बाबा रामदेव और अन्ना हजारे अलग-अलग क्यों?

डॉ. पुरुषोत्तम मीणा ‘निरंकुश’

भ्रष्टाचार के मुद्दे पर बाबा रामेदव लम्बे समय से अपने योग शिविरों में जनान्दोलन चलाते आ रहे हैं| उन्होंने कुछ बड़ी रैलिया भी की हैं और देशभर में जनजागरण अभियान चलाया हुआ है| वहीं दूसरी ओर अन्ना हजारे भी लम्बे समय से महाराष्ट्र में रहकर भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई लड़ते आ रहे हैं| जन्तर-मन्तर पर अनशन से पूर्व उनको बाबा रामदेव की तुलना में बहुत कम लोग जानते थे| अन्ना के अनशन का असर यह हुआ कि बाबा रामेदव ने स्वयं अन्ना के मंच पर पहुँचकर, अन्ना हजारे के आन्दोलन को समर्थन दिया| जिससे देश को लगा कि बाबा रामेदव का असल मकसद भ्रष्टाचार को नेस्तनाबूद करना है, न कि उन्हें स्वयं सत्ता हासिल करनी है|अनशन समाप्त हुआ और जन लोकपाल बिना बनाने की कमेटी के गठन के साथ ही बाबा रामेदव एवं अन्ना हजारे के बीच वैचारिक मतभेद की खबरें भी मीडिया के माध्यम से जनता तक आने लगी| जो लोक अन्ना का प्रचार-प्रसार करते नहीं थक रहे थे, अचानक वे अन्ना के विरोधी और बाबा रामेदव के समर्थक हो गये| बाबा रामेदव ने रामलीला मैदान में अनशन किया| पहले सरकार ने बाबा की अगवानी की| बाबा से बन्द कमरें में चर्चाएँ की और उसी सरका ने अनशन को समाप्त करने के लिये अनैतिक, असंवैधानिक और अमानवीय रास्ता अख्तियार किया| इसके बाद बिना किसी उपलब्धि के बाबा का अनशन टूट गया| इससे बाबा रामेदव का ग्राफ एकदम से चीचे आ गया|इसके बाद फिर से अन्ना हजारे ने अनशन करने की घोषणा कर दी और साथ ही अपने मंच पर बाबा रामेदव के आने पर सार्वजनिक रूप से शर्तें लगा दी हैं| जो बाबा रामेदव आगे से चलकर जन्तर-मन्तर पर अन्ना हजारे को समर्थन देने गये थे, उन्हीं बाबा रामेदव को अब अन्ना हजारे अपने मंच पर नहीं आने देना चाहते हैं! यह अकारण नहीं हो सकता| देश के लोगों के बीच इस बारे में अनेक प्रकार की भ्रान्तिया पनप रही हैं|इस प्रकार से दोनों अनशनों के बाद से देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ काम करने वाले दो बड़े नाम उभरकर सामने आ रहे हैं-बाबा रामेदव एवं अन्ना हजारे| इस कारण से देश में भ्रष्टाचार के विरुद्ध चल रहा आन्दोलन बौंथरा होता जा रहा है| जनता को समझ में नहीं आ रहा है कि देश का मीडिया बता रहा है, उसमें कितनी सच्चाई है?दूसरी ओर इस देश के मीडिया की विश्‍वसनीयता सन्देह के घेरे में है| ऐसे में आम व्यक्ति का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी वैकल्पिक मीडिया की है| जिसे वैकल्पिक मीडिया एक सीमा तक निभा भी रहा है, लेकिन वैकल्पिक मीडिया भी सामन्ती मीडिया, साम्प्रदायिक मीडिया, वामपंथी मीडिया, धर्मनिरपेक्ष मीडिया, दलित मीडिया, धर्मनिरपेक्ष मीडिया, अल्पसंख्यक मीडिया आदि कितने ही हिस्सों में बंटा हुआ नजर आ रहा है| केवल इतना ही नहीं, वैकल्पिक मीडिया पर आधारही आलेखों के प्रकाशन और लेखन का ‘क’ ‘ख’ ‘ग’ नहीं जानने वाले घटिया पाठकों की घटिया, संकीर्ण, स्तरहीन और असंसदीय टिप्पणियों को बिना सम्पादकीय नियन्त्रण के प्रकाशन के कारण भी वैकल्पिक मीडिया की उपस्थिति एवं समाज में विश्‍वसनीयता संन्देह के घेरे में है|ऐसे में बाबा रामेदव और अन्ना हजारे के बीच बंट चुके भ्रष्टाचार विरोधी जनान्दोलन के बारे में आम जनता को सही, पुष्ट एवं विश्‍वसनीय जानकारी नहीं मिल पाना दु:खद और निराशाजनक है| इन हालातों में देशभर में प्रभावी प्रिण्ट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से तो पूर्ण निष्पक्षता की आशा नहीं की जा सकती और ले-देकर वैकल्पिक मीडिया से ही इस बारे में कुछ करने की अपेक्षा की जा सकती है|अत: वैकल्पिक मीडिया को चाहिये कि देशहित में बाबा रामदेव एवं अन्ना हजारे के बारे में अभी तक सामने आये पुष्ट एवं विश्‍वसनीयों तथ्यों और जानकारी के प्रकाश में कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर खुलकर चर्चा की जाये और देश के लोगों को अवगत करवाया जाये कि ये दोनों अलग-अलग क्यों हैं और देश के प्रमुख तथा विवादास्पद मुद्दों पर दोनों के क्या विचार हैं| जिससे देश की जनता को दोनों में से एक को चुनने में आसानी हो सके या दोनों को मिलकर कार्य करने के लिये सहमत किया जा सके| इस चर्चा को विस्तार देने के लिये विद्वान लेखकों और पाठकों को आगे आना चाहिये| मेरा मानना है कि बाबा रामदेव एवं अन्ना हजारे के बारे में निम्न विषयों पर चर्चा होनी चाहिये और भी बिन्दु जोड़े जा सकते हैं:-

१. संविधान की गरिमा के प्रति कौन कितना संवेदनशील हैं?

२. आमजन से जुड़े भ्रष्टाचार, अत्याचार, व्यभिचार, कालाबाजारी, मिलावट आदि विषयों के प्रति दोनों के क्या विचार हैं?

३. देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप में किसको कितनी आस्था है?

४. संविधान प्रदत्त समानता के अधिकार के तहत स्त्रियों को समान नागरिक मानने और हर एक क्षेत्र में स्त्रियों को समान भागीदारी के बारे में दोनों के विचार?

५. चुनावी भ्रष्टाचार के समाधान के बारे में दोनों के विचार और समाधान के उपायों का कोई खाका?

६. इस देश की व्यवस्था पर आईएएस का कब्जा है जो भ्रष्टाचार में आकंठ डूबकर भी पाक-साफ निकल जाते हैं| इनकी तानाशाही पर नियन्त्रण पर दोनों के विचार?

७. दलित, आदिवासी और पिछड़े, जिनकी देश में लगभग ६५ प्रतिशत आबादी मानी जाती है को प्रदत्त आरक्षण एवं इसकी सभी क्षेत्रों में अनुपातिक भागीदारी के बारे में दोनों के विचार क्या हैं? मेरी दृष्टि में इस देश में इस ६५ प्रतिशत आबादी का यह मुद्दा किसी भी मामले में निर्णायक भूमिका निभाने वाला है, क्योंकि लोकतन्त्र में वोटबैंक की ताकत सबसे बड़ी ताकत है और इस वर्ग का वोट ही सत्ता का निर्धारक है|

८. अल्पसंख्यकों, विशेषकर इस्लाम के अनुयाईयों के बारे में दोनों के क्या विचार हैं? यह मुद्दा इस कारण से अधिक संवेदनशील है, क्योंकि भारत में से पाकिस्तान का विभाजन इस्लामपरस्त लोगों की अलग राष्ट्र की मांग को पूरा करने के लिये हुआ था| लेकिन देश के स्वतन्त्र और निष्पक्ष चिन्तकों के एक बुद्धिजीवी वर्ग का साफ मानना है कि इस्लाम के नाम पर अलग से राष्ट्र का निर्माण हो जाने के बाद भी इस्लाम के जो अनुयाई धर्मनिरपेक्ष भारत में ही रुक गये| उनकी देशभक्ति विशेष आदर और सम्मान की हकदार है| अत: उनके धार्मिक विश्‍वास एवं राष्ट्रीय आस्था को जिन्दा रखना भारत की धर्मनिरपेक्ष सरकारों का संवैधानिक दायित्व है|

९. भूमि-अधिग्रहण के बारे में आजादी से पूर्व की नीति ही जारी है| जिसका खामियाजा देश के किसानों को भुगतना पड़ रहा है| इस बारे में दोनों के विचार|

१०. जिन धर्मग्रंथों में हिन्दु धर्म की बहुसंख्यक आबादी का खुलकर अपमान और तिरस्कार किया गया है| यह देश के भ्रष्टाचार से भी भयंकर त्रासदी है| इन सभी धर्मग्रंथों पर स्थायी पाबन्दी के बारे में दोनों के विचार?

११. भारत में भ्रष्टाचार के खिलाफ पहली बार आन्दोलन नहीं हो रहा है| पूर्व में भी भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन को सफलता मिली थी| सरकारें भी बदली, लेकिन स्थिति जस की तस बनी रही| ऐसे में अब सत्ता नहीं, व्यवस्था को बदलना जनता की प्राथमिकता है| अत: दोनों में से कौन तो व्यवस्था को बदलने के लिये कार्य कर रहे हैं और कौन स्वयं सत्ता पाने या किसी दल विशेष को सत्ता दिलाने के लिये काम करे हैं|

पाठकों, विचारकों से मेरा विनम्र निवेदन है कि इस बारे में खुलकर चर्चा (बहस नहीं) करनी चाहिये| इन विषयों में कोई गलत चयन किया गया है तो उसे सतर्क सुचिता पूर्वक नकारें और यदि कोई महत्वूपर्ण विषय शेष रह गया है, तो उसे जोड़ें| आशा है कि इस बारे में देश का प्रबुद्ध वर्ग अवश्य ही विचार करेगा?

 

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डॉ. पुरुषोत्तम मीणा 'निरंकुश'
मीणा-आदिवासी परिवार में जन्म। तीसरी कक्षा के बाद पढाई छूटी! बाद में नियमित पढाई केवल 04 वर्ष! जीवन के 07 वर्ष बाल-मजदूर एवं बाल-कृषक। निर्दोष होकर भी 04 वर्ष 02 माह 26 दिन 04 जेलों में गुजारे। जेल के दौरान-कई सौ पुस्तकों का अध्ययन, कविता लेखन किया एवं जेल में ही ग्रेज्युएशन डिग्री पूर्ण की! 20 वर्ष 09 माह 05 दिन रेलवे में मजदूरी करने के बाद स्वैच्छिक सेवानिवृति! हिन्दू धर्म, जाति, वर्ग, वर्ण, समाज, कानून, अर्थ व्यवस्था, आतंकवाद, नक्सलवाद, राजनीति, कानून, संविधान, स्वास्थ्य, मानव व्यवहार, मानव मनोविज्ञान, दाम्पत्य, आध्यात्म, दलित-आदिवासी-पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक उत्पीड़न सहित अनेकानेक विषयों पर सतत लेखन और चिन्तन! विश्लेषक, टिप्पणीकार, कवि, शायर और शोधार्थी! छोटे बच्चों, वंचित वर्गों और औरतों के शोषण, उत्पीड़न तथा अभावमय जीवन के विभिन्न पहलुओं पर अध्ययनरत! मुख्य संस्थापक तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष-‘भ्रष्टाचार एवं अत्याचार अन्वेषण संस्थान’ (BAAS), राष्ट्रीय प्रमुख-हक रक्षक दल (HRD) सामाजिक संगठन, राष्ट्रीय अध्यक्ष-जर्नलिस्ट्स, मीडिया एंड रायटर्स एसोसिएशन (JMWA), पूर्व राष्ट्रीय महासचिव-अजा/जजा संगठनों का अ.भा. परिसंघ, पूर्व अध्यक्ष-अ.भा. भील-मीणा संघर्ष मोर्चा एवं पूर्व प्रकाशक तथा सम्पादक-प्रेसपालिका (हिन्दी पाक्षिक)।

10 COMMENTS

  1. श्री आर सिंह साहेब कुछ लोगों का काम है, सच को किसी भी तरीके से दबाना!

    मेरा मानना है कि सर्व गुण सम्पन्नता आज के समय में बहुत मुश्किल है और निष्कलंक व्यक्ति ढूंढना भी मुश्किल है!

    इसलिए कोई भी किसी पर भी आरोप लगाने और आधार नहीं बताकर चुप हो जाने के लिए कम से कम नेट पर तो अभी तक आज़ाद ही है!

    जल्दी ही ऐसे लोगों को जेल में डालने के लिए कानून अपना काम करने वाला है! तब सब सियारों की भांति केवल हुआं-हुआं करते हुए नज़र आयेंगे!

  2. मीड़ा जी ,
    अन्ना जी एवं बाबा रामदेव जी मे कोइ फर्क नहीं है लेकिन फर्क है (१) बाबा और अन्ना दोनों अलग अलग रंग के कपडे पहनते है (२)दोनों की उम्र मे लगभग दुगुने का अनुपात है |(३) दोनों का ही जीवन देश एवं समाज के लिए अर्पित है |(४)दोनों ही भ्रष्टाचार के खिलाफ है | (५ ))दोनों के ही साथ करोडो लोगो का साथ है |(६)श्री श्री रवि शंकर जी एवं किरण बेदी जी दोनों के साथ है |(७) भारत की १२० करोड़ जनता बाबा रामदेव ji, अन्ना जी , श्री श्री रविशंकर जी , किरण बेदी , एवं बहुत बहुत बहुत सारे नेक लोगो के साथ है |(८)दोनों के अनुभव मे फर्क है एक १९४७ के पहले जन्मा था और दूसरा १९४७ के बाद जन्मा |(९)
    बाबा रामदेव सरकार के कपट का शिकार हुए (१०)अन्ना टीम ने ४ जून ११ की घटना से सबक सीखा है |(११)अन्ना जी रामलीला मैदान मे खुले आम बैठे है , पुलिसे उनको छू नहीं सकती है |(१२) अन्ना की तरफ से अन्ना टीम भी जबाब देती है |(१३)४ जून ११(दूसरा जलिया वाला बाग़ )दोहराने मे सरकार ?(१४)अन्ना ने कहा है की अगर गांधी बनने से काम नहीं तो शिवा जी भी बन सकते है |
    भ्रष्ट्र सरकार अपने और अपने कुत्तो को बचाने के लिए कुछ भी कर सकती है| बहुत सारे लोग सरकार के पैसे पर पत्रकारिता करते है |यह भी लोकतंत्र का हिस्सा है | बाबा रामदेव अन्ना जी ने उन्हे जगा दिया है |

  3. राज जी आप अन्ना हजारे से बहुत खार खाए लगते हैं.आपने ऐसी ही कोई टिप्पणी मेरे लेख के सम्बन्ध में भी दी थी.उस समय मैंने आपसे अन्ना हजारे के विरुद्ध आपके वक्तव्य का प्रमाण माँगा था.आपने तो वह दिया नहीं,पर आपके किसी समर्थक ने कहा था की आप जल्द ही वह प्रमाण देंगे.पता नहीं वह जल्द कब आयेगा?.इसी बीच आप अपने वक्तव्य को दोहराते जा रहे हैं.मैं नहीं जानता की आपको इससे क्या व्यक्तिगत लाभ हो रहा है,पर हानि तो साफ़ साफ़ दिख रही है,क्योंकि आप जैसे लोग भष्टाचार विरोधी आन्दोलन को खेमों में बांटने का काम कर रहे हैं.काश! आपने अपनी टिप्पणी देने के पहले इसी लेख से सम्बन्धित इन्ही पन्नों में दर्जित इसके पहले वाली मेरी टिप्पणी पर थोड़ा ध्यान दिया होता. पर आप ऐसा करते कैसे?आप क लिए तो मुख्य समस्या भ्रष्टाचार नो होकर अन्ना हजारे हैं.अगर ऐसा भी है और आपको लगता है की अन्ना हजारे के कदम भष्टाचार के आन्दोलन को पटरी से उतारने के लिए है तो आपको इसके लिए प्रमाण देने चाहिए.ऐसे तो भारत में बोलने की स्वतंत्रता है इसलिए आप कुछ भी बोल सकते हैं,पर जबतक वह वक्तव्य आधारहीन होगा तब तक वह एक बकवास के अतिरिक्त और कुछ नहीं होगा.हाँ एक बात अवश्य होगी. बाबा रामदेव अवश्य आपसे प्रसन्न हो जायेंगे.

  4. बकवास लेख है सर मैं आप से पूछना चाहता हूँ की क्या आप अन्ना को कितना जानते है maharatra वो ब्लाच्क्मैलेर के रूप मैं जाने जाते है , वैसी बात स्वामी रामदो के बारे मैं नहीं बता सकते , वैसे भी अन्ना का आन्दोलन कांग्रेस रो मीडिया प्रेरित है , वो सिर्फ बाबा रामदेव की लोकप्रियता को कम करना चाहते है अन्ना पैसे लेकर अनसन करता है

  5. श्री मीना जी अपने जो ११ बिंदु दर्शाए है वो बिलकुल सही है.

  6. मीणा जी बहुत बहुत आभार

    आपने बहस को आगे बढाने का आग्रह किया
    उम्मीद के अनुसार यह बहुत ही सार्थक पहल साबित होगी ऐसा मेरा विस्वास है .

    किन्तु यदि कोई व्यक्ति आपके उपरोक्त कथनों के बारे में कोई टिप्पणी करता है तो इस बहस की सार्थकता में संदेह उत्पन्न हो जायेगा .
    जो प्वैंट्स आपने रखे है वह निश्चय ही विचारणीय है .
    किन्तु आम जन से इनके बारे में टिप्पणी लेना उचित नहीं है
    आपके कथनों पर baba रामदेव व अन्ना हजारे के आपने विचारो का ही महत्त्व है

    न की आम जनमानस के विचारो का

    मै सभी बुध्धिजिवियो से आकांक्षा करता हू की दोनों ही पुरोध्धाओ के विचारो में अंतर होते हुए भी उनके लक्क्ष सामान है,

    अतः बिना किसी भेद भाव के दोनों का समर्थन करना हम सभी का परम कर्तव्य है

  7. मीणा जी आपने प्रश्न तो अच्छे उठाये हैं पर मैं नहीं समझता की अन्ना हजारे या बाबा रामदेव के आन्दोलनों में सम्मिलित रूप में भी इन प्रश्नों का समाधान है.उस हालत में मेरे विचार से आपके द्वारा उठाये गये अधिकतर प्रश्न बेमानी हो जाते हैं.बाबा राम देव जहाँ विदेशों में जमा काले धन की वापसी को भ्रष्टाचार समाप्त करने की दिशा में रामवाण समझते हैं,वही अन्ना हजारे या उनके सहयोगी जन लोक पाल बिल को भ्रष्टाचार या उससे उत्पन्न समस्याओं के समाधान के रूप में देखते हैं.मेरे विचार से इनका आन्दोलन प्रयक्षतः इन्ही दो सीमाओं के अंदर कार्य करता दिखाई देता है.इससे परे अगर भारत स्वाभिमान नामक बाबा रामदेव के संगठन के मसौदे को देखा जाये तो कुछ अन्य बातेभी सामने आती है और मेरे विचार से वे इनमे से अधिकतर प्रश्नों का समाधान प्रस्तुत करती है.ऐसा कोई मसौदा अन्ना हजारे के किसी सन्गठन का मेरी नज़रों से नहीं गुजरा है,अतः उसके बारे में मैं कुछ नहीं कह सकता.ऐसे अगर विवेचना में हमलोग भ्रष्टाचार के मुद्दे को एक मात्र समस्या मान कर चले तो मेरे विचार से ज्यादा अच्छा हो.मेरे विचार से .भारत कीसबसे ज्वलंत समस्या भ्रष्टाचार हैऔर अगर इसपर काबू पालिया जाये तो बहुत समस्याएं या तो अपने आप खत्म हो जायेगी या उनपर काबू पाना आसान हो जाएगा.ऐसे भी कबीर दास बहुत पहले कह गये है की एक ही साधे सब सधे,सब साधे सब जाए.आप कहेंगे की कबीर दास का यह कथन तो किसी अन्या प्रसंग में है.हो सकता की ऐसा ही हो,पर इस विषय वस्तु के लिए भी वह सटीक लगता है. अंत में मैं यह कहना चाहूंगा की मतभेदों से ऊपर उठकर अगर अन्ना हजारे और बाबा रामदेव के समर्थक या वे भी जो इन दोनों से नहीं जुड़े हैं,,एकजूट होकर इस भ्रष्टाचार रूपी दानव को खत्म करने केलिए आगे आयें तो अत्युतम हो.

  8. १- श्री सुथार जी आपने टिप्पणी की इसके लिए आपका आभार|
    मेरे प्रस्तुत लेख में जो सवाल उठाये गए हैं, ये उन पाठकों से ही सम्बंधित हैं जो इन सबके बारे में पूर्व से ही जानते हैं| यदि आप नहीं जानते हैं तो कृपया जानें! अन्यथा आप खुद को चर्चा से अलग कर सकते हैं| मैं अपनी ओर इस लेख पर स्वस्थ और पूर्वाग्रह रहित चर्चा की अपेक्षा रखता हूँ| इसलिए अभी आपको चाही गयी जानकारी उपलब्ध नहीं करा सकता! आशा है कि आप प्रबुद्धता का परिचय देंगे|
    २- श्री उत्तम कुमार जी आपने टिप्पणी की इसके लिए आपका आभार|
    बन्धु आप मेरी किस बात से संतुष्ट हैं, साफ़ नहीं हो रहा है| मेरा निवेदन है कि इस चर्चा को आगे बढ़ाएं और विस्तार से बिन्दुबार टिप्पणी दे सकें तो आपका आभारी रहूँगा|

  9. जिन धर्मग्रंथों में हिन्दु धर्म की बहुसंख्यक आबादी का खुलकर अपमान और तिरस्कार किया गया है| यह देश के भ्रष्टाचार से भी भयंकर त्रासदी है| इन सभी धर्मग्रंथों पर स्थायी पाबन्दी के बारे में दोनों के विचार?

    ये कोनसे ग्रन्थ है मान्यवर

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