राजनीति भारत का प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान नहीं चीन है July 1, 2025 / July 1, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी जब अंग्रेजों ने भारत को आजाद किया तो वो जाते-जाते भी भारत के साथ साजिश कर गए । उन्हें अच्छी तरह से पता था कि भारत भविष्य में बड़ी शक्ति के रूप में उभर सकता है । भारत बड़ी शक्ति बनकर उनके लिए भविष्य में चुनौती न बन जाए इसलिए भारत को दो टुकड़ों में बांट गए । यह हमारी गलत सोच है कि भारत का विभाजन हिन्दू-मुस्लिम मतभेद की वजह से हुआ था । वास्तव में उन्होंने दोनों समुदायों के बीच के मतभेदों को बढ़ाकर ऐसे हालात पैदा कर दिये गए कि विभाजन के लिए हमारे नेताओं को मजबूर होना पड़ा । पाकिस्तान बनने से न केवल भारत कमजोर हुआ बल्कि भारत को हमेशा के लिए उसका एक कट्टर दुश्मन मिल गया । पाकिस्तान अपनी पैदाइश से ही भारत को अपना सबसे बड़ा शत्रु मानता आ रहा है जबकि भारत ने कभी भी पाकिस्तान को अपने दुश्मन के रूप में नहीं देखा । आप सोचकर देखिए कि अगर पाकिस्तान के साथ हुए युद्धों में भारत की हार हुई होती तो पाकिस्तान ने भारत का क्या हाल किया होता । भारत ने कई युद्धों में पाकिस्तान को बुरी तरह से हराने के बावजूद उसके साथ मित्रों जैसा व्यवहार किया । वास्तव में पाकिस्तान अपनी पैदाइश से ही एक जिहादी मानसिकता वाले आत्मघाती आतंकवादी ही तरह व्यवहार कर रहा है । वो खुद को मिटाकर भी भारत को खत्म कर देना चाहता है । विदेशी शक्तियां पाकिस्तान की पैदाइश से ही उसका इस्तेमाल भारत को आगे बढ़ने से रोकने के लिए करती रही हैं । पहले अमेरिका और पश्चिमी देश पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे थे, अब चीन पाकिस्तान का इस्तेमाल कर रहा है । पाकिस्तान एक ऐसे गुंडे की तरह है जिसे पैसा देकर कोई भी भारत के खिलाफ मैदान में उतार सकता है । इसकी एक वजह यह भी है कि पाकिस्तान अपनी शक्ति के बल पर भारत के खिलाफ ज्यादा कुछ नहीं कर सकता । सवाल यह है कि अगर कोई अन्य देश सह नहीं देता तो क्या पाकिस्तान भारत का दोस्त बन जाता । सच्चाई कड़वी है लेकिन सच यही है कि पाकिस्तान का अस्तित्व ही भारत विरोध पर टिका हुआ है । कहा जाता है कि देशों के पास उनकी सेना होती है लेकिन पाकिस्तान की सेना ऐसी है जिसके पास एक देश है । पाकिस्तानी सेना अपनी जनता को भारत के खिलाफ भड़काती रहती है कि अगर वो न हो तो भारत पाकिस्तान को खत्म कर देगा । यही कारण है कि पाकिस्तान की आम जनता भी भारत के प्रति नफरत से भरी हुई है और वो सेना का भारी-भरकम खर्च उठा रही है । पाकिस्तान के कारण भारत का सबसे बड़ा नुकसान यह हुआ है कि वो अपने असली दुश्मन को कभी पहचान नहीं सका । पूर्व रक्षामंत्री जॉर्ज फर्नांडिस ने कहा था कि चीन भारत का नम्बर वन दुश्मन है लेकिन उनकी यह बात किसी को समझ नहीं आई । प्रथम प्रधानमंत्री नेहरू जी चीन को मित्र देश मानते थे और उसके साथ मिलकर शांति के कबूतर उड़ाया करते थे । चीन से मित्रता हासिल करने के लिए उन्होंने भारत के हितों के साथ कई समझौते किये । वो चीन को खुश करते रहे ताकि वो भारत का दोस्त बना रहे लेकिन उनकी लाख कोशिशों के बावजूद चीन ने 1962 में भारत पर हमला करके भारत के बड़े भूभाग पर कब्जा कर लिया । चीन के इतने बड़े धोखे के बाद कुछ सालों तक भारत सरकार चीन के प्रति सतर्क रही लेकिन फिर एक बार उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाया गया । यूपीए शासन के दौरान कांग्रेस ने चीन के साथ एक एमओयू साइन किया है लेकिन इसमें क्या है, यह अभी तक देश की जनता को पता नहीं है । आज राहुल गांधी चीन के विकास का ढिंढोरा पीटते हैं लेकिन वो यह नहीं बताते कि 1980 तक चीन भारत के बराबर ही था लेकिन कांग्रेस की नीतियों के कारण भारत पिछड़ता गया और चीन आगे बढ़ गया । कितनी अजीब बात है कि एक लोकतांत्रिक देश होने के बावजूद भारत वामपंथी नीतियों पर चलकर आर्थिक बर्बादी की ओर जा रहा था जबकि चीन वामपंथी देश होकर पूंजीवाद के बल पर आर्थिक विकास की सीढ़ियां तेजी से चढ़ रहा था । वाजपेयी सरकार के समय भारत का चीन के साथ एक अरब डॉलर के घाटे का व्यापार था लेकिन यूपीए शासन के बाद यह घाटा सौ अरब डॉलर तक पहुंच गया । मोदी सरकार के आने के बाद इसमें बढ़ोतरी बेशक न हुई हो लेकिन यह कम नहीं हो पा रहा है । इसकी बड़ी वजह यह है कि यूपीए शासन के दौरान हमारी अर्थव्यवस्था चीन पर इतनी ज्यादा निर्भर हो गई है कि हम चाह कर भी चीन से आयात कम नहीं कर पा रहे हैं । सवाल यह है कि हम अपने ही पैसे से दुश्मन को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं । वास्तव में चीन ने अमेरिका के सहयोग से अपने आपको दुनिया की फैक्टरी बना लिया है । यह हमारे देश की विदेश नीति की बहुत बड़ी विफलता है कि दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र होने के बावजूद अमेरिका ने हमें न चुनकर चीन को इस काम के लिये चुना । जो चीन 1980 में हमारे बराबर था, वो आज हमारे से पांच गुणा बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है । हम पाकिस्तान के साथ ऐसे उलझे रहे कि हम चीन की तरफ देख ही नहीं पाए । हम यह पहचान नहीं सके कि हमारा असली दुश्मन चीन है और उसकी बढ़ती ताकत एक दिन हमारे लिए सबसे बड़ी समस्या बन जाएगी । हम पाकिस्तान से खुद को अलग करना चाहते थे लेकिन आतंकवाद को हथियार बनाकर उसने हमें उलझाये रखा । पाकिस्तान के खिलाफ सख्त कदम इसलिए नहीं उठाए गए क्योंकि पाकिस्तान परमाणु बम की धमकी देता था । पाकिस्तान और चीन ने एक जबरदस्त गठजोड़ बना लिया है जो हमारी सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है । 2014 में मोदी सरकार के सत्ता में आने के बाद चीन के खतरे को सही तरह से पहचाना गया है । यूपीए शासन में चीन सीमा पर बुनियादी ढांचे के विकास की अनदेखी की गई क्योंकि रक्षा मंत्री का कहना था कि चीन इसका फायदा उठाकर हमारे देश में घुस जाएगा । मोदी सरकार ने बुनियादी ढांचे का विकास करके बता दिया कि यूपीए सरकार की सोच कितनी गलत थी । मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र में खुद को आत्मनिर्भर बनाने की ओर कदम बढ़ाए जबकि पहले हम पूरी तरह से विदेशी हथियारों पर निर्भर थे । ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया कि भारतीय हथियारों में कितना दम है और भारत हथियारों के मामले में कितना आत्मनिर्भर हो चुका है । इस युद्ध में पाकिस्तान ने चीनी हथियारों का जबरदस्त इस्तेमाल किया है लेकिन हमारी सेना ने दिखा दिया कि वो चीनी हथियारों का कैसे मुकाबला कर सकती है । भारत की जबरदस्त रक्षा तैयारियां बता रही हैं कि हम पाकिस्तान को ध्यान में रखते हुए अपनी तैयारी नहीं कर रहे हैं । चीन को भी समझ आ चुका है कि भारत उसका मुकाबला करने की तैयारी कर रहा है । पहले डोकलाम और फिर गलवान में भारतीय सेना ने बता दिया है कि भारत चीन से मुकाबले के लिए तैयार है । भारत इसकी भी तैयारी कर रहा है कि अगर चीन और पाकिस्तान एक साथ हमला कर दें तो कैसे मुकाबला करना है । ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि पाकिस्तान के मुकाबले हम सैन्य के रूप से इतने ज्यादा सक्षम हैं कि उसकी ज्यादा परवाह करने की जरूरत नहीं है । हमारा असली दुश्मन पाकिस्तान नहीं चीन है और उसकी बढ़ती आर्थिक ताकत है । भारत उसके मुकाबले के लिये उसके विकल्प के रूप में दुनिया के सामने खुद को पेश कर रहा है और इसका असर दिखाई देने लगा है । विदेशी कंपनियों को भारत में चीन से मुकाबला करने की क्षमता दिखाई दे रही है । आज भारत दुनिया का सबसे किफायती उत्पादन करने वाला देश बन गया है जो कि पहले चीन था । हम जल्दी ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाले हैं लेकिन चीन से मुकाबला करना अभी भी मुश्किल दिखाई दे रहा है । अब समय आ गया है कि हम पाकिस्तान से खुद को अलग करके चीन की तरफ ध्यान दें । हम बेशक चीन के खिलाफ सैन्य तैयारियां कर सकते हैं लेकिन जब तक आर्थिक रूप से उसके मुकाबले खड़े नहीं होते, तब तक हम कमजोर ही रहेंगे । सैन्य रूप से मजबूत होना जरूरी है लेकिन उससे भी ज्यादा जरूरी है कि दुश्मन से आर्थिक रूप से कमजोर न हुआ जाए । अगर किसी वजह से लड़ाई लंबी हो जाए तो आर्थिक ताकत ही काम आती है । चीन के साथ मित्रता रखते हुए हमें उससे मुकाबले को तैयार भी रहना है । जब तक हम आर्थिक रूप से मजबूत नहीं हो जाते, उसके उकसावे में नहीं आना है । हमारा मीडिया और जनता पाकिस्तान को जितना महत्व देते हैं और उससे बेहतर होने की खुशी मनाते हैं, उससे बाहर निकलने की जरूरत है । अब हमारा ध्यान सिर्फ चीन पर होना चाहिए क्योंकि पाकिस्तान भी अब सिर्फ उसका मोहरा भर रह गया है । चीन भारत के खिलाफ बांग्लादेश को भी तैयार कर रहा है । इसके अलावा वो म्यांमार में भी अपना प्रभाव बढ़ा रहा है । हमें चीन की हरकतों पर कड़ी नजर रखनी होगी क्योंकि वो नहीं चाहता है कि भारत एक बड़ी आर्थिक शक्ति बन जाए । राजेश कुमार पासी Read more » India's rival is China not Pakistan भारत का प्रतिद्वंद्वी चीन
राजनीति कथावाचक, समाज और जातिवाद की राजनीति June 30, 2025 / June 30, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी हमारे देश में जाति-धर्म का मुद्दा राजनीति करने के लिए नेताओं को खूब लुभाता है । जैसे ही उनको ऐसा अवसर मिलता है वो उसे तुरंत लपक लेते हैं क्योंकि इस मुद्दे पर कुछ नहीं करना होता, सिर्फ लोगों को भड़काना होता है । ऐसा ही एक मुद्दा उत्तर प्रदेश की राजनीति […] Read more » कथावाचक
राजनीति रूस-चीन असंभव काम करने की कोशिश कर रहे हैं June 27, 2025 / June 27, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी वैश्विक राजनीति आज ऐसे मोड़ पर खड़ी है जहां कोई भी देश दूसरे देश पर विश्वास करने को तैयार नहीं है और दूसरी तरफ दुनिया एकध्रुवीय विश्व व्यवस्था से निकलकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर चल पड़ी है । अब भी अमेरिका अकेली महाशक्ति है लेकिन रूस, चीन और भारत उसे चुनौती दे रहे हैं । अमेरिका को यह बर्दाश्त नहीं है इसलिए वो रूस और चीन के रास्ते में रोड़े अटका रहा है । अमेरिका पहले भारत को साथ लेकर चीन को आगे बढ़ने से रोकना चाहता था लेकिन अब उसे भारत से भी डर लगने लगा है। अमेरिका सोचता है कि अगर भारत को नहीं रोका गया तो वो दूसरा चीन बन सकता है। अमेरिका ने रूस को यूक्रेन के साथ युद्ध में उलझाया हुआ है लेकिन वो रूस को आगे बढ़ने से रोक नहीं पा रहा है। भारत और चीन की मदद से रूस न केवल अपनी अर्थव्यवस्था को बचाने में कामयाब रहा है बल्कि युद्ध भी जारी रखे हुए है । अमेरिका चीन को तो रूस की मदद करने से नहीं रोक सकता लेकिन भारत को रोकने की पूरी कोशिश कर रहा है। रूस को यह बात समझ आ गई है कि अगर अमेरिका का मुकाबला करना है तो उसे चीन और भारत को साथ लाना पड़ेगा. तभी अमेरिका का मुकाबला किया जा सकता है । रूस की सोच अपनी जगह सही हो सकती है लेकिन वर्तमान हालातों में यह काम असंभव लगता है कि चीन और भारत को साथ लाया जा सके । कुछ मुद्दों पर भारत चीन के साथ मिलकर काम कर सकता है लेकिन उसके साथ भारत के हितों का इतना टकराव है कि एक सीमा से आगे भारत नहीं बढ़ सकता । वास्तव में भारत के लिए चीन से ज्यादा अमेरिका के साथ मिलकर चलना ज्यादा आसान है । इसके अलावा भारत के अमेरिका के सहयोगी देशों के साथ भी अच्छे सम्बन्ध हैं । भारत और चीन की दोस्ती कितनी मुश्किल है, ये बात चीन में चल रही एससीओ संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक से पता चल जाती है । इस संगठन के सदस्य देशों की संख्या दस है और इसमें पाकिस्तान और ईरान भी शामिल हैं । चीन आजकल पाकिस्तान को अपने प्राक्सी के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है. अब ये अलग बात है कि अमेरिका की भी यही कोशिश है । पाकिस्तान का भी अजीब है . वो कभी चीन की गोदी में बैठ जाता है तो कभी अमेरिका की गोदी में चला जाता है । वास्तव में दोनों ही देश पाकिस्तान को भारत के खिलाफ इस्तेमाल कर रहे हैं । भारत का दबाव था कि एससीओ के साझा घोषणापत्र में आतंकवाद का मुद्दा शामिल किया जाए क्योंकि ये बैठक ही क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर हो रही थी । चीन ने साझा घोषणा पत्र में बलूचिस्तान का जिक्र करके भारत को घेरने की कोशिश की लेकिन पहलगाम का जिक्र तक नहीं किया । भारतीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस बैठक में शामिल होने के लिए चीन गए हुए हैं, उन्होंने सबके सामने पाकिस्तान को इस वैश्विक मंच पर बेनकाब करने का काम किया । उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि आतंकवाद के अपराधियों और प्रायोजकों को जवाबदेह ठहराना ही होगा और इससे निपटने में दोहरे मापदंड नहीं होने चाहिए । उन्होंने कहा कि कुछ देश आतंकवादियों को पनाह देने के साथ आतंकवाद को नीतिगत हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं । उन्होंने कहा कि हमारे क्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती शांति, सुरक्षा और विश्वास की कमी से संबंधित है । उनका कहना है कि आतंकवाद को पालना और गलत हाथों में परमाणु हथियार होना दोनों गलत हैं और हमें अपनी सामूहिक सुरक्षा के लिए इन बुराइयों के खिलाफ एकजुट होना चाहिए । इसके अलावा उन्होंने कहा कि जो लोग अपने संकीर्ण और स्वार्थी उद्देश्यों के लिए आतंकवाद को प्रायोजित, पोषित और उपयोग करते हैं, उन्हें इसके परिणाम भुगतने होंगे । उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए कहा कि हमने आतंकवाद का समुचित जवाब दिया है और भविष्य में भी देंगे । उन्होंने चीन पर निशाना लगाते हुए कहा कि आतंकवाद से निपटने में दोहरे मापदंडों के लिए कोई जगह नहीं है । उन्होंने मंच से दोहराया कि भारत आतंकवाद के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति पर चल रहा है । चीन और पाकिस्तान ने आतंकवाद के मुद्दे से दुनिया का ध्यान हटाना चाहा लेकिन राजनाथ सिंह ने साझा घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया जिसके कारण एससीओ का संयुक्त बयान जारी नहीं हो सका । इससे पहले चीन गए हुए एनएसए अजित डोभाल ने भी चीन को उनके देश में ही सुना दिया कि आतंकवाद के प्रति उसका दोहरा रवैया भारत बर्दाश्त नहीं करेगा । वास्तव में भारत पाकिस्तान के आतंकवादियों के खिलाफ जब भी संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव लाया है, उसे चीन ने वीटो कर दिया है ।चीन के हथियारों से ही पाकिस्तान भारत से लड़ रहा था और इसके अलावा भी चीन ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसकी मदद की थी । चीन अन्य मुद्दों पर भारत के साथ मिलकर चल रहा है लेकिन उसके भारत के साथ मतभेद कम नहीं हैं । रूस आरआइसी बनाना चाहता है जिसमें रूस, चीन और भारत शामिल होंगे लेकिन यह रूस की कोई नई सोच नहीं है । पिछले बीस सालों से रूस इसकी कोशिश कर रहा है लेकिन उसे कामयाबी नहीं मिली है । रूस चाहता है कि भारत और चीन इस तरह से मिल जाएं जैसे अमेरिका और यूरोप मिलकर चलते हैं लेकिन यह असंभव लगता है । वैसे देखा जाए तो रूस की कोशिश से भारत और चीन के बीच विवादों में कमी आती जा रही है । यही कारण है कि चीन ने पिछले वर्ष एक कार्टून बनाया था जिसमें हाथी और ड्रैगन मिलकर नाचते हुए दिखाए गए थे । ड्रैगन चीन का और हाथी भारत का प्रतीक मानते हुए यह दर्शाने की कोशिश की गई थी कि दोनों देश मिलकर चल सकते हैं । चीन के साथ समस्या तब शुरू हो जाती है जब आतंकवाद पर उसके दोहरे रवैये की बात आती है । वो आज भी हमारे अक्साई चीन पर कब्जा करके बैठा हुआ है । इसके अलावा भी चीन भारत के कई इलाकों पर अपना दावा पेश करता रहता है । अरुणाचल प्रदेश का तो उसने नाम भी बदला हुआ है । इसके अलावा भारत का चीन के साथ व्यापारिक संतुलन भी समस्या है क्योंकि ये बहुत ज्यादा चीन की तरफ झुका हुआ है । भारत चाहकर भी कुछ नहीं कर पा रहा है क्योंकि चीन पर भारत की निर्भरता बहुत ज्यादा है लेकिन एक बात तो सच है कि अमेरिका अब दुनिया पर कुछ ज्यादा ही दादागिरी चला रहा है. भारत और चीन की ये साझी समस्या है । पाकिस्तान सिर्फ चीन की तरफ से समस्या नहीं है बल्कि अमेरिका की तरफ से भी है लेकिन भारत ने सिंधु जल समझौते के जरिये पाकिस्तान से निपटने का रास्ता निकाल लिया है । आतंकवाद के प्रति भारत ने बेहद सख्त रवैया अपना लिया है, चीन ज्यादा देर तक पाकिस्तान की मदद नहीं कर सकता । भारत, चीन और रूस के मिलकर चलने को दुनिया के कई देश उम्मीद भरी नजरों से देख रहे हैं क्योंकि अमेरिकी दादागिरी से सारी दुनिया परेशान है । बेशक चीन के साथ भारत का आना असंभव लगता है लेकिन साझे हितों के लिए ये संभव हो सकता है । भारत और चीन दोनों ही जानते है कि अगर वो मिल जाए तो उनकी बहुत सी समस्याएं खत्म हो सकती है । हो सकता है कि दोनों देश दूसरे मुद्दों को को किनारे रखकर आगे बढ़ें । भविष्य में वो हो सकता है जो अभी असंभव लग रहा है और डोनाल्ड ट्रंप के कारण भी ये संभव हो सकता है क्योंकि वो अमेरिका को महान बनाने के चक्कर में दूसरे देशों के हितों की अनदेखी कर रहे हैं । राजेश कुमार पासी Read more » रूस-चीन
राजनीति इजराइल-ईरान युद्ध में कौन जीता, कौन हारा June 27, 2025 / June 27, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी इजराइल और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है लेकिन इस पर कई सवाल उठ रहे हैं। सवाल तो इस युद्ध पर भी उठ रहे हैं क्योंकि तीनों देश इस युद्ध में खुद को जीता हुआ बता रहे हैं। इजराइल और ईरान युद्ध लड़ रहे थे लेकिन अचानक अमेरिका ने इजराइल […] Read more » इजराइल-ईरान युद्ध
राजनीति क्या भारत सिंधु जल समझौता रद्द करने वाला है June 25, 2025 / June 25, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी बार-बार मोदी सरकार की तरफ से यह बयान आता रहता है कि ऑपरेशन सिंदूर जारी है, सिर्फ उसे रोका गया है । सवाल यह है कि बार-बार मोदी सरकार के मंत्री और नेता ऐसा बयान क्यों दे रहे हैं । इसकी वजह यह है कि सिंधु जल समझौता निलंबित करना भी ऑपरेशन सिंदूर का […] Read more » क्या भारत सिंधु जल समझौता रद्द करने वाला है
राजनीति राहुल गांधी का चुनाव आयोग पर हमला क्यों June 10, 2025 / June 10, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद ऐसा लगता है कि राहुल गांधी बौखला गए हैं । उन्हें समझ नहीं आ रहा है कि भाजपा का मुकाबला कैसे किया जाए, इसलिए वो उल्टे-सीधे बयान दे रहे हैं । पिछले 11 सालों से वो मोदी से लड़ते-लड़ते थक गए हैं और उन्हें आगे कोई उम्मीद दिखाई […] Read more » Why did Rahul Gandhi attack the Election Commission राहुल गांधी
राजनीति बर्बाद बांग्लादेश बन रहा एक नई मुसीबत June 4, 2025 / June 4, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी भारत का ये दुर्भाग्य है कि वो ऐसे देशों से घिरा हुआ है जो आर्थिक और राजनीतिक रूप से बर्बादी की ओर जा रहे हैं । पाकिस्तान तो अपनी पैदाइश से ही भारत का दुश्मन देश रहा है या यूं कहो कि उसकी पैदाइश ही भारत विरोध में हुई थी और वो उसी […] Read more » Ruined Bangladesh is becoming a new problem बर्बाद बांग्लादेश
राजनीति भारतीय राजनीति का सकारात्मक पक्ष सामने आया June 2, 2025 / June 2, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी राजनीति में सिर्फ नकारात्मकता ही बची है ऐसा लगता है लेकिन सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल ने दिखाया है कि भारतीय राजनीति का एक सकारात्मक पहलू यह है कि जब भारत का नेता विदेश में जाता है तो वो सिर्फ भारतीय रह जाता है और उसके लिए अपनी दलगत राजनीति पीछे छूट जाती है । यह बात सभी के लिए नहीं कही जा सकती लेकिन इस सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में गए हुए विपक्षी नेताओं के लिए जरूर कही जा सकती है । राजनीति में नकारात्मकता के पीछे भागने वाले समाज और मीडिया के लिए ये अंचभा है कि विपक्षी नेता विदेशी धरती से मोदी की भाषा बोल रहे हैं । सोशल मीडिया के लिए तो यह ज्यादा परेशानी की बात है क्योंकि सोशल मीडिया में सिर्फ नकारात्मकता ही बची हुई है । वहां हर आदमी को अपने नेता और पार्टी के अलावा सब कुछ बुरा ही दिखाई देता है । सोशल मीडिया में कोई सच न तो देखता है और न ही समझता है । तर्क और तथ्य की बात सोशल मीडिया में करना बेमानी होता जा रहा है । ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने पाकिस्तान की ऐसी बुरी गत बना दी थी कि न तो वो अपनी रक्षा करने के काबिल रहा और न ही उसके पास भारत पर आक्रमण करने की क्षमता बची । इसके बावजूद आज भी सोशल मीडिया में ज्यादातर वामपंथी, सेकुलर और मुस्लिम बुद्धिजीवी भारत को पाकिस्तान का डर दिखा रहे हैं । जब विदेशी मीडिया और विदेशी रक्षा विशेषज्ञ भी मान चुके हैं कि इस युद्ध में भारत की एकतरफा जीत हुई है तो ये लोग सोशल मीडिया में बता रहे हैं कि चीन के युद्धक विमानों से पाकिस्तान ने भारत के कई राफेल मार गिराए हैं । ये लोग आज भी भारत को पाकिस्तान को मिले चीनी हथियारों का डर दिखा रहे हैं । चीन ने पाकिस्तान को अपने स्टेल्थ विमान देने की बात कही है, इससे यह लोग इतना डरे हुए हैं कि अगर यह विमान पाकिस्तान में आ जाते हैं तो भारत को तबाह कर देंगे । भारत ने पाकिस्तान की वायु रक्षा प्रणाली समाप्त कर दी थी और इसके बाद भारत का हर विमान स्टेल्थ हो गया था । जब आप किसी के आकाश पर कब्जा कर लेते हैं तो आपका हर विमान स्टेल्थ बन जाता है और भारत ने ऐसा ही किया था । जहां भारत में भारत-पाक युद्ध को लेकर अलग ही राग अलापा जा रहा है, वही दूसरी तरफ सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में विपक्षी नेताओं ने पूरी दुनिया में भारत का पक्ष इस मुखरता और निष्पक्षता के साथ रखा है कि दुनिया को सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं में अंतर समझना मुश्किल हो रहा है । ऐसा लगता है कि ये भूल गए हैं कि विपक्षी नेता हैं और उनकी पार्टी देश मे कुछ और ही लाइन पर चल रही है । विशेष तौर पर कांग्रेस के नेताओं के बारे में तो ऐसा कहा ही जा सकता है कि विदेशी धरती पर ये नेता अलग भाषा बोल रहे हैं तो दूसरी तरफ कांग्रेस देश में अलग लाइन पर चल रही है । इन नेताओं को इससे कोई मतलब नहीं है कि देश में उनकी पार्टी किस लाइन पर चल रही है । उनके बयानों से ऐसा लगता है कि वो अपने मन की बात बोल रहे हैं । ये अजीब है कि जब यही नेता भारत में बोलते हैं तो लगता है कि ये कुछ देखना नहीं चाहते, समझना नहीं चाहते या इन्हें समझ नहीं आ रहा है । विदेशी धरती पर इनके भाषणों को सुनकर महसूस होता है कि उनकी राजनीतिक समझ कहीं से भी कम नहीं है लेकिन घरेलू राजनीति इनकी वास्तविक समझ का बाहर नहीं आने देती, पार्टी के अनुशासन के कारण उन्हें वही बोलना होता है जो इन्हें पार्टी ने कहा होता है । मेरा मानना है कि बहुत मुश्किल हो रहा होगा इन नेताओं के लिए कि विदेशी धरती पर उन्हें अपनी पार्टी लाइन से विपरीत जाकर अपने देश की बात को रखना पड़ रहा है । ऐसी मुश्किल भाजपा और एनडीए के दूसरे नेताओं की नहीं है क्योंकि उन्हें वही बोलना पड़ रहा है जो उनकी पार्टी की लाइन है । यही कारण है कि विपक्षी नेताओं के बयानों की मीडिया में बहुत ज्यादा चर्चा हो रही है लेकिन भाजपा नेताओं की कोई बात भी नहीं कर रहा है । भाजपा नेता जब वापिस आयेंगे तो उन्हें कोई समस्या नहीं आने वाली है लेकिन विपक्षी नेताओं को भारत आकर दोबारा अपनी बात से अलग हटकर बोलना मुश्किल होने वाला है । सवाल यह है कि क्या ये नेता यह नहीं जानते होंगे कि जो कुछ वो यहां बोल रहे हैं उन्हें इसके विपरीत जाकर देश में बोलना मुश्किल होगा । वास्तव में यह नेता जानते हैं कि विदेश में वो अपने देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनके कंधों पर देश ने बड़ी जिम्मेदारी डाली हुई है । ये नेता अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए वही कर रहे हैं जो उन्हें करना चाहिए । ये विदेशी मीडिया और जनता के लिए बड़ा अजीब है कि सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के स्वर में कहीं भी विभिन्नता दिखाई नहीं दे रही है, सभी एक स्वर में अपनी बात रख रहे हैं। विदेशियों के लिए ये फर्क करना मुश्किल हो रहा है कि कौन सत्ता पक्ष से है और कौन विपक्ष से आया है । जहां भारत में मोदी सरकार की विदेश नीति को असफल करार दिया जा रहा है, वहीं ये नेता भारत की विदेश नीति को सफल बनाने का काम कर रहे हैं । देखा जाए तो ये नेता देश के लिए भी बड़ा मुश्किल काम कर रहे हैं क्योंकि पाकिस्तान को भारत पर हुए आतंकवादी हमलों के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराना इतना आसान काम नहीं है। जो लोग भारत की विदेश नीति को असफल करार दे रहे हैं उन्हें अहसास नहीं है कि अपने ही देश के आतंकियों द्वारा हमला करने पर किसी दूसरे देश की संप्रभुता को दरकिनार करके उसके इलाकों पर हमला किया गया है। जो लोग कहते हैं कि दुनिया भारत के साथ नहीं खड़ी हुई उन्हें यह दिखाई नहीं दे रहा है कि पाकिस्तान पर हमला करने के बावजूद दुनिया भारत के खिलाफ खड़ी नहीं हुई है । यही भारत की विदेश नीति की सबसे बड़ी सफलता है लेकिन कोई यह समझने को तैयार नहीं है । सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इसी काम को बेहतर तरीके से करने गया है कि भारत ने पाकिस्तान पर हमला नहीं किया है उसने सिर्फ उन आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया है जहां से भारत पर वर्षों पर हमला किया जा रहा है । भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ जो सैन्य कार्यवाही की है वो पाकिस्तानी हमले के जवाब में की गई है । जहां तक चीन, तुर्की और अजरबाइजान का सवाल है कि वो पाकिस्तान के साथ खड़े हैं तो भारत भी चीन के दुश्मन देशों के साथ पिछले कई वर्षों से खड़ा हुआ है और दूसरी तरफ भारत तुर्की और अजरबाइजान के विरोध में आर्मेनिया के साथ खड़ा हुआ है। भारत पर तो यहां तक आरोप लगाया जा रहा है कि भारत ही आर्मेनिया की रक्षा रणनीतियां बना रहा है और उसी के अनुसार हथियारों की सप्लाई कर रहा है जिसके कारण तुर्की और अजरबाइजान हताश हैं । इसके अलावा भारत में भी कई विपक्षी नेताओं ने भारत की कार्यवाही का समर्थन किया है । फारूक अब्दुल्ला और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने पाकिस्तान का जैसा विरोध पहलगाम हमले के बाद किया है और ऑपरेशन सिंदूर का जैसा समर्थन किया है, वो उनकी अब तक की राजनीति से बिल्कुल अलग दिखाई दे रहा है । महबूबा मुफ्ती के बयानों का विरोध करते हुए उमर अब्दुल्ला ने कहा कि वो पाकिस्तान के लिए बात कर रही है लेकिन ये ऐसा वक्त है जब हमें देश के साथ खड़े होना है । असदुद्दीन ओवैसी ने पाकिस्तान के खिलाफ जो मुहिम चलाई है उससे पाकिस्तान में सबसे ज्यादा चर्चा उन्हीं की हो रही है । पाकिस्तान में मोदी के बाद सबसे ज्यादा आलोचना ओवैसी की ही हो रही है । कांग्रेस नेता शशि थरूर ने मोदी सरकार के लिए वो काम किया है जो भाजपा के दूसरा नेता भी नहीं कर पाए हैं । थरूर का कहना है कि देश जिस दौर से गुजर रहा है उसमें देश के साथ खड़े होने के अलावा कोई रास्ता नहीं है । वो अपने आपको खुशकिस्मत मानते हैं कि उन्हें इस समय देश की सेवा करने का अवसर मिला है और इससे वो खुद को सम्मानित महसूस करते हैं । कांग्रेस ने भाजपा नेता अटल बिहारी वाजपेयी जी को देश का पक्ष रखने के लिए विदेशी धरती पर भेजा था लेकिन मोदी जी ने तो एक नहीं बल्कि कई विपक्षी नेताओं को यह मौका दिया है । बड़ी बात यह है कि इन नेताओं ने न तो मोदी जी को निराश किया और न ही देश को निराश किया बल्कि पूरी दुनिया को यह संदेश चला गया कि संकट के समय पूरा भारत एक है । दुनिया ने यह भी देखा कि भारत का लोकतंत्र कितना मजबूत है, जहां सत्ताधारी दल विपक्षी नेताओं को देश का पक्ष रखने के लिए भेज देता है और विपक्षी नेता घरेलू राजनीति को दरकिनार करके सरकार की बात बेहतर तरीके से दुनिया के सामने रखते हैं । जो काम भारत के लिए असदुद्दीन औवेसी, शशि थरूर, प्रियंका चतुर्वेदी, सलमान खुर्शीद, कनिमोझी, सुप्रिया फूले जैसे कई विपक्षी नेताओं ने किया है उसके कारण पूरी दुनिया को पता चल गया है कि दुश्मन के खिलाफ भारत एक है । Read more » The positive side of Indian politics came to the fore भारतीय राजनीति का सकारात्मक पक्ष
राजनीति आतंकवाद को आतंकित करने की मोदी नीति May 28, 2025 / May 28, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी सैन्य नीति में कहा जाता है, आक्रमण ही सबसे बढ़िया रक्षा है । अब ऐसा लगता है कि मोदी सरकार इस नीति पर चल पड़ी है । पाकिस्तान द्वारा फैलाए जा रहे आतंकवाद के खिलाफ हम पिछले 45 सालों से बचाव की नीति पर चल रहे थे । इसका नतीजा यह था कि आतंकवादी पूरे देश […] Read more » Modi's policy is to terrorise terrorism आतंकवाद को आतंकित आतंकवाद को आतंकित करने की मोदी नीति
राजनीति संकटकाल में घिनौनी राजनीति May 22, 2025 / May 22, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी राजनीति में टाइमिंग बहुत महत्वपूर्ण होती है, कब क्या करना है, ये बात अगर आपको पता है तो आप राजनीति में सफल हो सकते हैं लेकिन लगता है कि कांग्रेस की राजनीतिक समझदारी को ग्रहण लग गया है । जब देश युद्ध के दौर से गुजर रहा हो तो उस समय शासन […] Read more » indian congress Dirty politics in times of crisis on operation sindoor संकटकाल में घिनौनी राजनीति
राजनीति ऑपरेशन सिंदूर से भारत ने क्या हासिल किया May 20, 2025 / May 20, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी पाकिस्तान के आतंकियों द्वारा कश्मीर के पर्यटन स्थल पहलगाम में 26 भारतीयों की बड़ी बेरहमी से हत्या की गई थी। आतंकियो ने पर्यटकों का धर्म पूछ-पूछ कर हिन्दू पुरुषों को अपना शिकार बनाया । हिंदुओं की धार्मिक पहचान जानने के लिए उनकी पैंट उतारकर देखा गया कि वो हिन्दू ही हैं । इस घटना […] Read more » What did India achieve from Operation Sindoor ऑपरेशन सिंदूर
राजनीति सीएजी की रिपोर्ट ने केजरीवाल की पोल खोल दी February 27, 2025 / February 27, 2025 | Leave a Comment राजेश कुमार पासी अन्ना आंदोलन के दौरान केजरीवाल ने कैग की रिपोर्ट का हवाला देकर ही कांग्रेस पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे । केजरीवाल कहते थे कि वो जब सत्ता में आएंगे तो इस रिपोर्ट के आधार पर कार्यवाही करेंगे । इस रिपोर्ट को आधार बनाकर ही अन्ना आंदोलन के दौरान लोकपाल कानून बनाने […] Read more » CAG report exposed Kejriwal सीएजी की रिपोर्ट