कला-संस्कृति भारत की विरासत इतिहास है April 17, 2025 / April 17, 2025 | Leave a Comment डॉ..बालमुकुंद पांडेय वैश्विक स्तर पर अक्षर ज्ञान के महान प्रणेता,महान अन्वेषक,महान दिव्यप्रकाश देवीत्यमान कर्मयोगी भगवान शिवजी हैं । तीनों लोकों में गीता – ज्ञान गुरु शिष्य परंपरा का स्रोत हैं और सांसारिक विषयों को जानने,समझने और उपर्युक्त परिस्थिति में क्रियान्वित करने का विधा है।गुरु शिष्य परंपरा नागरिक संस्कृति के लिए मानवीय समुदाय के लिए महती […] Read more » भारत की विरासत
राजनीति अगले 30 सालों में बांग्लादेश में कोई हिंदू नहीं बचेगा April 7, 2025 / April 7, 2025 | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडेय भारत का पूर्वी देश बांग्लादेश 1971 में बना था। तत्कालीन नवोदित राष्ट्र (विकासशील राज्य) के रूप में बांग्लादेश ‘ धर्मनिरपेक्ष’ राज्य ( देश ) था लेकिन 1975 में तत्कालीन बांग्लादेश की सरकार( सरकार पर कट्टरपंथियों का प्रत्यक्ष एवं सेना का भी प्रभुत्व था) […] Read more » अगले 30 सालों में बांग्लादेश में कोई हिंदू नहीं बचेगा
राजनीति भारतीय राष्ट्रबोध की अवधारणा एवं उसका प्रस्फुटन March 21, 2025 / March 21, 2025 | Leave a Comment डॉ. बालमुकुंद पांडेय राष्ट्र एक सांस्कृतिक संकल्पना है। राज्य ही राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया का मुख्य भाग होता हैं । राजनीतिक एकता उसके अस्तित्व की पहली आवश्यकता है . राष्ट्र के लिए भूमि, भाषा, धार्मिक एवं नस्ल की एकता का होना भी अति आवश्यक हैं । भारत […] Read more » The concept of Indian nationalism and its blossoming