चुनाव राजनीति वाकई, उप्र में मोदी की सुनामी है April 23, 2014 | Leave a Comment -सुरेश हिन्दुस्थानी- भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश प्रभारी अमित शाह का कहना है कि वाराणसी में जैसे ही पार्टी के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेन्द्र मोदी नामांकन जमा करेंगे, वैसे ही मोदी नाम की लहर सुनामी में परिवर्तित हो जाएगी। वास्तव में यह कहना वर्तमान राजनीतिक स्थिति को अक्षरश: रेखांकित करता है। यह कहना […] Read more » Narendra Modi uttar pradesh उत्तर प्रदेश नरेंद्र मोदी
राजनीति वामपंथ की छाया में पनपते केजरीवाल January 31, 2014 / January 31, 2014 | Leave a Comment -सुरेश हिन्दुस्थानी- क्या आप पार्टी के संस्थापक कहे जाने वाले अरविन्द केजरीवाल वामपंथ की विचारधारा को लेकर आगे बढ़ रहे हैं? जिस प्रकार से वामधारा के कथित बुद्धिजीवी आम आदमी पार्टी का दामन थाम रहे हैं, उससे तो ऐसा ही लगता है। वर्तमान में जितने भी लेखक आप के बारे में अच्छा लिख रहे […] Read more » AAP America support to Kejrival Arvind Kejrival Ashutosh वामपंथ की छाया में पनपते केजरीवाल
समाज अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा December 18, 2013 | 1 Comment on अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा सुरेश हिन्दुस्थानी भारत जैसे देश में अप्राकृतिक कृत्य का समर्थन करना निश्चित ही भारतीयता को तार तार करने का षडयंत्र है, भारत एक सांस्कृतिक देश है, जहां अनेक संस्कार हैं। पूरा जीवन इन्हीं संस्कारों के साए में आगे बढ़ता है लेकिन जब हम संस्कारों को भूलकर कुसंस्कारों की ओर बढ़ते हैं तब निश्चित ही भारत […] Read more » अप्राकृतिक कृत्य बनाम रिश्तों की मर्यादा
शख्सियत जन नेता बनकर उभरे शिवराज December 17, 2013 / December 17, 2013 | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी मध्यप्रदेश की राजनीति में शिवराज सिंह चौहान एक स्वर्णिम मिसाल बनकर उभरे हैं, उनकी अपरिमित कार्यक्षमता का कोई मुकाबला नहीं, मध्यप्रदेश की राजनीति में जिस प्रकार की राजनीति का सूत्रपात शिवराज ने किया है, वह राजनीति में वास्तविक जनसेवक की याद को ताजा कर देता है। भारत की आजादी के समय वास्तव में […] Read more » जन नेता बनकर उभरे शिवराज
राजनीति कांग्रेस की दिल्ली रैली के निहितार्थ November 20, 2013 / November 20, 2013 | Leave a Comment सुरेश हिन्दुस्थानी देश के पांच राज्यों में जिस प्रकार से ताबड़तोड़ चुनाव प्रचार चल रहा है, उसमें हो रही चुनावी सभाओं में भीड़ कहीं कम तो कहीं ज्यादा आ रही है। जब चुनावी सभा में ज्यादा भीड़ आती है तो जिस दल की सभा होती है, उस दल के कार्यकर्ता समझने लगते हैं कि यह […] Read more »