विश्ववार्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इजरायल यात्रा के कूटनीतिक निहितार्थ February 27, 2026 / February 27, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजरायल यात्रा भारत-इजरायल संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जो वैश्विक भू-राजनीति में बदलते समीकरणों को दर्शाती है। यह यात्रा पश्चिम एशिया की अस्थिरता के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा देती है। इस बार मोदी ने इजरायल संसद केनेसेट को संबोधित किया, […] Read more » Prime Minister Narendra Modi's visit to Israel
विश्ववार्ता हेक्सागन गठबंधन के अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक मायने February 25, 2026 / February 25, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय इजरायल द्वारा प्रस्तावित “हेक्सागन गठबंधन” के अंतर्राष्ट्रीय मायने बेहद दिलचस्प हैं। यह अतिवादी ताकतों के विरूद्ध शक्ति संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। वास्तव में इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा प्रस्तावित यह गठबंधन एक ऐसा कूटनीतिक समूह है जिसमें भारत, अरब देश, अफ्रीकी राष्ट्र, ग्रीस, साइप्रस और अन्य एशियाई देश शामिल […] Read more » The international diplomatic implications of the Hexagon Alliance हेक्सागन गठबंधन
विश्ववार्ता आखिर सुन्नी ‘एक्सिस’ से कितनी प्रभावित होगी अरब-खाड़ी देशों और भारत की रणनीति? February 23, 2026 / February 23, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय देश-दुनिया में अमेरिकी वर्चस्व को चुनौती देने के लिए, उसके समर्थकों को मात देने के लिए, अपने अपने राजनीतिक प्रभाव, धार्मिक वर्चस्व और क्षेत्रीय दादागिरी को स्थायित्व देने के लिए पिछली शताब्दी में अनेक प्रयोग हुए, विभिन्न देशों पर आक्रमण किये गए या करवाए गए, यौद्धिक अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सारे […] Read more » strategies of Arab-Gulf countries and India Sunni Axis
राजनीति राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव 2026 के वर्षपर्यंत सियासी मायने February 19, 2026 / February 19, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय चिरंजीवी सदन ‘राज्यसभा’ के द्विवार्षिक चुनाव के लिए वर्ष 2026 में विभिन्न चरणों में खाली होने वाली कुल 71-75 सीटें के लिए चुनाव होंगे जो पूरे वर्ष अप्रैल और नवंबर में भरी जाएंगी। लिहाजा, इन चुनावों के राजनीतिक मायने गहन व अहम हैं, क्योंकि ये चुनाव जहां एनडीए की बहुमत मजबूती बढ़ा सकते […] Read more » राज्यसभा द्विवार्षिक चुनाव
राजनीति आखिर जातीय, धार्मिक व क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने वाली लोकतांत्रिक प्रवृत्ति पर कैसे पाएंगे काबू? February 18, 2026 / February 18, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय दुनिया को ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ का संदेश देने वाला जनतांत्रिक भारत आज जातीय, धार्मिक और क्षेत्रीय भावनाओं को भड़काने वाली ‘ब्रितानी’ व ‘मुगलिया’ सियासत के चक्रव्यूह में फंसा पड़ा है। इससे ‘सर्वे भवंतु सुखिनः, सर्वे संतु निरामया’ जैसी उसकी उदात्त सोच भी कठघरे में खड़ी प्रतीत हो रही है। यहां की प्रतिभाशाली और प्रभुत्ववाली […] Read more » लोकतांत्रिक प्रवृत्ति पर काबू
मीडिया समाज एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026 के नीतिगत-समूहगत वैश्विक मायने February 16, 2026 / February 16, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय एआई इम्पैक्ट समिट 2026 भारत सरकार द्वारा नई दिल्ली में 16-20 फरवरी 2026 को आयोजित एक प्रमुख वैश्विक आयोजन है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के जिम्मेदार और समावेशी विकास पर केंद्रित है। यह समिट ग्लोबल साउथ के लिए पहला बड़ा AI शिखर सम्मेलन है, जो 100+ देशों से 35,000+ प्रतिनिधियों को एकजुट कर […] Read more » AI Impact Summit 2026 एआई इम्पैक्ट सम्मिट 2026
राजनीति भारत-अरब लीग के विदेश मंत्रियों की बैठक के सियासी व कूटनीतिक मायने February 3, 2026 / February 3, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारत की सियासत में भले ही हिन्दू-मुसलमान एक-दूसरे के विपरीत ध्रुव समझे जाते हों लेकिन वैश्विक दुनियादारी में वे परस्पर पूरक बनते जा रहे हैं। ऐसा इसलिए कि अरब जगत पर कसते अमेरिकी-चीनी शिकंजे के दृष्टिगत पश्चिम और मध्य एशियाई देशों की भलाई इसी में निहित है कि वे सभी 22 देश भारत-रूस […] Read more » भारत-अरब लीग
आर्थिकी युवा बजट 2026-27 के आर्थिक मायने विशिष्ट, विकसित भारत 2047 के सपने होंगे पूरे February 2, 2026 / February 2, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारत सरकार का 2026-27 का केंद्रीय बजट विकास, रोजगार सृजन और राजकोषीय अनुशासन पर केंद्रित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026, दिन रविवार को इसे संसद की पटल पर प्रस्तुत करके एक नया रिकॉर्ड कायम किया। लिहाजा इसके आर्थिक मायने और राजनीतिक प्रभाव महत्वपूर्ण है। इसपर बहस तेज हो गई, जो कई कारणों से अभिप्रेरित है। जहां सत्ता पक्ष ने इसे युवा शक्ति का प्रतीक बजट ठहराया, वहीं विपक्ष ने इसे अदृश्य बजट करार देते हुए जमकर आलोचना की। जहां तक कुल बजट आकार की बात है तो यह 53.5 लाख करोड़ रुपये है, जिसमें पूंजीगत व्यय 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया। भले ही राजकोषीय घाटा जीडीपी (GDP) का 4.3% रखा गया, जो पिछले साल के 4.4% की तुलना में कुछ कम है। वहीं, जहां तक कर सुधार की बात है तो आयकर दरों में कोई बदलाव नहीं आया; जबकि नया आयकर अधिनियम 2026 अप्रैल से लागू होगा। वहीं, एफ एंड ओ (F&O) पर एसटीटी (STT) बढ़ाकर 0.05-0.15% किया गया, विदेशी पर्यटन/शिक्षा हेतु टीसीएस (TCS) 2% किया गया। जहां तक बजट में क्षेत्रीय प्रावधान किये जाने की बात है तो रोजगार-एमएसएमई के लिए 10,000 करोड़ का वृद्धि कोष प्रस्तावित है, जबकि क्रेडिट गारंटी दोगुनी की गई। वहीं, बुनियादी ढांचा हेतु 7 हाईस्पीड रेल कॉरिडोर का विकास, शहरी विकास के लिए 5,000 करोड़ प्रति वर्ष का प्रस्ताव और स्वास्थ्य-कृषि क्षेत्र में 17 कैंसर दवाएं सस्ती किये जाने की घोषणा, बायोफार्मा को 10,000 करोड़ दिए जाने का प्रस्ताव और मखाना बोर्ड मजबूत किये जाने का प्रस्ताव शामिल है। वहीं, अन्य महत्वपूर्ण बजट घोषणाओं में नवीकरणीय ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात प्रोत्साहन पर फोकस प्रदान करते हुए सुधारों का ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ जारी रखा गया। लिहाजा यह विकसित भारत 2047 का रोडमैप है। इन बजट प्रस्तावों के आर्थिक मायने दूरगामी महत्व वाले हैं, क्योंकि बजट में पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) को 12.2 लाख करोड़ रुपये तक बढ़ाया गया है, जो बुनियादी ढांचे, विनिर्माण और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देगा। वहीं, राजकोषीय घाटा 4.3% जीडीपी (GDP) पर लक्षित है, जबकि ऋण-जीडीपी अनुपात 55.6% तक सुधरेगा, जो वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करेगा। वहीं, कर राहत जैसे टीसीएस (TCS)/टैक्स सीमा बढ़ाना, एमएसएमई (MSME) क्रेडिट गारंटी दोगुनी करना और स्टार्टअप फंड कंज्यूमर (consumer) खर्च व निवेश को प्रोत्साहित करेगा। जहां तक बजट प्रस्तावों के राजनीतिक प्रभाव की बात है तो निश्चय ही सरकार ने रोजगार (जैसे चमड़ा क्षेत्र में 22 लाख नौकरियां), किसान योजनाएं (मखाना बोर्ड) और स्वास्थ्य (10,000 मेडिकल सीटें) पर फोकस कर एनडीए (NDA) सहयोगियों व ग्रामीण मतदाताओं को मजबूत संदेश दिया है। जबकि विपक्ष ने इसे ‘राजनीतिक बजट’ करार दिया है, खासकर राज्य-विशिष्ट घोषणाओं पर, लेकिन विकास लक्ष्य (विकसित भारत 2047) बीजेपी की छवि को मजबूत करेंगे। कुल मिलाकर, यह गठबंधन स्थिरता और 2029 के आम चुनाव सहित 2026, 27 और 28 की विधानसभा चुनाव की तैयारी को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। लिहाजा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बजट 2026-27 को 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं का प्रतीक बताया। उन्होंने इसे सुधारों को मजबूत करने और विकसित भारत के लिए स्पष्ट रोडमैप करार दिया। मोदी ने कहा कि यह बजट नारी शक्ति का सशक्त प्रतिबिंब है और अपार अवसर प्रदान करता है। युवाओं के लिए नया आयाम तथा हर घर लक्ष्मी का आगमन सुनिश्चित करने वाला बताया। विकास फोकस करते हुए उन्होंने इसे आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन और समावेशी विकास का माध्यम माना, जो देश को 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाएगा। विपक्ष की आलोचना के बीच सरकार की सकारात्मक छवि मजबूत करने वाला कदम है। हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष ने कड़ी आलोचना की है। विभिन्न दलों ने इसे निराशाजनक, फीका और अपेक्षाओं से कम बताया। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम रमेश ने इसे “पूरी तरह फीका” कहा, जिसमें भारी माहौल के बावजूद कोई स्पष्ट आवंटन या पारदर्शिता नहीं है। जबकि कांग्रेस नेता सुरेंद्र राजपूत ने आरोप लगाया कि सरकार अर्थव्यवस्था को गर्त में डुबो रही है। वहीं कांग्रेस नेता जेबी माथेर ने केरल के लिए इसे निराशाजनक बताया है। वहीं, समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने कहा कि इस बजट में महिलाओं, युवाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य व कृषि के लिए कुछ नहीं है। जबकि सपा नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे गरीब-किसान-युवा विरोधी बजट बताया। जबकि सपा सांसद राम गोपाल यादव ने कहा कि “मोदी सरकार से ही उन्हें कोई उम्मीद नहीं है।” वहीं, टीएमसी नेत्री और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मौजूदा बजट में भी बंगाल की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए इसे “दिशाहीन” बजट कहा। जबकि तृणमूल कांग्रेस के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि यह बजट उनकी समझ में नहीं आया, इसलिए कोई नंबर नहीं देंगे। कुल मिलाकर विपक्ष ने राज्य-विशिष्ट घोषणाओं की कमी, मध्यम वर्ग व किसानों की अनदेखी तथा राजनीतिक बजट करार दिया। हालांकि, भारत के 2026-27 बजट पर विपक्ष की आलोचना के जवाब में भाजपा सरकार ने इसे ऐतिहासिक, समावेशी और विकासोन्मुखी बजट बताया। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्ष नकारात्मक राजनीति कर रहा है। जहां केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बजट को सराहते हुए विपक्ष पर तंज कसा कि वे अर्थव्यवस्था की मजबूती को नहीं देख पा रहे। वहीं, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे विकसित भारत के संकल्प में मील का पत्थर करार देते हुए कहा कि यह बजट हर वर्ग के लिए कल्याणकारी है। जबकि यूपी के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने इसे विकसित भारत का रोडमैप करार दिया, और कहा कि इसके विभिन्न प्रस्तावों से सामाजिक-आर्थिक विकास का स्वर्णिम अध्याय पूरा होगा। कुलमिलाकर सरकार ने जोर दिया कि कैपेक्स, रोजगार और किसान योजनाएं विपक्ष की ‘फीका’ टिप्पणी को गलत साबित करेंगी। इस प्रकार यह बजट एनडीए की एकजुटता को भी दिखाता है। कमलेश पांडेय Read more » बजट 2026-27
राजनीति विधि-कानून सनातन विरोधी भारतीय संविधान में संशोधन की अपेक्षाएं January 30, 2026 / January 30, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय भारतीय संविधान के कुछ प्रावधानों को यदि सनातन विरोधी षडयंत्र समझा जाता है तो यह अनायास नहीं है क्योंकि इसके कई निर्माताओं का सार्वजनिक चरित्र संदिग्ध और हिंदुत्व विरोधी माना जाता रहा है। तत्कालीन नौकरशाहों, न्यायविदों, व उद्योगपतियों में भी ऐसे ही तत्वों की बहुतायत थी जिससे आजादी के मौलिक उद्देश्य बता आजतक […] Read more » सनातन विरोधी भारतीय संविधान
विश्ववार्ता वैश्विक समस्याओं का समाधान सहयोग से संभव है, टकराव से तो कतई नहीं! January 29, 2026 / January 29, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय दुनिया का थानेदार अमेरिका और उसका विकल्प बनने की चाहत रखने वाले चीन समेत अन्य विघ्नसंतोषी देशों को शांतिप्रिय व गुटनिरपेक्ष देश भारत ने एक नहीं बल्कि कई बार स्पष्ट कूटनीतिक संदेश दिए हैं कि वैश्विक समस्याओं का समाधान पारस्परिक सहयोग से ही संभव है, टकराव से कतई नहीं लेकिन उनकी शहंशाही प्रवृत्ति […] Read more » eu and india trade deal वैश्विक समस्याओं का समाधान
राजनीति ‘एक भारत, एक कानून’ की नीतिगत कसौटी के सियासी निहितार्थ January 27, 2026 / January 27, 2026 | Leave a Comment कमलेश पांडेय विभिन्न तरह के पारस्परिक विरोधाभासों से जूझ रहे भारतीय गणतंत्र के लिए ‘एक भारत, एक कानून’ की अवधारणा बदलते वक्त की मांग है। इसलिए इसको सरजमीं पर उतरना बेहद जरूरी है। सवाल है कि जब एक मतदाता, एक वोट का विधान सफल हो सकता है तो फिर एक भारत, एक कानून का विधान क्यों […] Read more » One India One Law एक भारत संविधान सिर्फ एक कानूनी का ग्रंथ
विश्ववार्ता गाजा बोर्ड ऑफ पीस पर वैश्विक कशमकश के मायने January 24, 2026 / January 24, 2026 | Leave a Comment गाजा बोर्ड ऑफ पीस अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की एक महत्वाकांक्षी पहल है जो गाजा संघर्ष को सुलझाने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर शांति स्थापना का एक नया मॉडल प्रस्तुत करती है। Read more » गाजा बोर्ड ऑफ पीस