आर्थिकी भारत-अमेरिका टैरिफ डील: जश्न मनाने में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए February 3, 2026 / February 3, 2026 | Leave a Comment सोमवार रात अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत–अमेरिका रिश्तों में नई हलचल पैदा कर दी। ट्रम्प ने दावा किया कि अमेरिका ने भारत पर लगाया 50% Read more » India-US tariff deal भारत-अमेरिका टैरिफ डील
राजनीति यूजीसी के नए नियम: समानता की पहल या शिक्षा व्यवस्था में नया सामाजिक तनाव January 29, 2026 / January 29, 2026 | Leave a Comment राजेश जैन उत्तर प्रदेश के बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री का इस्तीफ़ा एक प्रशासनिक घटना भर नहीं है। यह उस गहरे असंतोष की सार्वजनिक अभिव्यक्ति है, जो विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर देश के एक बड़े वर्ग में उभर रहा है। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि ये नियम […] Read more » यूजीसी के नए नियम
विश्ववार्ता वैश्विक राजनीति: आखिर अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड January 14, 2026 / January 14, 2026 | Leave a Comment ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है। क्षेत्रफल लगभग 21.7 लाख वर्ग किलोमीटर लेकिन आबादी सिर्फ 60 हजार के आसपास। यहां का 80 प्रतिशत हिस्सा बर्फ से ढका रहता है। न घने जंगल, न हाईवे, न चमकते शहर। कई महीनों तक सूरज डूबता नहीं और कई महीनों तक रात खत्म नहीं होती। देखने में शांत, ठंडा Read more » अमेरिका को क्यों चाहिए ग्रीनलैंड
विश्ववार्ता वेनेज़ुएला, तेल और ट्रंप: किस ओर मुड़ रही है विश्व व्यवस्था January 7, 2026 / January 7, 2026 | Leave a Comment ट्रंप प्रशासन मादुरो पर नार्को–टेररिज्म, ड्रग–तस्करी और हथियारों के अवैध लेन–देन के आरोप लगा रहा है। इन आरोपों की सच्चाई अदालत में तय होगी पर जिस अंदाज में एक संप्रभु राष्ट्र के राष्ट्राध्यक्ष को उठाकर अमेरिकी न्यायपालिका के समक्ष लाया गया, उसने वैश्विक राजनीति के मूल सिद्धांत पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। Read more » ड्रग–तस्करी नार्को–टेररिज्म वेनेज़ुएला
विश्ववार्ता दोस्ती, राजनीति और दूरी: बांग्लादेश-भारत संबंधों की बदलती कहानी December 29, 2025 / December 29, 2025 | Leave a Comment शेख हसीना ने भारत के समर्थन के साथ बांग्लादेशी राजनीति में मजबूती प्राप्त की। अवामी लीग का सत्ता में बने रहना भारत की नीति का मुख्य आधार बन गया। इस कारण बांग्लादेश की राजनीति में अवामी लीग का प्रभुत्व भारत की नीतिगत प्राथमिकता बन गया। Read more » Bangladesh-India relations politics and distance: The changing story of Bangladesh-India relations बांग्लादेश-भारत संबंध बांग्लादेश-भारत संबंधों की बदलती कहानी
समाज हर साल दो लाख लोगों के देश की नागरिकता छोड़ने के मायने December 27, 2025 / December 27, 2025 | Leave a Comment देश की नागरिकता छोड़ने वालों के ये आंकड़े केवल संख्या नहीं हैं बल्कि गहरे सामाजिक-आर्थिक और राजनीतिक संकेत हैं। जब संसद को बताया जाता है कि 2011 से 2024 के बीच 20.6 लाख भारतीय देश से कानूनी रिश्ता तोड़ चुके हैं तो सवाल स्वाभाविक है, आखिर ऐसा क्या बदल गया है? Read more » The meaning of two lakh people giving up their citizenship every year देश की नागरिकता छोड़ने के मायने
टेक्नोलॉजी मनोरंजन एआई और रोबोटिक्स: एक सपना, चेतावनी और उनके बीच खड़ा भविष्य November 21, 2025 / November 24, 2025 | Leave a Comment हाल ही में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रोबोटिक्स के क्षेत्र में हुए तेज़ विकास से दुनिया में कुछ लोग उत्साहित हैं तो कुछ आशंकित। कुछ को लगता है कि जल्द इंसान Read more » AI and robotics एआई और रोबोटिक्स
लेख शिक्षा भविष्य की बुनियाद लेकिन हिल रही नींव November 10, 2025 / November 10, 2025 | Leave a Comment हमारे बच्चे और युवा देश का भविष्य हैं और शिक्षा उन्हें दिशा देती है। दूसरी ओर स्कूल और कॉलेज में सीखने-सीखने का उद्देश्य कमजोर पड़ता नजर आ रहा है। Read more » राष्ट्रीय शिक्षा दिवस
Tech लेख इंजीनियरिंग शिक्षा: अब कम होगी कंप्यूटर साइंस की सीटें September 19, 2025 / September 19, 2025 | Leave a Comment राजेश जैन पिछले दशक में इंजीनियरिंग की कंप्यूटर साइंस, आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस, डेटा साइंस, मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी उन्मुख शाखाएं छात्रों और कॉलेजों, दोनों की पहली पसंद बन गयी थीं। कारण स्पष्ट हैं — उच्च सैलरी, नौकरी के ग्लोबल अवसर, इन्फार्मेशन टेक्नोलॉजी उद्योग की होड़ और डिजिटल इंडिया की महत्वाकांक्षाएं। इस सफलता की चमक ने यह सोच दी कि जितना हो सके सीएसई […] Read more » Engineering Education: Computer Science seats will now be reduced इंजीनियरिंग शिक्षा
राजनीति विश्ववार्ता सरकार की नाकामी का नतीजा है नेपाल में जेन-ज़ी की बग़ावत September 11, 2025 / September 27, 2025 | Leave a Comment नेपाल ने 4 सितंबर को जब सोशल मीडिया पर बैन लगाया तो शायद ही किसी ने सोचा होगा कि यह फैसला सत्ता बदलने की वजह बनेगा लेकिन यही हुआ। Read more » नेपाल में जेन-ज़ी नेपाल में जेन-ज़ी की बग़ावत
पर्यावरण लेख प्रकृति ने हमें चेताया है, उसे सुनें और अपनी दिशा बदलें September 10, 2025 / September 10, 2025 | Leave a Comment राजेश जैन उत्तर भारत इन दिनों एक गहरी त्रासदी से गुजर रहा है। यहां हो रही भीषण बारिश के कारण आम जनजीवन अस्त-व्यस्त है। मौसम विभाग के अनुसार 22 अगस्त से 4 सितंबर के बीच क्षेत्र में सामान्य से तीन गुना अधिक बारिश दर्ज हुई है। यह पिछले 14 वर्षों में सबसे अधिक और 1988 के बाद सबसे बरसात वाला मानसून है। भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने कई राज्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, पंजाब और दिल्ली बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहे हैं। अब तक सौ से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है। अकेले पंजाब में इस दशक की सबसे भीषण बाढ़ ने 50 से अधिक लोगों की जान ले ली है और लाखों लोग बेघर हो गए हैं। गांव डूब गए, सड़कें और पुल बह गए, खेत बर्बाद हो गए और शहरों का जीवन ठप हो गया है। त्रासदी का गहरा असर जब बाढ़ का पानी उतर जाएगा तो कैमरे और प्रशासन वहां से लौट आएंगे लेकिन प्रभावित लोगों की पीड़ा बरसों तक बनी रहेगी। गिरे हुए मकान, डूबे खेत, कर्ज में दबे किसान और पढ़ाई से वंचित बच्चे हमें लगातार याद दिलाएंगे कि यह महज मौसम की सामान्य घटना नहीं बल्कि एक चेतावनी है। जलवायु परिवर्तन अब भविष्य की चिंता नहीं बल्कि वर्तमान की कठोर सच्चाई है। सवाल यह है कि क्या हम इसे गंभीरता से लेकर रोकथाम की राह पकड़ेंगे या हर साल राहत और मुआवजे की रस्म अदायगी दोहराते रहेंगे। क्यों बदल रहा है मानसून का पैटर्न दरअसल, मानसून अब पहले जैसा नहीं रहा। कहीं बेहद कम बारिश होती है तो कहीं अचानक बादल फट जाते हैं और कुछ घंटों में महीनों का पानी बरस जाता है। हिमालय के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिससे नदियों में जलप्रवाह अचानक बढ़ जाता है। वैज्ञानिक बार-बार चेतावनी दे चुके हैं कि हिमालयी क्षेत्र जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा शिकार बनेगा और वर्तमान घटनाएं आने वाले भयावह समय की झलक मात्र हैं। मानवीय त्रासदी और प्रशासनिक विफलता इस आपदा का असर केवल भूगोल तक सीमित नहीं है बल्कि लाखों लोगों के जीवन पर पड़ा है। अपनों को खो चुके परिवारों के लिए यह आंकड़े नहीं बल्कि अधूरी कहानियां हैं। लाखों लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों के किसानों की खड़ी फसलें डूब गईं। स्कूल बंद हैं, अस्पतालों में दवाओं की कमी है और महामारी का खतरा मंडरा रहा है। लेकिन यह त्रासदी जितनी भीषण है, उससे भी बड़ा सवाल है कि हमारी नीति और तैयारी बार-बार क्यों विफल हो जाती है। हर साल बाढ़ आती है और हर साल वही दृश्य दोहराए जाते हैं। दिल्ली में यमुना बार-बार खतरे के निशान से ऊपर चली जाती है क्योंकि नालों और जलनिकासी तंत्र पर अतिक्रमण हो चुका है। हिमालयी राज्यों में अंधाधुंध सड़कें, होटल और बांध बनने से पहाड़ और असुरक्षित हो गए हैं। सरकारें राहत और मुआवजे पर तो जोर देती हैं लेकिन दीर्घकालिक रोकथाम और जल प्रबंधन पर कम ध्यान देती हैं। सही है कि यह समस्या केवल भारत की नहीं है। जलवायु संकट वैश्विक है लेकिन भारत जैसे देशों पर इसका असर कहीं ज्यादा है। हम वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में तीसरे स्थान पर हैं। उद्योग और शहरी उपभोग मॉडल प्रदूषण और उत्सर्जन को बढ़ा रहे हैं लेकिन सबसे अधिक पीड़ा गरीब और कमजोर वर्ग झेल रहा है। पहाड़ी इलाकों के छोटे किसान, मजदूर और आदिवासी इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रहे हैं। समाधान की राह समाधान असंभव नहीं है पर इसके लिए दृष्टिकोण बदलना होगा। हिमालयी राज्यों में संवेदनशील इलाकों की पहचान कर निर्माण पर रोक लगानी होगी। नदियों के किनारे फ्लड ज़ोन मैपिंग जरूरी है ताकि वहां नई आबादी बसाने से बचा जा सके। शहरी क्षेत्रों में ड्रेनेज और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य करना होगा। मौसम पूर्वानुमान को और सटीक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का उपयोग जरूरी है। आपदा प्रबंधन में स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित करनी होगी ताकि राहत और बचाव केवल सरकारी मशीनरी पर निर्भर न रहे। साथ ही विकसित देशों को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। जलवायु परिवर्तन का सबसे बड़ा कारण वही हैं। अब समय है कि वे कार्बन उत्सर्जन में कटौती करें और विकासशील देशों को जलवायु फंडिंग उपलब्ध कराएं। भारत को भी नवीकरणीय ऊर्जा की ओर और तेजी से बढ़ना होगा और विकास मॉडल को प्रकृति के अनुकूल बनाना होगा। उत्तर भारत की यह बाढ़ हमें आईना दिखाती है कि यदि हमने अब भी सबक नहीं सीखा तो आने वाले वर्षों में आपदाओं का यह सिलसिला और विकराल रूप लेगा। जब तक नीतियों और विकास की दिशा को बदलकर प्रकृति के साथ संतुलन नहीं साधा जाएगा, तब तक त्रासदियां हमारे जीवन का हिस्सा बनी रहेंगी। प्रकृति ने हमें चेताया है, अब जिम्मेदारी हमारी है कि हम उसे सुनें और अपनी दिशा बदलें। राजेश जैन Read more » listen to it and change your direction Nature has warned us भीषण बारिश
राजनीति आज़ादी के 78 साल का हासिल: थोड़ा है, थोड़े की जरूरत है August 12, 2025 / August 12, 2025 | Leave a Comment राजेश जैन 15 अगस्त 1947 को जब देश ने आज़ादी की सांस ली तो करोड़ों लोगों की आंखों में ऐसे देश का सपना था जो अपने पैरों पर खड़ा हो, जहां वैज्ञानिक सोच और सामाजिक समरसता को बढ़ावा मिले, हर इंसान को बराबरी का दर्जा और हर गांव-गली को शिक्षा की रौशनी हासिल हो । […] Read more » आज़ादी के 78 साल