राजनीति आतंकवाद तो पहले ही काला है, इसे किसी और रंग में न रंगें August 30, 2010 / December 22, 2011 | 6 Comments on आतंकवाद तो पहले ही काला है, इसे किसी और रंग में न रंगें -नीरज कुमार दूबे केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम ने आतंकवाद को ‘भगवा’ रंग से जोड़कर एक नया विवाद खड़ा कर दिया है। जब जरूरत आतंकवाद से निपटने के उपायों को पुख्ता बनाने की और इसके विरोध में एक साथ खड़े होने की है तो गृहमंत्री शायद इसमें व्यस्त रहे कि पहले आतंकवाद का ‘प्रतीक रंग’ तय […] Read more » terrorism आतंकवाद भगवा आतंकवाद
विविधा यथार्थ, वास्तव और सत्य के फर्क August 30, 2010 / December 22, 2011 | 3 Comments on यथार्थ, वास्तव और सत्य के फर्क – हृदयनारायण दीक्षित सच क्या है? सत्य का सत्य आधुनिक विज्ञान की बड़ी चुनौती है। पंथिक पुस्तकों के अनेक तथ्य विज्ञान की खोजों में सत्य नहीं निकले। लेकिन वैज्ञानिक खोजें भी अंतिम सत्य नहीं होती। भौतिक विज्ञान प्रत्यक्ष को सत्य मानता है। प्रत्यक्ष का साधारण अर्थ प्रति-अक्ष यानी आंख के सामने होता है। वैदिक साहित्य […] Read more » True सत्य सत्य
विविधा अब न जागे तो बहुत देर हो जाएगी ….. ! August 30, 2010 / December 22, 2011 | 13 Comments on अब न जागे तो बहुत देर हो जाएगी ….. ! हर हाल में स्थापित होगी ‘ रामलला प्रतिमा ‘ -डॉ0 नवीन आनंद श्रीराम जन्मभूमि मन्दिर निर्माण का जन आन्दोलन एक बार फिर प्रचण्ड वेग से प्रारंभ हो चुका है, यह आन्दोलन अब ‘अ’ राजनैतिक होगा, जिसे सियासी चश्मे से नहीं देखा जाएगा। वैज्ञानिक तथ्य और अदालती दस्तावेज इस सच को प्रमाणित कर रहे हैं कि […] Read more » Ram Birtplace रामजन्मभूमि रामलला
विविधा कोटि हिन्दु जन का ज्वार, मंदिर के लिए सब तैयार …… August 30, 2010 / December 22, 2011 | 15 Comments on कोटि हिन्दु जन का ज्वार, मंदिर के लिए सब तैयार …… -डॉ0 नवीन जोशी क्या सूरज को सूरज होने का प्रमाण देना पड़ता है या चाँद को अपनी चांदनी साबित करना पड़ती है, मगर ये भारतीय जन के विश्वास पर चोट है कि इस देश में ‘राम जन्मभूमि’ को प्रामाणिकता की जंग लड़ना पड़ रही है। कोटि-कोटि हिन्दु जन के मन में आस्था का प्रतीक बने […] Read more » Ram Birtplace रामजन्मभूमि राममंदिर
साहित्य नाटक चर्चा: आधुनिक युग में सीता अपहरण August 28, 2010 / December 22, 2011 | 3 Comments on नाटक चर्चा: आधुनिक युग में सीता अपहरण रामायण की मूल कथा पर आधरित प्रसिद्ध व्यंग्यकार डॉ प्रेम जनमेजय का यह नाटक आज की प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त विसंगतियों का ऐसा बखिया उधेड़ता है कि स्तब्ध हुए दर्शक यह सोचने के लिए बाध्य हो जाते हैं कि वास्तव में यदि आज के युग की ही तरह त्रेता में भगवान राम को अपने भाई […] Read more » Modern आधुनिक युग में सीता अपहरण
सैर-सपाटा उत्तराखण्ड में साहसिक पर्यटन August 27, 2010 / December 22, 2011 | 1 Comment on उत्तराखण्ड में साहसिक पर्यटन -त्रिलोक चन्द्र भट्ट साहसिक पर्यटन की विपुल सम्भावनाओं युक्त उत्तराखण्ड की मनोरम वादियों को कुदरत ने जो नैसर्गिक सौन्दर्य दिया है उस प्राकृतिक वातावरण में गगनचुम्बी हिमाच्छादित पर्वत शिखर, दुर्गम पहाड़, गलेशिर और सदावाहिनी नदियों के नयानाभिराम दृश्यों ने पर्यटकों में नया जोश और उमंग भर कर हमेशा चुनौती भरा आमंत्रण दिया है। यही कारण […] Read more » Tourism पर्यटन
राजनीति एक न भूलने वाली घटना August 27, 2010 / December 22, 2011 | 1 Comment on एक न भूलने वाली घटना -लालकृष्ण आडवाणी मुंबई, जेहादी आतकवादियों का पसंदीदा निशाना रहा है। आखिरकार यह देश की राजधानी जो है। दो वर्ष पूर्व से उन्होंने अपना ध्यान बंगलौर की तरफ किया है जो भारत का तेजी से विकसित हो रहा आई.टी.-सूचना प्रोद्योगिकी- का केन्द्र है। जुलाई, 2008 में इस शहर में श्रृंखलाबद्ध बम विस्फोट हुए थे। मुझे स्मरण […] Read more » terrorism आतंकवाद मदनी
समाज जाति प्रथा का विनाश August 26, 2010 / April 13, 2012 -भीमराव आंबेडकर जाति-व्यवस्था पर फिर से सवाल उठ रहे हैं। नए सिरे से मूल्यांकन हो रहा है। जाति-व्यवस्था को लेकर सबसे अधिक आरोपों का सामने करने वाली संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि हिंदू जाति-व्यवस्था की दीवारों को ढहा दें। इस व्यवस्था पर सबसे अधिक सुगठित […] Read more » Dr Bhim Rao Ambedkar जाति प्रथा डॉ. भीमराव आंबेडकर
विविधा माखनलाल विश्वविद्यालय में हंगामा प्रकरण: सिंहों की लड़ाई में फंसे मुलाजिम August 26, 2010 / December 22, 2011 | 12 Comments on माखनलाल विश्वविद्यालय में हंगामा प्रकरण: सिंहों की लड़ाई में फंसे मुलाजिम सबके अपने स्वार्थ, सबके अपने तर्क भोपाल स्थित माखनलाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय में आजकल हंगामा बरपा है। हंगामा दो ‘सिंहों’ – श्रीकांत सिंह और पुष्पेन्द्रपाल सिंह के कारण है। इसके लिए दोनों ने अपनी अक्ल और शक्ल का भरपूर फायदा उठाया। व्यक्तिगत स्वार्थ को साधने के लिए ‘बेचारे कर्मचारियों’ को बलि का बकरा बनाया गया। […] Read more » Makhanlal Chaturvedi Patrakarita Vishwavidyalay बीके कठियाला माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय
स्वास्थ्य-योग जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित August 26, 2010 / December 22, 2011 | 4 Comments on जड़ी-बूटी संरक्षण से ही आयुर्वेद सुरक्षित -त्रिलोक चन्द्र भट्ट हिमाच्छादित पर्वत शिखर और नैसर्गिक सौन्दर्य को निहारने वाले यात्री तीर्थाटन व पर्यटन के लिए ही प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर हरिद्वार को जानते हैं लेकिन अब वह यह भी जानने लगे हैं कि इस पर्वतीय प्रदेश को कुदरत ने जड़ी-बूटियों के रूप में जो अकूत खजाना दिया है वह भारत के किसी […] Read more » Ayurved आयुर्वेद
समाज बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो? August 25, 2010 / December 22, 2011 | 2 Comments on बुर्के पर सेक्युलर सोच क्या हो? -के. विक्रम राव बुर्के पर प्रतिबंध के मुद्दे पर भारत के प्रगतिषील और सेक्युलर समझवाले लोग, विषेषकर समाजवादी और माक्र्सवादी पार्टियों के पुरोधाजन, चुप्पी साधे हैं। उनकी सोच दुहरी है, दबाव वोट का है। मसलन भारत के सोशलिस्ट भी अपने फ्रेंच हमराहियों की भांति बुर्के की बात पर निर्विकार हो गये हैं। वर्ना इस मौजूं […] Read more » Secular बुर्का
विविधा खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान August 25, 2010 / December 22, 2011 | 5 Comments on खुशहाली के नये आयाम, विकास का स्पंदन म.प्र. की पहचान – भरतचंद्र नायक अयोध्या में ढांचा गिरने के बाद 1992 में मध्यप्रदेश सहित चार राज्यों की भारतीय जनता पार्टी की सरकारों को तत्कालीन नरसिंहराव सरकार ने भंग कर एकतरफा कार्यवाही का संकेत दिया। बाद में हुए चुनावों में मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में बनी और दस वर्षों में इतनी निरंकुश […] Read more » Developement विकास