राजनीति कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सवर्ण विरोधी बयानों से महागठबंधन को मिली करारी मात November 27, 2025 / November 27, 2025 | Leave a Comment कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिग्गज राजनेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का राजनीतिक सलाहकार चाहे जो भी हो, या फिर अपनी सियासत का सियासी निर्णय लेने Read more » महागठबंधन को मिली करारी मात
राजनीति क्या संसद का शीतकालीन सत्र कोई नया मानक स्थापित कर पाएगा या फिर वही घिसी-पिटी सियासत दोहरायी जाएगी? November 27, 2025 / November 27, 2025 | Leave a Comment कभी लोकतंत्र की जनभावनाओं को स्पष्ट करते हुए फ्रांसीसी दार्शनिक वॉल्टेयर ने कहा था कि "मैं आपके विचार से सहमत नहीं हो सकता लेकिन उसे कहने के आपके अधिकार की रक्षा आखिरी दम तक करूंगा।" लेकिन यह विशुद्ध रूप से संस्कारवान नीति की बात है। आज जबकि लोकतांत्रिक सियासत का Read more » संसद का शीतकालीन सत्र
राजनीति बिहार की सियासत में नीतीश कुमार ने खींच दी एक बड़ी लाइन, जिसे छोटा करना आसान नहीं! November 21, 2025 / November 24, 2025 | Leave a Comment कभी सुप्रसिद्ध समाजवादी विचारक किशन पटनायक ने कहा था कि विकल्पहीन नहीं है दुनिया, लेकिन बिहार की सियासत में नीतीश कुमार ने साबित कर दिया है कि कोई लाख चिल्ल-पों मचा ले, Read more » नीतीश कुमार
शख्सियत समाज बिहार में सम्राट चौधरी की बढ़ती सियासी प्रासंगिकता के गहरे निहितार्थ November 20, 2025 / November 20, 2025 | Leave a Comment बिहार भाजपा विधायक दल ने अपने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पुनः विधायक दल का नेता चुन लिया है जबकि दूसरे उपमुख्यमंत्री रहे विजय सिन्हा को भी उपनेता चुना गया है Read more » Samrat Chaudhary in Bihar सम्राट चौधरी की बढ़ती सियासी प्रासंगिकता
राजनीति नक्सली कमांडर माडवी हिडमा के एनकाउंटर से नक्सवाद समाप्ति के लक्ष्य जल्द होंगे पूरे November 19, 2025 / November 19, 2025 | Leave a Comment केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की टीम ने नक्सलवाद मुक्त भारत की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ चुके हैं क्योंकि अर्द्ध सैनिक बलों ने शीर्ष नक्सली कमांडर माडवी हिडमा का खात्मा Read more » Madvi Hidma's encounter the goals of ending Naxalism will soon be achieved. With the encounter of Naxalite commander Madvi Hidma माडवी हिडमा के एनकाउंटर
राजनीति बिहार में जनसुराज की हार के पीछे प्रशांत किशोर की आखिर क्या रणनीति रही, इसे समझने में अभी वक्त लगेगा! November 17, 2025 / November 17, 2025 | Leave a Comment देश के सुप्रसिद्ध चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर पांडेय की नवस्थापित पार्टी जनसुराज की बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में हुई शर्मनाक हार से सियासी पंडित भी चौक गए हैं। Read more » Prashant Kishore's strategy behind the defeat of Jansuraj in Bihar! बिहार में जनसुराज की हार
राजनीति बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन में शामिल दलों की ओछी हरकतें अंततोगत्वा उन्हीं पर पड़ी भरी, जानिए कैसे? November 15, 2025 / November 18, 2025 | Leave a Comment बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजद, कांग्रेस, वीआईपी और उनके सहयोगी वामपंथी दलों की हार के कई प्रमुख कारण हैं। चूंकि इनके नेताओं व उनके खासमखास लोगों ने जानबूझकर Read more » बिहार विधानसभा चुनाव 2025
समाज व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल क्या है? दुनिया इससे कितनी प्रभावित है? भारत इससे कैसे बच सकता है? November 13, 2025 / November 13, 2025 | Leave a Comment व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल संगठित अपराध का नया और बेहद खतरनाक रूप है, जिसमें डॉक्टर्स, इंजीनियर्स, अध्यापक, प्रोफेशनल्स और अभिजात्य वर्ग के लोग आतंक की लॉजिस्टिक्स, फंडिंग, गुप्त संगठन और तकनीकी सहायता का काम करते हैं, Read more » व्हाइट कॉलर टेरर मॉड्यूल
राजनीति वैश्विक कूटनीति का चातुर्य काल, मोदी डॉक्ट्रिन से मजबूत हुआ भारत September 29, 2025 / September 29, 2025 | Leave a Comment , इस काल में कूटनीतिक क्रियाकलाप बिना बल प्रयोग के अपने राष्ट्रों के योगदान और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर केंद्रीत होते हैं। इसलिए, वैश्विक कूटनीति के चातुर्य काल का मतलब समग्र वैश्विक वातावरण में सूझ-बूझ और सामंजस्यपूर्ण कूटनीतिक प्रयासों के माध्यम से अपने और वैश्विक हितों को संतुलित और सुरक्षित रूप से आगे बढ़ाने की क्षमता को कह सकते हैं। यह मोदी डॉक्ट्रिन यानी मोदी सिद्धांत से प्रभावित है। Read more » India strengthened by the Modi Doctrine The tactful period of global diplomacy मोदी डॉक्ट्रिन
राजनीति विधि-कानून जब डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़ हैं तो फिर मोदी की नीतियां अमेरिकी हितों पर चोट क्यों न दें? September 22, 2025 / September 22, 2025 | Leave a Comment कमलेश पांडेय जब भारत के गांवों में किसी से विवाद बढ़ने पर और घात-प्रतिघात की परिस्थितियों के पैदा होने पर पारस्परिक हुक्का-पानी या उठक-बैठक, खान-पान बन्द करने के रिवाज सदियों से चलते आए हैं तो फिर वैश्विक दुनियादारी में हम लोग इसे लागू क्यों नहीं कर सकते ताकि हमारे मुकाबिल खड़े होने वाले देशों को […] Read more » then why should Modi's policies not harm American interests When Donald Trump's policies are against India डॉनल्ड ट्रंप की नीतियां भारत के ख़िलाफ़
लेख विधि-कानून वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने September 16, 2025 / September 16, 2025 | Leave a Comment कमलेश पांडेय सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने वक्फ संशोधन अधिनियम 2025 पर तो रोक नहीं लगाई लेकिन उसके कुछेक प्रावधानों में विधिसम्मत और तर्कसंगत संशोधन किया है या फिर पूरी तरह से उन पर रोक लगा दी है। इसलिए वक्फ संशोधन अधिनियम में हुए सुप्रीम संशोधन के मायने समझना बहुत जरूरी है। लोगों को उम्मीद है कि कोर्ट के इस ताजातरीन फैसले से वे आशंकाएं दूर हो जाएंगी जो इस नए कानून को लेकर इससे पहले जताई जा रही थीं। चूंकि कोर्ट का यह निर्णय संविधान के अनुरूप है, इसलिए दोनों पक्षों ने इसे मान लिया है। यह एक शुभ लक्षण है। बताया जाता है कि सुप्रीम कोर्ट की ओर से किए गए संशोधन महत्वपूर्ण और जरूरी हैं, क्योंकि इनमें संविधान की भावनाओं का भी ख्याल रखा गया है। इसलिए इसके परिवर्तित मायने राष्ट्रीय एकता के लिहाज से अहम हैं। लिहाजा इस फैसले का मुख्य असर निम्नलिखित है:- पहला, कोर्ट ने उस प्रावधान पर रोक लगा दी है जिसमें वक्फ बनाने के लिए व्यक्ति का 5 वर्षों तक इस्लाम का अनुयायी होना जरूरी था, बताया गया है। हालांकि यह रोक तभी तक लागू रहेगा जब तक राज्य सरकारें इसके लिए अलग से नियम नहीं बना देतीं। चूंकि यह शर्त मनमानी हो सकती थी, इसलिए अदालत ने इसे स्थगित कर दिया है। समझा जाता है कि वक्फ करने के लिए न्यूनतम 5 बरसों तक इस्लाम का अनुयायी होने के प्रावधान पर तब तक रोक रहेगी, जब तक राज्य सरकारें इसके सत्यापन के लिए नियम नहीं बना लेती। चूंकि देश में धर्म व्यक्तिगत मामला है और यह जरूरी नहीं कि कोई नागरिक अपनी धार्मिक पहचान का सार्वजनिक प्रदर्शन करे। इसलिए यह तय करना कि कोई किसी धर्म को कब से मान रहा है, बेहद जटिल है। राज्य सरकारों से उम्मीद है कि इस बारे में नियम बनाते समय वे सभी पहलुओं का ध्यान रखेंगी और ज्यादा संवेदनशीलता बरतेंगी। दूसरा, कोर्ट ने यह भी निर्णय दिया है कि जिला कलेक्टर को यह फैसला देने का अधिकार नहीं है कि कोई संपत्ति वक्फ है या नहीं, जब तक वक्फ ट्रिब्यूनल या कोर्ट अंतिम निर्णय न कर ले। इससे कलेक्टर की शक्ति सीमित हुई है और मनमानी पर रोक लगी है। यह एक अहम संशोधन है क्योंकि शीर्ष अदालत ने वक्फ संपत्ति जांच के प्रावधानों पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया है कि नामित अधिकारी की आंशिक रूप से रिपोर्ट के आधार पर ही किसी प्रॉपर्टी को गैर-वक्फ नहीं माना जा सकता। समझा जाता है कि अदालत ने संपत्ति अधिकार तय करने की ताकत जिलाधिकारी को देने को संविधान में की गई व्यवस्था शक्ति के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ माना है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है, ताकि लोकतंत्र के तीनों अहम अंगों- विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच शक्ति का संतुलन बना रहे। एक पक्ष की ओर पलड़े का थोड़ा भी झुकाव व्यवस्था के संतुलन को बिगाड़ देगा। तीसरा, वक्फ बोर्ड में सदस्यों की संख्या और गैर-मुस्लिम सदस्यों की सीमा में संशोधन भी कुछ हद तक सुरक्षित की गई है लेकिन कोर्ट ने कुछ प्रावधानों पर स्थगन लगाया है। लिहाजा लोगों को उम्मीद है कि अब उनकी सरकार अन्य धर्मों के लिए भी इसी तरह के कानून लाएगी व उसका अनुपालन का निर्णय करेगी। चतुर्थ, कोर्ट ने कुछ प्रावधानों को शक्ति के ‘मनमाने’ प्रयोग को रोकने के लिए अस्थायी रूप से स्थगित किया है जिसमें वक्फ संपत्तियों का पंजीकरण और बुजुर्गों का धर्म पालन जैसे मुद्दे शामिल हैं। उल्लेखनीय है कि वक्फ संशोधन अधिनियम के कई बिंदुओं पर विपक्ष को गहरी आपत्ति थी। इसे लेकर दोनों सदनों में और सड़क पर भी काफी हंगामा हुआ। इस मामले की गंभीरता और उसके असर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट का फैसला जिम्मेदारी भरा है। यूँ तो इस बाबत दायर याचिका में पूरे कानून को रद्द करने की मांग की गई थी लेकिन शीर्ष अदालत ने इसे नहीं माना। इस तरह के कदम बेहद दुर्लभ मामलों में उठाए जाते है और इनका प्रभाव बहुत व्यापक होता है। देखा जाए तो इस मायने में सुप्रीम कोर्ट ने न्यायिक विवेक का इस्तेमाल किया और यह भी ध्यान रखा कि विधायिका के साथ सीमाओं का अतिक्रमण न हो। इसलिए उसने समझदारी पूर्वक बीच का रास्ता निकाला है। कुल मिलाकर सुप्रीम कोर्ट ने इस संवेदनशील मामले में बेहद संतुलित नज़रिया अपनाया है। सच कहा जाए तो कोर्ट का यह फैसला वक्फ कानून में संतुलित नज़रिया को अधिक न्यायसंगत और संवैधानिक बनाने की दिशा में संकेत देता है। साथ ही इसके मार्फ़त सरकारी शक्तियों और व्यक्तिगत अधिकारों का संतुलन बनाने का प्रयास भी किया गया है। कोर्ट के इस फैसले से संबंधित कुछ नियम और प्रावधान तभी तक लागू नहीं होंगे, जब तक इस बारे में अधिक स्पष्ट नियम और निर्देश नहीं बन जाते। इस तरह से स्पष्ट है कि सुप्रीम कोर्ट ने वक्फ संशोधन अधिनियम के कुछ प्रावधानों पर रोक लगा दी है जबकि पूरे कानून पर पूरी तरह से रोक नहीं लगाई है। ऐसा करके उसने एक ओर जहां संतुलित नजरिया अपनाते हुए शक्ति का संतुलन बिठाने की कोशिश की है, वहीं दूसरी ओर वक्फ कानून पर फैसला देते हुए उसने अतिरिक्त संवेदनशीलता की जरूरत भी समझी है। यही वजह है कि अपेक्षाकृत विवादास्पद मामलों में उसका एक और जिम्मेदारी भरा निर्णय सामने आया है जिससे देश-प्रदेश ने राहत की सांस ली है। कमलेश पांडेय Read more » Meaning of Supreme Amendment in Waqf Amendment Act 2025 वक्फ संशोधन अधिनियम 2025
आर्थिकी राजनीति नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक September 9, 2025 / September 9, 2025 | Leave a Comment कमलेश पांडेय मौजूदा नेक्स्टजेन जीएसटी सुधार केवल कर सुधार नहीं बल्कि राष्ट्र-निर्माण को तेज रफ्तार देने का परिचायक है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समर्थ भारत के सपनों को पंख लगाने वाला वह निर्णायक उपाय है जिसका सकारात्मक असर बहुत जल्द ही देश-दुनिया पर दिखाई पड़ेगा। बता दें कि 56वीं जीएसटी परिषद की बैठक, जो […] Read more » NextGen GST reform