घटनाओं की ताक पर “विकास की सड़क”: मेरा गाँव मेरी सड़क

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प्रदीप रावत- गुप्तकाशी से अगर आप सल्या तुलंगा ल्वाणी के लिए सल्या- तुलंगा मोटर मार्ग से आप गुजर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए, आप कभी भी हादसे का शिकार हो सकते हैं. यह सड़क कहने को तो वर्ल्ड बैंक के अधीन है और पिछले चार वर्षों से लगातार सड़क के पक्कीकरण व डामरीकरण के… Read more »

खतरे में है भारत की सांस्कृतिक अखंडता और विरासत

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  डॉ अर्पण जैन ‘अविचल’ भारत देश एक बहु-सांस्कृतिक परिदृश्य के साथ बना एक ऐसा राष्ट्र है जो दो महान नदी प्रणालियों, सिंधु तथा गंगा, की घाटियों में विकसित हुई सभ्यता है, यद्यपि हमारी संस्कृति हिमालय की वजह से अति विशिष्ट भौगोलीय क्षेत्र में अवस्थित, जटिल तथा बहुआयामी है, लेकिन किसी भी दृष्टि से अलग-थलग… Read more »

हिन्दुओं के चार धामों में से एक जगन्नाथ पुरी मंदिर

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-अशोक “प्रवृद्ध” भारत के उड़ीसा राज्य के समुद्र तटवर्ती शहर पुरी में भगवान जगन्नाथ अर्थात श्रीकृष्ण को समर्पित श्री जगन्नाथ मंदिर को हिन्दुओं के चार धामों में से एक माना जाता है। जगन्नाथ शब्द का अर्थ जगत अर्थात ब्रह्माण्ड के स्वामी होता है। इस जगत के स्वामी की नगरी ही जगन्नाथपुरी अथवा पुरी कहलाती है।… Read more »

हिंदू पाकिस्तान के मायने…

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वीरेन्द्र सिंह परिहार गत दिनों कांग्रेस पार्टी के नेता शशि थरुर ने कहा कि यदि भाजपा को 2019 के चुनावों में पुनः बहुमत मिलता है तो संविधान का अस्तित्व मिट जाएगा और देश हिंदू पाकिस्तान में बदल जाएगा। संविधान का अस्तित्व खतरे में है, यह बातें तो आए दिन मोदी विरोधियों, भाजपा विरोधियों एवं संघ… Read more »

जल संरक्षण की दिशा में जनमैत्री की अनोखी पहल

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पंकज सिंह बिष्ट   कुदरत ने पृथ्वी को कई अनमोल नेमतों से नवाज़ा है। इसमें सबसे बड़ी नेमत पानी को ही माना जाता है। पानी के बिना आप कितने दिन खुद का बजूद बनाये रख सकते हैं? जरा कल्पना करके देखिए। कल्पना मात्र से ही गला सूखने लगता है। लेकिन जल्द ये डरावना ख़्वाब हक़ीक़त में बदलने वाला… Read more »

आधुनिक विचारों में हमारे कुछ मौलिक विचार कहीं खो गए

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डॉ नीलम महेंद्र नारी, स्त्री, महिला वनिता,चाहे जिस नाम से पुकारो नारी तो एक ही है। ईश्वर की वो रचना जिसे उसने सृजन की शक्ति दी है, ईश्वर की वो कल्पना जिसमें प्रेम त्याग सहनशीलता सेवा और करुणा जैसे भावों  से भरा ह्रदय  है। जो  शरीर से भले ही कोमल हो लेकिन इरादों से फौलाद… Read more »

सेल्फी का  बढ़ता उत्साह अथवा लत 

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एस के बरनी वर्तमान में  मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले  लोगों में शायद ही कोई ऐसा होगा जिसने सेल्फी का नाम ना सुना हो। आज ऐसा कोई शख्स नहीं जिसे सेल्फी से नफरत हो। पिछले कुछ सालों से सेल्फी का उत्साह निरंतर  बढ़  रहा है। बच्चे हों  या  युवा हों  या  बुजुर्गों  सेल्फी  के प्रति… Read more »

          राजनीतिक आंसुओं का रासायनिक विश्लेषण 

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  – विजय कुमार, आंसू का साहित्य में बड़ा महत्व है। भाषा कोई भी हो, पर आंसू की खुराक के बिना उसकी गाड़ी आगे नहीं बढ़ती। न जाने कितनी कविता, शेर, गजल, कहानी और उपन्यासों के केन्द्र में आंसू ही हैं। सुमित्रानंदन पंत के शब्दों में – वियोगी होगा पहला कवि, आह से उपजा होगा… Read more »

“ऋषि दयानन्द का वर्ण व्यवस्था पर महत्वपूर्ण उपदेश”

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–मनमोहन कुमार आर्य, ऋषि दयानन्द ने अपने विश्व प्रसिद्ध ‘सत्यार्थप्रकाश’ ग्रन्थ में वर्ण व्यवस्था पर विस्तार से प्रकाश डाला है और वेदानुकूल ग्रन्थों के बुद्धि व तर्क संगत प्रमाण भी दिये हैं। हम यहां सत्यार्थप्रकाश के चतुर्थ समुल्लास से उनके कुछ विचारों को प्रस्तुत कर रहे हैं। वह लिखते हैं कि जो शूद्र कुल में… Read more »

विश्व इतिहास का अनूठा महानायक 

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ललित गर्ग, दुनिया में अनेक महापुरुषों की स्मृति को क्षीण होते हुए देखा है, लेकिन नेल्सन मंडेला इसके अपवाद है। उनके जीवित रहते समय जितना उनको सम्मान प्राप्त हुआ, उससे कहीं अधिक उनकी मृत्यु के बाद उन्हें समूची दुनिया ने आदर दिया है। पिछले कुछ वर्षों में अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर उनके प्रति जितनी उत्सुकता बढ़ी… Read more »