तनवीर जाफरी

पत्र-पत्रिकाओं व वेब पत्रिकाओं में बहुत ही सक्रिय लेखन,

संदेश ले०उमर फ़ैयाज़ की शहादत के?

गुपचुप तरीक़े से कश्मीरी आंदोलन में जेहादी तत्वों की घुसपैठ की चर्चा तो पहले भी होती रही है परंतु पहले ये नौबत कभी नहीं आई थी कि कोई आतंकी कमांडर हुर्रियत नेताओं को कश्मीर मसले को राजनैतिक मसला बताने के लिए इस हद तक खबरदार करे कि वह हुर्रियत नेताओं के सिर काटकर लाल चौक पर लटकाने की धमकी तक दे दे। बहरहाल इस धमकी के बाद तथा लेिफ्टनेंट उमर फ़ैयाज़ की हत्या व उस हत्या के बाद आए आतंकियों के संदेश के बाद तो यह बात साफ़ हो चुकी है कि कश्मीर को सीमापार से हो रहे हस्तक्षेप की मदद से कथित जेहाद की आग में झोंकने की तैयारी भी हो चुकी है।

 ऐ ‘पाक परस्त’ कश्मीरी नौजवानों…

पाकिस्तानी नेताओं के लिए मसल-ए-कश्मीर एक ऐसी संजीवनी है जिसे चुनाव के समय पाकिस्तानी अवाम के बीच उछाल कर वहां की राजनैतिक पार्टियां लोगों से हमदर्दी हासिल करना चाहती हैं। बड़े आश्चर्य की बात है कि कश्मीरी नवयुवक पाकिस्तान के साथ-साथ पाक अधिकृत कश्मीर के हालात पर भी आख़िर नज़र क्यों नहीं डालते? जिस पाकिस्तान जि़ंदाबाद के नारे भारत में लगाए जाते हैं जिस पाकिस्तान के झंडे कश्मीर में बुलंद किए जाते हैं वही नारे और वही झंडे पाक अधिकृत कश्मीर में वहां के कश्मीरवासी बुलंद करने से आख़िर क्यों गुरेज़ करते हैं?

मुस्लिम महिलाओं के प्रति प्रगतिशील सोच की दरकार

अपनी धर्मरूपी सीमित शिक्षा तथा प्रतिभावान मुस्लिम महिलाओं को दी जाने वाली ऐसी शिक्षा जो उन्हें आईएएस,आईपीएस,पायलेट,इंजीनियर,वैज्ञानिक आदि बनाती हो, का तुलनात्मक अध्ययन करें तो धर्मगुरुओं को अपनी शिक्षा व ज्ञान का अंदाज़ा स्वयं हो जाएगा। और यदि मुस्लिम समाज को आगे ले जाना है, इसे आर्थिक व सामाजिक रूप से समृद्ध बनाना है तो मर्दों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं को भी अपनी प्रतिभाओं तथा योग्यताओं को ज़ाहिर करना होगा।