व्यंग्य कट्टर ईमानदार को दूर से ही नमस्कार October 17, 2024 / October 17, 2024 | Leave a Comment अशोक गुप्त एक होता है ईमानदार और एक होता है कट्टर ईमानदार। जैसे एक होता है ब्राह्मण और एक महाब्राह्मण। अंतर तो आप जानते ही हैं. ईमानदार व्यक्ति को लेबल की आवश्यकता नहीं होती। उसे लोग उसके आचरण से जानते हैं. ईमानदार आदमी दुनिया में अक्सर पीछे रह जाता है क्योंकि दुनिया में आजकल बेईमानी […] Read more » कट्टर ईमानदार
पर्यावरण लेख मानसून 2024: रिकॉर्ड तोड़ बारिश, बढ़ते तापमान ने जलवायु परिवर्तन के खतरों को किया उजागर October 16, 2024 / October 16, 2024 | Leave a Comment इस साल का मानसून भारत के लिए कई रिकॉर्ड तोड़ बारिश और असामान्य रूप से बढ़ते तापमान के साथ समाप्त हुआ। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव साफ़ तौर पर दिखे, जिससे देश के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश और ऊंचे तापमान की घटनाएं दर्ज की गईं। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष देशभर में […] Read more » Monsoon 2024: Record breaking rainfall rising temperatures expose dangers of climate change मानसून 2024
लेख शख्सियत समाज स्वर साधिकाशारदा सिन्हा के सुमधुर संगीत सफर के सशक्त साथी को अंतिम सलाम September 23, 2024 / September 23, 2024 | Leave a Comment ब्रज किशोर सिन्हा को श्रद्धांजलि ओंकारेश्वर पांडेय बीके सिन्हा जी चले गये। पटना की गहन शांति में, प्रेम और संगीत से सजी एक जीवनगाथा आज थम गई। ब्रज किशोर सिन्हा को हमलोग आदर से, स्नेह से बीके सिन्हा जी ही कहा करते थे। अब वे इस नश्वर दुनिया से विदा ले चुके हैं। बिहार की महान लोक […] Read more » Sharda-sinha-husband-death ब्रज किशोर सिन्हा
शख्सियत समाज साक्षात्कार पत्रकारिता एवं राष्ट्रवादी सोच के जुझारू-व्यक्तित्व September 23, 2024 / September 23, 2024 | Leave a Comment ललित गर्ग षष्ठीपूर्ति – 24 सितम्बर, 2024-प्रो. महेश चौधरी-पत्रकारिता एवं समाजसेवा के एक जुझारू व्यक्तित्व, मजबूत कलम एवं निर्भीक वैचारिक क्रांति के सूत्रधार, उत्कृष्ट राष्ट्रवादी एवं अनेक पत्रिकाओं के सम्पादक ललित गर्ग का जीवन एक संभावनाओं भरी प्रेरक जीवन की दास्तान है। उनका जीवन सफर आदर्शों एवं मूल्यों की पत्रकारिता की ऊंची मीनार हैं। वे पत्रकार, लेखक, स्तंभकार […] Read more »
पुस्तक समीक्षा तीन श्रेष्ठ कवियों की पत्रकारिता का आकलन September 21, 2024 / September 21, 2024 | Leave a Comment कृपाशंकर चौबेहिंदी के तमाम मूर्धन्य संपादक पत्रकारिता के किसी संस्थान या विश्वविद्यालय से प्रशिक्षित नहीं थे। किंतु वे अपने आप में प्रशिक्षण संस्थान थे। वे पूरे के पूरे पाठ्यक्रम थे और वे ही प्रयोगशाला थे। उनके भीतर अपने समाज को देखने और समझने की अचूक दृष्टि थी। इसलिए पत्रकारिता के पश्चिमी सिद्धांतों को रटने से […] Read more »
पुस्तक समीक्षा मॉरीशस और फीजी : विश्व हिंदी सम्मेलन के झरोखे से July 17, 2024 / July 17, 2024 | Leave a Comment समीक्षक-डॉ. सुभाषिनी लता कुमार प्रलेक, मुंबई ने अभी-अभी एक पुस्तक प्रकाशित की है। उसका शीर्षक है ‘मॉरीशस और फीजी: विश्व हिंदी सम्मेलन के झरोखे से’। इसके लेखक हैं कृपाशंकर चौबे जो हिंदी साहित्य और पत्रकारिता में सुप्रतिष्ठित हैं। यह पुस्तक 2018 में मॉरीशस में आयोजित 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन और 2023 में फीजी में आयोजित […] Read more » मॉरीशस और फीजी
राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरनाक है संसदीय क्षरण July 8, 2024 / July 8, 2024 | Leave a Comment डॉ दयानंद कादयान संसद भवन लोकतंत्र का मंदिर होता है। इस मंदिर को सनातन व आधुनिक रूप देकर नए गरिमामय स्वरूप में लाया गया है। परंतु संसदीय कार्रवाइयों के क्षरण का विषय हर लोकतंत्र प्रेमी के के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।लेकिन किसी ने भी इसके लिए कुछ करने की जरूरत नहीं […] Read more »
खान-पान फ़ेस बुक पेज़ से मनोरंजन हमारा विनाश कब शुरू हुआ? June 27, 2024 / June 27, 2024 | Leave a Comment 1.हमारा विनाश उस समय से शुरू हुआ जब हरित क्रांति के नाम पर देश में रासायनिक खेती की शुरूआत हुई और हमारा पौष्टिक वर्धक, शुद्ध भोजन विष युक्त कर दिया! 12 .हमारा विनाश उस दिन शुरू हुआ था जिस दिन लोगों ने स्वस्थ रहने का विज्ञान छोड दिया था और अपने शरीर के स्वास्थ्य सिद्धांतों […] Read more »
प्रवक्ता न्यूज़ आर्य वीर दल गौतमबुद्ध नगर का चरित्र निर्माण शिविर हुआ संपन्न June 24, 2024 / June 24, 2024 | Leave a Comment ग्रेटर नोएडा। यहां स्थित महात्मा हंसराज आदर्श विद्यालय बंबावड़ गौतम बुद्ध नगर में एक सप्ताह तक चला आर्य वीर दल चरित्र निर्माण शिविर संपन्न हो गया। चरित्र निर्माण शिविर के बारे में जानकारी देते हुए आर्यवीर दल जनपद गौतम बुद्ध नगर के संचालक आचार्य कर्णसिंह ने हमें बताया कि इस अवसर पर सैकड़ो युवाओं को […] Read more »
लेख भारतीय धर्म और मन्दिर June 18, 2024 / June 18, 2024 | Leave a Comment भारतीय संस्कृति व धर्म में मन्दिरों को सदा से ही महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है, मन्दिर धर्म के आधारभूत अंगो में सदा से ही विद्यमान हैं। सनातन धर्म में वृक्ष, वन भी मन्दिर हैं यहाँ तक कि मानव शरीर को भी मन्दिर के सदृश माना गया है; परन्तु दुर्भाग्यवश भारतीय संस्कृति के आधारभूत अंग मन्दिरों को आज सोशल मीडिया से मस्त भारतवासी मान्दरों को सेल्फी पॉइट व नाच-गान करके रील बनाने में व्यक्त हैं, और मन्दिरों को धूमिल करने मे लगे हुये हैं, इन भारतवासियों ने नाट्य-शास्त्र को भी दूषित कर दिया है। भारतवासियों ने ब्रह्म को अपनी चेतना से अभिव्यक्त कर ईश्वर को साकार रूप में प्रदर्शित करने हेतु बुद्धि, चेतना के द्वारा मूर्तियों का निर्माण किया मूर्तियों को स्थापित करने के लिये शास्त्रों के गहन अध्ययन, ज्यामिति अध्ययन, “गणित व अभियांत्रिकी के फलस्वरूप ईश्वर के साकार रूप की विद्यमान करने हेतु शास्त्रीय संरचनाओं का निर्माण किया जो मंदिर कहलायीं। योग ने मानव शरीर की भाँति पृथ्वी पर भी कुछ स्थान पवित्र स्थान बताये है जिनका उल्लेख महाभारत में भी मिलता है, वही क्षेत्र तीर्थ कहलाये महान तपस्वियों ने संपूर्ण भारतवर्ष का विचरण किया और मन्दिर निर्माणस्थलों का चुनाव भी किया, वस्तुत: जब मानव अपने अंतः करण से वास्तु कला के माध्यम से प्रतिबिंबित करता है, वही मन्दिर है मन्दिर निर्माण में स्थान के साथ-साथ अन्य भौतिक व आध्यात्मिक घटक भी अनिवार्य होते हैं, ज्यामिति, गणित, स्थान के साथ-साथ उस स्थान का आध्यात्मिक इतिहास का अध्ययन भी किया जाता है; मान्दरों का निर्माण उस स्थान पर किया जाता है जहाँ जीवन शाक्त विद्यमान हो, उदाहरणतः प्राचीन मान्दर जीवनदायिनी नदियों के निकट, वृक्षों के निकट बनाये जाते थे, जिनका उद्देश्य मानव को प्रकृति के निकट पहुँचाकर आनन्द की अनुभूति करना है। रूपरहित ब्रह्म इस संसार की माता है चूंकि एक माता ही इस अनन्त संसार, चेतनारहित वस्तु, जीव-जन्तु का पालन पोषण करती है, विष्णु, शिव, का रूप है, रूपरहित ब्रह्म अनन्त है, उसका न कभी जन्म हुआ। ब्रह्म को दिव्यदृष्टि से देखने वाला वीर अर्जुन भी घबरा गया, जब उसे ब्रह्म ने अपने चतुर्भन रूप को दिखाकर शांति दी, उसी दिव्यदृष्टि व चतुर्भुजी रूप का प्रत्यक्ष रूप सूर्यदेव हैं। मन्दिरों में देवताओं की प्रतिमाओं की प्राणप्रतिष्ठा की जाती है, जिसके पश्चात वह प्रतिमा देवताओं की छावे रूप मे मन्दिर में सदा विद्यमान रहती है. मन्दिरों में प्रतिमा बनाने के लिये दिनो उपवास करते हैं, अपनी चेतना की पराकाष्ठा से देवता को साकार रूप में विराजित होने का आग्रह करते हैं, और अपने हाथों से ईश्वर का प्रत्यक्ष रूप प्रतिमाओं व मूर्तियों के रूप में प्रदर्शित करते भारतीय संस्कृति में चेतनारहित पत्थर में भी प्रतीत होती है, चूंकि वह भी ब्रह्म की रचना है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है प्राणप्रतिष्ठा के पश्चात प्रतिमाओं को भोग, काव्य. संगीत व नाट्य शास्त्र भी समर्पित किया जाता है। लिंग पुराण के लिंग ज्योति है अर्थात ब्रह्म का ही रूप है, अनुसार जिस भाँति आग का लिंग परिचय) धुंआ है, उसी प्रकार ब्रह्म का लिंग जगत है। भारतीय संस्कृति में शिवरात्रि के दिन शिव लिंग रूप में प्रकट हुये। भारतवर्ष में धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर हुआ करते थे, काम यहाँ देवता है, लोग काम के मन्दिरों में उत्सव व दर्शन करते थे। यहाँ मृत्यु के देवता के लिये भी मन्दिर विद्यमान हैं, चूंकि भारतवासी जीवन के चक्र अर्थात जन्म-मृत्यु से भली भाँति परिचित थे भारतवासी वट वृक्ष में शिव, पीपल में विष्णु व नीम में सूर्य का निवास मानकर उनकी स्तुति करते हैं। यहाँ नाट्य- शास्त्र के द्वारा भी मुक्ति प्राप्त की जा सकती है. महायोगी शिव भरतमुनि के नारयशास्त्र के अनुसार नटराज कहलाये जिनकों चरणों के नीचे मुक्ति है नटराज की नेत्रों में शांति है, मुख पर तेज है, भुजाओं में अग्नि,डमरू कंपन का प्रतीक है, जटाये उड रही हैं, और नीचे मुक्ति चरणों में है। उपास्य के नाम साकार रूप के बिना उपासना अत्यधिक कठिन है। आक्रमणकारियों ने मन्दिर तोड़े उनके ही वंशज राष्ट्र के टूटने के लिये जिम्मेदार हैं,धर्मनिष्ठ काम के मन्दिर तोडने वाले रिलीजनों ने संस्कृति को तीव्र ठेस पहुचाई। मंदिरों को तोड़कर अपनी संरचनाएं बना डाली। उन्होंने भारतीयों से ज्ञान भी लिया और घृणा भी की, सबको एक किताब व एक भगवान में बदलने में कभी सफल नहीं हो सके चूँकि जिस संस्कृति को महाकाल ने बनाया हो उसका काल क्या ही कर पायेगा पवन गोला Read more » Indian religion and temples
खान-पान दूध की चाय पीने के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव June 15, 2024 / June 15, 2024 | Leave a Comment डॉ. पुरुषोत्तम लाल मीणाभारत में दूध की चाय पीना अधिकतर लोगों के दैनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा हो चुका है। उच्च शिक्षा प्राप्त, उच्च पदस्थ और आम लोग दूध की चाय का सेवन बड़े शौक से करते हैं। ऐसे लोगों को नहीं पता कि चाय की हर एक घूंट के साथ वे अपने स्वास्थ्य के […] Read more » Health effects of drinking milk tea
लेख आनन्द की विशिष्ट अवस्था ‘मृत्यु’ May 28, 2024 / May 28, 2024 | Leave a Comment “मृत्यु की कल्पना भी जहाँ कष्टकारी है वहीं मृत व्यक्ति के लिए मृत्यु दीर्घकालीन आनन्द की अवस्था है। जीवितों के लिए जहाँ मृत्यु अमावस्या का स्याह अंधकार है वहीं मृत के लिए पूर्णिमा का प्रकाश। “देखिए जाने इन्हें क्या हो गया, अभी थाडी देर पहले तक तो हँस-बोल रहे थे, अब शांत है, कोई उत्तर […] Read more » आनन्द की विशिष्ट अवस्था 'मृत्यु'