सुरेंदर पाल

लेखक माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल के जनसंचार विभाग में सहायक प्राध्यापक हैं। Mobile:- 9993109267

मोदी प्रधानमंत्री हैं, ब्रांड एम्बेस्डर नहीं

दृश्य और छवियां लोगों के ज़ेहन में लम्बे समय तक ताज़ा रहती हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की फोटो और वीडियो का प्रयोग करके इन कंपनियों ने जो विज्ञापन जारी किये थे, वे भी अभी तक अधिकांश उपभोक्ताओं के ज़ेहन में ताजा ही होंगे। ऐसे में क्या इन कंपनियों द्वारा महज़ माफी मांग लेना काफी है। एक सवाल यह भी उठता है कि क्या सचमुच देश की इन नामी कंपनियों को ऐसे किसी कानून या गाइडलाइन की जानकारी नहीं थी या यह कृत्य जान-बूझकर संभावित मुनाफे के दृष्टिगत किया गया था।