निवासी लक्ष्मण सिंह का। जो फलो का जूस बेचकर परिवार चला रहे हैं। इन्होने 12वीं तक पढ़ाई की है। 3 बेटियों- एक बेटे तथा पत्नी को मिलाकर परिवार… Read more »

बीड़ी ही बना जीने का सहारा।

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निकहत प्रवीन बड़ा बेटा उसके बगल में बैठा था और छोटे बेटे को गोद में लिए, सिर झुकाए वो लगातार बीड़ी बनाए जा रही थी। आप कब  से इस काम को कर रही हैं? और कोई काम क्यों नही करती? कई बार पूछने पर उसने डबडबाती आंखो और लड़खड़ाती जुबान से जवाब दिया “बचपन से”। ये कहानी है बिहार… Read more »

इन्ही हाथों से तकदीर बना लेंगे

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मोहम्मद अनीस उर रहमान खान असफल और मेहनत से परहेज़ करने वाले लोगों के मुंह से सामान्यता: यह वाक्य सुना जाता है कि “भाग्य में ही लिखा था तो क्या करें”। लेकिन समय बदल रहा है और यह वाक्य भी व्यर्थ होता नजर आता है क्योंकि अब लोगों ने अपनी किस्मत पर कम और मेहनत पर अधिक  भरोसा करना… Read more »

पर्वतीय किसानों की दयनीय हालत

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एक अन्य स्थानीय किसान उपयुक्त बातों का समर्थन करते हुए कहते है की“ इस प्रथा ने वास्तव में किसान को एक लत लगा दी है, की वह खुद को आत्मनिर्भर नहीं बना पा रहा है । अपने उत्पाद को मंडी में बेचने और ग्रेडिंग करने की जानकारी न होने के कारण किसान अपने उत्पाद को वह कीमत नहीं दिला पाता जो वास्तव में इसे मिलनी चाहिए। हम अपने उत्पादन को उचित मूल्य न मिलने के कारण पेड़ों में ही गलने को छोड़ देते है, क्योंकि अगर वह उसे मंडी भेजता है तो फलों की कीमत तो मिलनी नहीं है, किराया अलग से बोझ बनेगा।

बेटी ने बदला परिवार का जीवन

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पवन वैष्णव किसानों का देश कहा जाने वाला भारत, जहाँ देश का अन्नदाता आज खुद अन्न को तरस रहा है और बदहाल जीवन जी रहा है। बीते कुछ दिनों में किसानों की आत्महत्या के बहुत से मामले सामने आए हैं। किसानों की आत्महत्या की अहम वजह उनका बढ़ता कर्ज़, गरीबी और भुखमरी है। एक ओर… Read more »