Narendra Modi

अमेरिका ने दिखाया पाकिस्तान को आइना

अमेरिका ने भी आतंकवाद के दंश को करीब से भोगा है। इसके साथ ही विश्व के अनेक देशों ने भी इस्लामिक आतंकवाद का साक्षात्कार किया है। वर्तमान में यह पूरी दुनिया जान चुकी है कि आतंकवाद कितना खतरनाक होता है। कश्मीर घाटी में भारत आतंकवाद को लम्बे समय से भोग रहा है। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प ऐसे पहले राष्ट्रपति हैं, जिन्होंने जम्मू कश्मीर सहित भारत के अन्य हिस्सों में आतंकवाद के लिए सीधे तौर पर पाकिस्तान को दोषी ठहराया है।

भारत-अमेरिका के नए दौर के संबंध

प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के पहले ही भारत को दो मोर्चों पर बड़ी कूटनीतिक सफलता मिली है। दोनों को लेकर भारत सरकार लंबे समय से राजनयिक स्तर पर अमेरिका पर दबाव बना रही थी। जिसमें कि पहला यह कि अमेरिका ने भारत को 22 अमेरिकी ‘गार्जियन ड्रोन’ के सौदे को मंजूरी दे दी है। ये ड्रोन अभी सिर्फ अमेरिकी सेना इस्तेमाल करती है, जिसेकि प्राप्‍त करने के लिए भारत लम्‍बे समय से प्रयासरत था। इस सौदे को लेकर ट्रंप के पूर्ववर्ती ओबामा प्रशासन ने वादा भी किया था। किंतु अपने कार्यकाल के दौरान ओबामा अपना किया वादा पूरा नहीं कर पाए थे जो अब जाकर ट्रम्‍प काल में पूरा होने जा रहा है।

बड़ी अदालत में बड़ा अन्याय

भारत के सर्वोच्च न्यायालय में आप किसी भी भारतीय भाषा का प्रयोग नहीं कर सकते। हिंदी का भी नहीं। हिंदी राजभाषा है। यह हिंदी और राज दोनों का मजाक है। यदि आप संसद में भारतीय भाषाओं का प्रयोग कर सकते हैं तो सबसे बड़ी अदालत में क्यों नहीं? सबसे बड़ी अदालत में सबसे बड़ा अन्याय है, यह ! देश के सिर्फ चार उच्च न्यायालयों में हिंदी का प्रयोग हो सकता है- राजस्थान, उप्र, मप्र और बिहार! छत्तीसगढ़ और तमिलनाडु ने भी स्वभाषा के प्रयोग की मांग कर रखी है।

राहुल गांधी पर अपने भाषणों में बहुत क्रूर हैं मोदी !

देखा जाए तो, मोदी को इस क्रूर अंदाज में लाने का श्रेय भी कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी और उनकी माता सोनिया गांधी को ही जाता है, जिन्होंने मोदी को ‘लाशों का सौदागर’ से लेकर ‘शहीदों के खून का दलाल’… और न जाने क्या क्या कहा। फिर वैसे देखा जाए, तो लोकतंत्र में अपनी ताकत को ज्यादा लंबे वक्त तक जमाए रखने के लिए कुछ हद तक क्रूर और अत्यंत आक्रामक होना भी आज मोदी की सबसे पहली जरूरत है।