राजनीति संघ का लक्ष्य परमवैभवशाली भारत की स्थापना May 15, 2026 / May 15, 2026 | Leave a Comment संघ का उद्देश्य “परम वैभवशाली भारत की स्थापना है।” संघ का संकल्प आगामी वर्षों में “संगठित हिंदू समाज” को “और ज्यादा” मजबूत करना है। यह अपने संरचनात्मक कार्यक्रमों को Read more » परमवैभवशाली भारत की स्थापना
राजनीति राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से घबराहट के मायने! March 30, 2026 / March 30, 2026 | Leave a Comment यूनाइटेड स्टेट्स कमिशन ऑन इंटरनेशनल रिलिजियस फ्रीडम एक स्वतंत्र आयोग एवं सरकारी अभिकरण है जिसमें संयुक्त राज्य अमेरिका के दोनों राजनीतिक दलों Read more » Meaning of fear of Rashtriya Swayamsevak Sangh राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से घबराहट
विश्ववार्ता भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : सामयिक मूल्यांकन February 22, 2026 / February 22, 2026 | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पाण्डेय भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित व्यापार समझौता लगभग ग्यारह महीनों तक चले कूटनीतिक तनाव और अनिश्चितता के बाद सामने आया है। इस अवधि में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध पिछले दो दशकों में अपने न्यूनतम स्तर पर पहुँच गए थे। ऐसे परिदृश्य में यह समझौता केवल व्यापारिक […] Read more » भारत–अमेरिका व्यापार समझौता
राजनीति विकसित @2047 के लिए युवा January 16, 2026 / January 16, 2026 | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडे विकसित भारत की संकल्पना युवाओं के रचनात्मक कार्य क्षमता एवं रचनात्मक संरचनात्मक ऊर्जा से ही संभव है । भारतवर्ष वैश्विक स्तर पर सर्वाधिक युवा आबादी वाला राष्ट्र हैं जिसमें देश की 28.2% यानी 40 करोड़ आबादी ‘ 15- 29’ आयु – वर्ग की हैं । यह आयु – वर्ग नवाचार ,विकास, ग्राहय एवं अधिगम के लिए सर्वाधिक उपर्युक्त आयु होती है। राष्ट्र के इस ऊर्जावान युवा वर्ग में राष्ट्र के उत्थान एवं प्रत्येक भारतीयों के जीवनस्तर को गुणात्मक बनाए रखने की क्षमता, धारिता, और योग्यता होती है। युवाओं के सक्रिय भागीदारी एवं ऊर्जावान दक्षता से राष्ट्र को सामाजिक ,आर्थिक, एवं राजनीतिक(राजनैतिक) समृद्धि के लिए उत्प्रेरित करने की अनंत ,असीमित ,अपार एवं असीम क्षमता होती है। युवाओं को बौद्धिक ईमानदारी, सामाजिक समावेशिता, राष्ट्रीय जिम्मेदारी एवं राष्ट्रीय मूल्यों को अपने जीवन का आधार बनाना चाहिए। इनके शिक्षा का उद्देश्य ‘ आत्मनिर्भर’ बनना है। युवाओं की संकल्प, संकल्पित क्षमता, ऊर्जा एवं नवाचार के द्वारा “विकसित भारत @2047” को प्राप्त कर लेंगे। भारत के युवाओं में इस संकल्प को साकार करने की असीमित क्षमता है। देश के युवाओं में सांस्कृतिक अभिव्यक्ति एवं बौद्धिक विमर्श का जीवंत क्षमता है। विकसित भारत के निर्माण के प्रति युवाओं की प्रतिबद्धता एवं समर्पण असाधारण हैं। नवीन विचारों को ग्राह्म करने की युवाओं में अपार संभावनाएं और लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए युवा शक्ति समर्पित है। विश्वविद्यालयों,महाविद्यालयों, कॉलेजों, एवं स्कूलों में ‘ युवा संगम ‘,’ विमर्श संगोष्ठी’ ,’ व्याख्यान श्रृंखलाएं’ एवं ‘ नेतृत्व क्षमता अभ्यास कार्यक्रम ‘ होने से युवाओं में अभिप्रेरणा ,उनमें इन कार्यक्रमों के प्रति मनोबल, ऐसे व्याख्याताओं की तरह बनने की ललक एवं नेतृत्व क्षमता अभ्यास के द्वारा व्यक्तित्व- निर्माण के लिए अपार संभावनाएं होती हैं जो युवाओं के ऊर्जा को बौद्धिक क्षितिजीकरण करके चरित्र – निर्माण ,व्यक्ति – निर्माण एवं राष्ट्र- निर्माण में प्रेरित करते हैं। इन सकारात्मक प्रयासों के संकलित प्रभाव से युवाओं में विकास भावना को उन्नयन करने में सहयोग ली जा रही है जो भविष्य में एक प्रकार से सतत विकास की मानवीय पूंजी सृजित करता है। इन शैक्षणिक निकायों से ऊर्जावान उद्दीपक निकालकर समाज, राज्य ,एवं राष्ट्र में सकारात्मक योगदान करते हैं । भारत असीम, अपार, एवं असीमित संभावनाओं का राष्ट्र हैं,जिससे समय-समय पर ऊर्जावान नेतृत्व निकलते हैं, जो देश एवं काल में राष्ट्र में महनीय भूमिका निभाते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में युवा प्रतिभाओं को विकसित भारत के निर्माण में सहयोग के लिए प्रेरित करके उनके ऊर्जा का सदुपयोग किया जा सकता है। युवाओं की नेतृत्व एवं भागीदारी समाज के विकास व राष्ट्र – निर्माण में सक्रिय सहभागिता एवं लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को उन्नयन करने के लिए अतिमहत्वपूर्ण होती है। युवा नवीनता एवं परिवर्तन की अत्यधिक ऊर्जा रखते हैं जिससे सामाजिक समस्याओं के समाधान, सामाजिक समस्याओं के समाधान के वाहक, सामाजिक परिवर्तन के चालक एवं प्रेरणादायक व प्रभावशाली भूमिका प्रदान करते हैं। भारत के युवा आबादी भारत की बड़ी मानवशक्ति हैं, जो समस्याओं के समाधान के प्रति नवोन्मेष दृष्टि अपनाते हैं। युवाओं के भीतर उत्साह व कार्य करने का जुनून होता है, उनके भीतर परिश्रम करने की क्षमता होती है, सपने साकार करने का मनोबल होता है। उनके कार्य के परिणाम से मिली सफलता देश की सफलता होती है। देश ने विगत 11 वर्षों से “विकसित भारत @2047″का संकल्प लिया है। इसकी संपूर्ति में सबसे ज्यादा योगदान युवाओं की है। युवाओं का सशक्तिकरण विकसित भारत की प्राथमिकता है। 2024 में देश में विश्वविद्यालयों की संख्या 1213 हो गई है। यह विस्तार राष्ट्रीय शिक्षा नीति- 2020 के बेहतर एवं गुणात्मक क्रियान्वयन के लिए हुआ है। उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या 59000 हो गई है जिससे अधिकांश युवाओं को बेहतर भविष्य के लिए बेहतरीन संस्थाएं उपलब्ध हो रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में चिकित्सा शिक्षा में बेहतर प्रदर्शन हुआ है । मेडिकल कालेजों की संख्या 387 से बढ़कर 780 हो गई है और मेडिकल सीटों में 130% की वृद्धि हुई है। आईआईटी और आईआईएम की संख्या भी क्रमशः 23 एवं 20 हो गए हैं जिससे शीर्ष स्तर की शिक्षा तक पहुंच सरल हो गया है। इस तीव्र बदलाव का परिणाम हुआ है कि नूतन पीढ़ी के तकनीशियन ,प्रबंधन विशेषज्ञ और चिकित्सा विशेषज्ञ प्राप्त हुए हैं जो राष्ट्र की सेवा लगन से कर रहे हैं । भारतीय विश्वविद्यालय QS रैंकिंग में उच्च स्थान प्राप्त कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर भारतीय युवा वैज्ञानिकों ने नवोन्मेष व विकास में नूतन योगदान दे रहे हैं। अद्यतन में कानपुर आईआईटी के युवा वैज्ञानिकों ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में वायु प्रदूषण की समस्या से निजात के लिए महत्वपूर्ण एवं ऊर्जावान प्रयास करके समस्या के समाधान की दिशा में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं। अतीत से वर्तमान समय तक युवाओं ने सामाजिक जिम्मेदारी की भूमिका में सक्रिय सहयोग दिया है। युवा देश के विकास में ईमानदारी से कार्य कर रहे है जो देश के विकास में उनकी भूमिका का संकलन है। युवाओं का इस समाज व देश के प्रति संकल्पित सामाजिक जिम्मेदारी है, जिनको संपूरित करना उनका नैतिक कर्तव्य है। नूतन ऊर्जा से भरा सकारात्मक चिंतन एवं चरित्रवान अवयव से देश को ऊंचाइयों तक ले जा रहे है। भारत में संयुक्त राज्य अमेरिका की संपूर्ण आबादी से ज्यादा युवा आबादी रहती है। युवा देश के ईमानदार प्रत्याशी चुनकर सभ्य नागरिक समाज के निर्माण में रचनात्मक भूमिका निभा सकते है। राष्ट्र- निर्माण में युवाओं की भूमिका सराहनीय एवं मूल्यवान रहा है। युवाओं का योगदान रोजगार के अवसरों का सदुपयोग करके भारत को वैश्विक स्तर पर एक कुशल राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में है। नूतन सोच व भरपूर ऊर्जा के साथ सामाजिक समस्याओं को हल करना, नवोन्मेष,नवाचार एवं तकनीकी कौशल का अनुप्रयोग करके समस्याओं का समाधान करना सामाजिक न्याय के लिए सक्रिय सहयोग करना है। लैंगिक विषमता को दूर करने में सक्रिय भूमिका निभाने एवं सामुदायिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से सहयोगी होना युवाओं के सामाजिक आभार का घटक है।भारत में नवाचार संस्कृति में गुणात्मक वृद्धि हुआ है। जुलाई, 2025 तक प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत लगभग 1.63 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है, जिसमें 45% महिलाएं भी हैं। इसके अंतर्गत डिजिटल कौशल, हरित तकनीकी, AI ,एवं रोबोटिक्स जैसे भविष्योन्मुखी क्षेत्रों पर जोर दिया गया है। इसका लक्ष्य है कि 2026 तक 4 करोड़ युवाओं को प्रशिक्षण देकर “आत्मनिर्भर भारत” निर्माण में सहयोग करना है। भारत के युवाओं ने अपने रचनात्मक ऊर्जा एवं कौशल से विकसित भारत के निर्माण में भूमिका निभा रहे हैं । इनकी भूमिका सामाजिक क्षेत्र ,राजनीतिक क्षेत्र,एवं अन्य क्षेत्रों में सराहनीय है। अपने शारीरिक परिश्रम एवं नवोन्मेषी सोच से विकसित भारत के स्वप्न को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका सिद्ध हो सकता है। लेखक सामयिक विषयों एवं इतिहास पर गंभीर पकड़ रखते हैं।इनका निम्न सुझाव है:- 1. युवाओं के भीतर नवोन्मेष,नवाचार एवं विकास के प्रति गंभीर अवधारणा होती है। 2. भारत में ‘ जेन जी’ अपने रचनात्मक ऊर्जा को संरचनात्मक पहलुओं में अनुप्रयोग कर रहे हैं। 3. युवा वर्ग अपने कार्यदाई क्षमता एवं पहलकारी कार्यों से भारत को नवीनता की ओर अग्रसर कर रहे हैं। 4. सामाजिक क्षेत्रों,आर्थिक क्षेत्रों एवं राजनीतिक क्षेत्रों में युवाओं का अवदान उच्चतर स्तर का है। डॉ. बालमुकुंद पांडे Read more » विकसित @2047 के लिए युवा
राजनीति वंदे मातरम् पर विमर्श ! December 12, 2025 / December 12, 2025 | Leave a Comment लगभग डेढ़ सौ वर्ष पहले जब भारत औपनिवेशिक दासता के अंधकार में डूबा हुआ था, तब बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने उपन्यास आनंदमठ में “वंदे मातरम्” की रचना की। Read more » Discussion on Vande Mataram वंदे मातरम् पर विमर्श
राजनीति चुनाव सुधारों को व्यापक परिप्रेक्ष्य में देखने की आवश्यकता December 12, 2025 / December 12, 2025 | Leave a Comment विगत दो दिनों से संसद के दोनों सदनों, लोकसभा (लोकप्रिय सदन/ निम्न सदन /जनता के सदन) एवं राज्यसभा (ऊपरी सदन/ राज्यों के सदन / पांडित्य सदन) में ' विशेष सघन पुनरीक्षण' (SIR) को लेकर गतिरोध उत्पन्न हुआ है। Read more » electoral reform चुनाव सुधार
राजनीति वर्तमान नेपाल के समक्ष चुनौतियां एवं समाधान September 19, 2025 / September 20, 2025 | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पांडे सन् 1997 से सन् 2012 के मध्य पैदा हुए लोगों को ‘ जेन जी’ या ‘ जेनरेशन ज़ूमर ‘ कहा जाता है। यह पीढ़ी उस दौर में पैदा हुई जब इंटरनेट का प्रभाव बहुत ज्यादा बढ़ गया था। ये युवा बड़े होकर सामाजिक प्लेटफार्मों पर अत्यधिक सक्रिय होकर अपने करियर, पेशा , अन्य […] Read more » Challenges and solutions facing present-day Nepal नेपाल के समक्ष चुनौतियां
लेख जनसंख्या असंतुलन : खतरनाक स्थिति September 8, 2025 / September 8, 2025 | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडे जनसंख्या देश की सबसे बड़ी पूंजी हैं क्योंकि यही राज्य का तत्व श्रम शक्ति, प्रतिभा एवं विकास की नींव होती है। जब जनसंख्या असंतुलन की स्थिति में पहुंच जाती है तो यह जनशक्ति देश के लिए अभिशाप एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के समक्ष संकट का आकार धारण कर लेती है। समकालीन में वैश्विक […] Read more » Population imbalance जनसंख्या असंतुलन
राजनीति विश्ववार्ता मालदीव के साथ प्रगाढ़ होते भारत के संबंध August 1, 2025 / August 1, 2025 | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पांडेय भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण एवं मधुर संबंध को बनाए रखने की प्राथमिकता दे रहे हैं । मोदी जी विगत जुलाई महीने में 25 एवं 26 को मालदीव की यात्रा पर गए थे। सामरिक एवं व्यापारिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण पड़ोसी, मालदीव अपने देश का 60वा स्वतंत्रता दिवस […] Read more » India's relations with Maldives are deepening मालदीव के साथ प्रगाढ़ होते भारत के संबंध
कला-संस्कृति वैश्विक समस्याओं का समाधान भारतीय चिंतन में ! July 29, 2025 / July 29, 2025 | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पांडेय संघ प्रमुख डॉ. मोहन भागवत वैश्विक समस्याओं का समाधान भारतीय चिंतन, विचार और अनुशासन में देख रहे हैं । भारत वैश्विक स्तर की प्राचीन सभ्यताओं में से एक है। भारत के पास समृद्ध सांस्कृतिक एवं नैतिक आधारित विश्व विरासत हैं जिसका अनुप्रयोग शांति, स्थिरता, स्थायित्व, सतत […] Read more » Solution to global problems lies in Indian thought!
राजनीति समावेशी शासन की प्राथमिकता July 11, 2025 / July 11, 2025 | Leave a Comment डॉ.बालमुकुंद पांडेय समावेशी शासन के लिए सरकार ने ‘ सेवा ,सुशासन एवं गरीब कल्याण’ के 11 वर्ष पूरे कर लिए हैं। यह 11 वर्ष गरीबों का कल्याण करने, मध्यम वर्ग को सुविधानुकूल वातावरण प्रदान करने, महिलाओं को सशक्त बनाने, किसानसमर्थक नीतियों को क्रियान्वित करने, देश के युवाओं को शैक्षणिक एवं रोजगारनुमुख माहौल देने, पड़ोसी देशों के साथ शांति, सहयोग ,स्थिरता एवं सौहार्द की नीति को क्रियान्वित करने ,वैश्विक पटल पर भारत […] Read more » समावेशी शासन की प्राथमिकता
राजनीति संविधान की प्रस्तावना में ‘समाजवादी ‘और ‘धर्मनिरपेक्ष ‘पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। July 2, 2025 / July 2, 2025 | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडेय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरकार्यवाह श्रीमान दत्तात्रेय होसवाले जी ने’ इमरजेंसी के 50 साल ‘ के कार्यक्रम में कहा कि ‘ समाजवादी’ और’ धर्मनिरपेक्ष ‘ शब्दों को आपातकाल के दौरान संविधान की प्रस्तावना में शामिल किया गया था । इन शब्दों को सत्ता की सुरक्षा के लिए शामिल किया गया था । […] Read more » समाजवादी और 'धर्मनिरपेक्ष संविधान की प्रस्तावना में 'समाजवादी 'और 'धर्मनिरपेक्ष 'पर पुनर्विचार